चाय बेचने की ऐसी लत लगी है कि देश की संपत्ति बेचने लगा!
जो IDBI बैंक 5 साल में ₹28,768 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमा रही है, जिसका मुनाफा हर साल बढ़ रहा है, उसी को सरकार कौड़ियों में बेच रही है!
₹25,000 करोड़ जनता का पैसा डालकर बैंक को खड़ा किया, अब जब ₹9,513 करोड़ सालाना कमाने लगी तो अपने कनाडाई मित्र प्रेम वत्सा को ₹81 प्रति शेयर में थमा दिया!
ये विनिवेश नहीं, देश के मुनाफे की लूट है!
जो ढोल पीट रहा था 7.8% GDP का वो आज बैंक बेच रहा है...
Make in India से शुरू हुआ सफ़र, आत्मनिर्भर भारत के रास्ते अब ‘बेचो इंडिया’ तक पहुँच गया
राष्ट्रीय संपत्तियाँ बेच कर मोदी सरकार मना रही 'अमृतकाल'..
🚨 IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बिकेगी, मोदी सरकार ने दी मंजूरी।
केंद्र सरकार अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी कनाडा की Fairfax Financial Holdings को बेचेगी। सौदे के बाद सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी बचेगी। विदेशी बैंक Fairfax को प्रबंधन नियंत्रण मिल जाएगा।
(जय हो भक्तों के भगवान मोदी की..)
क्रोनोलॉजी समझिए : जब बैंक डूब रहा था, तब जनता के पैसे से सुधारा। जैसे ही बैंक मुनाफे में आया, सरकार ने इसे विदेशी हाथों में सौंप दिया
बीमार बैंक का इलाज जनता के पैसे से, और तंदुरुस्त होते ही मलाई कनाडाई बाबू को।
एक चाय बेचने वाले ने पहले नारा दिया था कि - 'मैं देश नहीं झुकने दूँगा', अब लग रहा है - 'मैं पूरे देश को बेच दूंगा!'
जो खुद को 56 इंची सीने वाला बताकर सत्ता में आया, उस महामानव के राज में सरकारी संपत्तियाँ निजी हाथों में जा रही हैं।
मोदी द्वारा पहले ही 13 से ज़्यादा पब्लिक सेक्टर कंपनियों को बेचे जा चुके हैं और अब रेल बेचने, एयरपोर्ट बेचने, जंगल बेचने के बाद अब बैंक बेचने के साथ ही भारतीय कंपनियाँ और सार्वजनिक संपत्तियाँ यूँ ही बिकती रहीं, तो आने वाले कल जनता के हिस्से में सिर्फ़ महँगाई और निजीकरण बचेगा।
सब कुछ बिक रहा है धीरे-धीरे, जनता आँखें बंद किए बैठी है,
आम जनता के पैसे से खड़े किए गए सरकारी संस्थान अब निजी हाथों में जा रहे हैं। और अंधभक्तों के महामानव (paw - paw) बड़ी बेशर्मी से मंच पर आकर विपक्ष को कोसता है, गुस्सा दिखाता है...लेकिन पूंजीपतियों के हाथों इस बिकी हुई सरकार ने आखिर देश की संपत्ति बेचने नफरती कानून लागू करने और नई शिक्षा नीति से शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के अलावा किया ही क्या है?
नालायक देश चला रहा है या सेल लगा रखी है?
'वोट चोरी' और प्रोटेस्ट की ख़बरों के बीच अयोध्या के राम मंदिर की चंदा चोरी और एपस्टीन फाइल का मुद्दा पूरी तरह दब चुका है. बीफ कंपनियों से चंदा, इलेक्टोरल बांड घोटाला और अब IDBI बैंक का बड़ा हिस्सा बिकने की ताजी खबर भी चर्चा से बाहर है. भाजपा की यही तो खासियत है। आपको बांग्लादेश और पाकिस्तान के मुद्दे पकड़ाकर कोई बड़ा घोटाला चुपचाप कर जाता है।
जय हो अंधभक्तों की... @kharge@kcvenugopalmp@INCHaryana@DeependerSHooda@INCIndia@raonarenderinc@SanjaySDutt@AdvRajendraPal@LambaAlka@RahulGandhi@TeamDeepender@MahilaCongress@INCSCDept@VinodJakharIN@Haryana_YC@JitendraBaghel_@Dr_Uditraj@INCOBCDept@ObcCongressHr@priyankagandhi@gurdeepsappal@TikaRamJullyINC@Kumari_Selja@KRajuINC@HaryanaPMC@RaoDanSinghHR@BhupinderShooda@VardhanYaadav@rssurjewala@BrijendraSpeaks
Post no.236 #GOBACKFAIRFAX
WE, THE EMPLOYEES OF IDBI BANK, OPPOSE PRIVATISATION!
IDBI Bank is not just a financial institution,it is our livelihood, our professional identity, and a legacy built through decades of dedicated service
Post no.237 @rashtrapatibhvn
WE, THE EMPLOYEES OF IDBI BANK, OPPOSE PRIVATISATION!
IDBI Bank is not just a financial institution,it is our livelihood, our professional identity, and a legacy built through decades of dedicated service..
A year ago, Rahul Gandhi warned about a closed-door deal on IDBI Bank. Today, Cabinet approval moves the deal forward, without an open debate in Parliament.
Cabinet approval is not public consent. Debate in parliament before handing over a PSB to Foreign hands?
IDBI बैंक बिक गया, और ये बात राहुल गाँधी जी ने एक साल पहले ही बता दी थी।
IDBI के कर्मचारी राहुल की पोस्ट पर पूरी ज़िंदगी का पट्टा लिखवाने को तैयार हैं अगर वे उसे बचा लें, पर ये बर्बादी तो उन्होंने ख़ुद ही लिखी है न अपनी तकदीर में?
उनमें से कई को हिंदू राष्ट्र चाहिए होगा। भगतो ?
Post no.231 #IDBINotForSale
WE, THE EMPLOYEES OF IDBI BANK, OPPOSE PRIVATISATION!
IDBI Bank is not just a financial institution,it is our livelihood, our professional identity, and a legacy built through decades of dedicated service
When IDBI Bank was struggling with losses, its employees worked tirelessly to revive it and repay the nation’s trust. Now, when the Bank is profitable, the Government wants to hand it over to foreign investors.
Employees rebuilt the Bank. Why should the benefits go to private buyers?
#IDBINotForSale #SaveIDBI
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