चुनाव आयोग पर उठे गंभीर सवालों का जवाब अब देश को चाहिए।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज की। मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, वोटर डेटा के केंद्रीकरण और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े कदमों पर गंभीर आपत्तियां सामने आईं, जिनमें कुछ को “अनधिकृत” और “अवैध” बताया गया।
जब चुनाव आयोग के भीतर ही इतने गंभीर मतभेद और आपत्तियां दर्ज हुई हैं, तो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
माननीय #SupremeCourtOfIndia को इन तथ्यों का संज्ञान लेकर पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
और यदि चुनाव आयोग इन गंभीर सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
मतदाता का अधिकार सर्वोपरि है। लोकतंत्र में जवाबदेही से कोई ऊपर नहीं हो सकता।
#SupremeCourt
#CJISuryaKant
14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया 🔥
कुत्ता पाल लेना बिल्ली पाल लेना लेकिन वहम मत पालना🔥🔥
यह SC ST ACT में भेजा गया है, अभी पॉक्सो और हत्या के प्रयास में सुनवाई बाकि है,
स्वतंत्र भारद्वाज सहित तमाम मनुवादियों से अनुरोध है कि दल���तों से मत उलझना जीवन नर्क कर दिया जाएगा,
कल एक भूमिहार कि सुनवाई भी है, उम्मीद है वह भी स्वतंत्र भारद्वाज को जॉइन करेगा ।
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक ��रफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना बना देता है।
"भ्रष्टाचार पर चुप्पी तोड़ो,
धर्मेंद्र प्रधान पद छोड़ो"
दिल्ली में बीजेपी सरकार के इशारे पर लोकतांत्रिक रूप से आंदोलन करने वाले युवा साथियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद न्याय की मांग को लेकर नगीना से सांसद व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर जी आजाद द्वारा संसद भवन परिसर में दिए जा रहे धरने म���ं सम्मिलित हुआ |
लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है इस दौर के फरियादी जाएं तो आखिर कहां जाए कानून भी तुम्हारा है, और दरबार भी तुम्हारा है छात्रों पर पड़ी एक एक लाठी का हिसाब होगा धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा
ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है,
वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है।
आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया। मैंने जलियांवाला बाग का वह ��ौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी।
लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि ��ोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।
इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
#राजस्थान सरकार SC/ST के लोगों के साथ में कर रही है बड़ा धोखा,
यदि पंचायत चुनाव में SC/ST के आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों से किया जा रहा है और OBC के लिए 2026 के नए आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है, तो यह कैसा सामाजिक न्याय है?
एक ही चुनाव, लेकिन दो अलग-अलग मापदंड क्यों?
क्या संविधान ने समा���ता का अधिकार सिर्फ़ कुछ वर्गों के लिए दिया है? यदि नए आंकड़े स्वीकार किए जा रहे हैं, तो फिर SC/ST समाज को पुराने आंकड़ों के आधार पर उसका संवैधानिक अधिकार क्यों दिया जा रहा है?
SC/ST समाज किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहा, बल्कि अपने हिस्से का न्याय और संविधान प्रदत्त अधिकार मांग रहा है। सरकार स्पष्ट करे कि आखिर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ यह अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
हमारी मा��ग है कि आरक्षण निर्धारण के लिए सभी वर्गों ��र एक समान और अद्यतन आधार लागू किया जाए। न्याय सबके लिए एक जैसा होना चाहिए, भेदभाव किसी के साथ नहीं।
SC/ST के अधिकारों से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।
@BhimArmyChief
@anil_aazad
#SCST #आरक्षण #सामाजिक_न्याय #Rajasthan #PanchayatElection #Constitution #JusticeForSCST
यह लड़ाई सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहेगी—सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी।जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता,और प्रकृति के विनाश पर चुप्पी कोई विकल्प नहीं है।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रा��य द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत हलफ़नामे में 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली माना न जाना और उनके खनन की अनुमति देना अत्यंत चिंताजनक है।
अरावली पर्वतमाला भारत की एक प्राचीन श्रृंखला है, जो दिल्ली के रायसीना हिल से गुजरात के पालनपुर तक लगभग 800 किलोमीटर लंबी है। रायसीना हिल की ऊँचाई समुद्र तल से बहुत अधिक नहीं है—लगभग 15 मीटर ��पर। इसके बावजूद, यह अरावली पर्वतमाला का हिस्सा होने के कारण सामरिक और राष्ट्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भारत के राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों का केंद्र है, इसलिए इसे अक्सर भारत सरकार के केंद्र के रूप में देखा जाता है।
अरावली का पारिस्थितिक महत्व केवल ऊँचाई पर निर्भर नहीं है। यह परिभाषा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। खनन से ���ू-जल, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों को गंभीर क्षति होगी। यह निर्णय पूर्व के सर्वोच्च न्यायालय के संरक्षणात्मक आदेशों की भावना के विपरीत है।
हमारा सवाल है @byadavbjp जी से :- अगर 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली में शामिल न करने और खनन की अनुमति देने का निर्णय सही ठहरा, तो क्या रायसीना हिल और इसके आसपास के राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों को भी खनन माफियाओं के हवाले कर दिया जाएगा?
यदि यह नीति ��ागू होती है, तो यह हमारी प्राकृतिक संपदा, जल��्रोतों और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगी। हम @mygovindia से मांग करते हैं कि वह पर्यावरणीय नुकसान और लंबे समय तक होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय का तुरंत पुनर्विचार करे।
@mygovindia
@moefcc
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