आज सदन में भाजपा की मंशा जाहिर हो गई, ये लोग SC ST OBC को प्रोफेसर और VC के लायक नहीं मानती!
45 सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 38 वाइस चांसलर (कुलपति) सवर्ण जातियों से है।
वंचितों के हक में बोलने वाली चंद आवाजों में से एक सांसद संजय सिंह @SanjayAzadSln जी भाजपा की परत दर परत पोल खोल रहे है।
UGC एक्ट का विरोध न तो कोई मुसलमान कर रहा है, न कोई ईसाई और न ही कोई बौद्ध समुदाय इससे विचलित दिखाई देता है। इसका सीधा कारण है कि ये समुदाय शिक्षा को बराबरी और सम्मान का माध्यम मानते हैं, न कि वर्चस्व बनाए रखने का औज़ार। UGC के खिलाफ उठने वाली आवाज़ें दरअसल उन्हीं वर्गों से आ रही हैं जिनकी सत्ता और विशेषाधिकार सामाजिक न्याय से हिलते नज़र आते हैं। यह विरोध किसी अकादमिक चिंता का नहीं, बल्कि उस मानसिक असहजता का परिणाम है जो बहुजन समाज के सशक्त होने से पैदा होती है।
उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से लाए गए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का विरोध—अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के अधिकारों के संदर्भ में—किया जाना सामाजिक न्याय के विरुद्ध एक भ्रामक एवं संगठित प्रयास है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
जबकि UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान अथवा दिव्यांगता के आधार पर—विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा दिव्यांगजनों—या इनमें से किसी भी वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव का उन्मूलन करना तथा सभी हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को सुनिश्चित करना है।
उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को संवर्धन करने के उद्देश्य लाए गए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का भीम आर्मी - आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पूर्ण समर्थन करती है।
#ASP_K_Support_UGC_Act
#ASP_K_Support_UGC_Act
तेज तर्रार प्रवक्ता और बेहद ही शालीन स्वभाव के नेता राज कुमार भाटी जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ
सुधांशु त्रिवेदी को दिया ये जवाब आज भी टीबी डिबेट के इतिहास का सबसे बढ़िया जवाब है
ये कभी पुराना ही नहीं होता🤣
#સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાની તૈયારી કરતા મિત્રો આટલા અનુચ્છેદ તો તૈયાર કરી જ લેવા, એમના માટે શોર્ટ નોટ..🙏😊
(Plz Retweet 😊👍)
(GPSC_REVISION)
#GPSC#CCE#PSI#Police
વાહ રે... વાહ રે...
કામધેનુને મળે ના એક સૂકું તણખલું;
ને લીલાછમ ખેતરો આખલા ચરી જાય છે
જે #ગૌચરની જમીન કંપનીના આખલાઓ ચરી ગયા તે જમીન ઉપર બાકાજીકી ચાલે છે..
भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं।
इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है—यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है।
सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है। यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है।किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि—आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है।
यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है।
सवाल उठते है— पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें Guard of Honour दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है?
मुख्यमंत्री @myogiadityanath को याद दिलाना ज़रूरी है—
1. संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं।
2. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है।
3. अनुच्छेद 25–28: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा।
इसका साफ़ मतलब है—संविधान सर्वोच्च है—कोई धर्म नहीं। राज्य का कोई धर्म नहीं होता।
जय भीम,जय भारत,जय संविधान,जय विज्ञान
@UPGovt@CMOfficeUP@dgpup
રાજ્યના ‘સંસ્કારી મંત્રી’ને મારી ચેલેન્જ છે - હિન્દુત્વના નામે વોટ લો છો તો હિંદુ ધર્મની આસ્થાના પ્રતિક એવા સોમનાથ, દ્વારકા, સાળંગપુર હનુમાન, ખોડલધામ, ઉમિયાધામ અને અંબાજી - આ મંદિરોની ત્રણ કિલોમીટરની ત્રિજ્યામાં થતું દારૂ- ડ્રગ્સનું ખરીદ - વેચાણ બંધ કરીને બતાઓ!
ડ્રગ્સના લીધે જે હિંદુ બહેન - દીકરી-માતાઓએ પોતાના ઘરના માણસોને ગુમાવ્યા છે એમને મંત્રીશ્રી પૂછજો કે ડ્રગ્સના કારોબારને લઈને તેઓ શું મહેસૂસ કરે છે!
@tv9gujarati@timesofindia@NewsCapitalGJ@News18Guj@abpasmitatv@gujaratsamaya@gujratsamachar
જીજ્ઞેશ મેવાણીનું રૌદ્ર સ્વરૂપ: મહિલાઓ સાથે મળીને પોલીસ અને SP નો લીધો ઉધડો.
એક નોનકરપ્ટેડ નીડર નેતા જ આવી ચેલેન્જ સિસ્ટમને આપી શકે.
(C) @svamanmedia@jigneshmevani80
લોકરક્ષક કેડરની તા.૧૫.૦૬.૨૦૨૫ના રોજ લેવામાં આવેલ લેખિત પરીક્ષાના ગુણ ભરતી બોર્ડની વેબસાઇટ https://t.co/hUg9Ljrf3I તથા https://t.co/cTams9JbGf ઉપર જાહેર કરવામાં આવેલ છે.
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में प्रधानमंत्री मोदी और नेता विपक्ष राहुल गाँधी के भाषण में आपको किनका भाषण अधिक दमदार लगा?
(पोल सबके लिए खुला है। नतीजा जो भी आए ये डिलीट नहीं किया जाएगा)
"अंबेडकर ने दलितों के लिए अलग देश नहीं, बल्कि आरक्षण माँगा"
"अगर आज बाबासाहेब पीएम होते तो देश में...."
◆ 'Khan Sir' का चाय वाला इंटरव्यू मानक गुप्ता के साथ
◆ पूरा इंटरव्यू: https://t.co/udIw5KGMLV
@manakgupta | #ChaiWalaInterview | Khan Sir
લોકરક્ષક કેડરની તા.૧૫.૦૬.૨૦૨૫ના રોજ લેવામાં આવેલ લેખિત પરીક્ષાની Provisional Answer Key તથા વાંધા / રજુઆતોની વિગતો ભરતી બોર્ડની વેબસાઇટ https://t.co/hUg9Ljrf3I તથા https://t.co/cTams9JbGf ઉપર મુકવામાં આવેલ છે
सिर्फ़ सुरक्षा में चूक से लोगों की जान नहीं गई, गोदी मीडिया की बेईमानी से भी लोग मरे हैं। इस मीडिया ने सुरक्षा को लेकर सवाल करना बंद कर दिया। भाई आप केमिस्ट्री में फेल हो गए उसका जवाब दें। आप गणित में कितना नंबर लाकर दिखा देंगे, इसे लेकर मत फुफकारिए। कहने का मतलब है कि आपने सुरक्षा नहीं दी, लोगों का जीवन मिट्टी में मिल गया। आपकी वजह से हुआ। उसका हिसाब दें। जवाबदेही तय करें फिर जिसे मिट्टी में मिलाना है मिलाइये। वो तो आपका काम ही है।
आप तो मिट्टी में ही मिलाने के एक्सपर्ट हैं। आपने मीडिया मिट्टी में मिला दिया, संस्थाओं को मिट्टी में मिला दिया तो आपमें पूरा भरोसा है सर। जेल में बंद करने और छापा मार कर चुप कराने के अलावा और क्या आता है। इसी से लोगों की आवाज़ मिट्टी में मिल गई है वरना आप उस आवाज का सामना नहीं कर पाते।
आतंकवाद मिटाने के लिए आपने नोटबंदी की थी, लोगों की कमाई मिट्टी में मिल गई। एक नोटबंदी और कर दीजिए। गोदी मीडिया माहौल बना देगा। मोदी की ललकार, फुंफकार और हुंकार बोल कर। इससे कम बहादुरी में एक प्रेस कांफ्रेंस हो सकती है।
क्या आपसे किसी ने नहीं कहा कि मिट्टी में मिला देंगे टाइप के डॉयलॉग प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देते। वो भी तब जब आप केमिस्ट्री में फेल हो गए हों। ऐसी भाषा का प्रयोग दसवीं क्लास का बच्चा वाद विवाद प्रतियोगिता में करता है।जब तर्क और विवेक नहीं होता तो वीर रस की सस्ती कविताएँ ठेल देता है। अपने भाषण का स्तर तो ठीक कीजिए। अंग्रेज़ी श्रेष्ठ भाषा है। बोलते रहिए। इंगलिस बोलने से कुंठा दूर होती है।
"क्या कोई जवाब है ?"
"कश्मीर का नाम बदनाम मत करो, गलती हमारी सुरक्षा व्यवस्था में है।"
ये शब्द हैं मृतक #शैलेष_कलथिया की पत्नी के, जिन्होंने कश्मीर में अपने पति को एक दर्दनाक घटना में खो दिया।
👆🏻उनका यह बयान न केवल उनके दर्द को बयां करता है, बल्कि इस पूरे सिस्टम पर सवाल भी खड़ा करता है — अगर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होती, तो आम नागरिक की जान क्यों जाती ?
वो कहती हैं कि गलती कश्मीर की नहीं, बल्कि हमारी सिक्योरिटी की है, जिसे और मजबूत बनाए जाने की जरूरत है।
एक सैनिक का यह कहना कि ‘आप यहां घूमने आए ही क्यों?’ — क्या यह दर्शाता नहीं कि आम लोगों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है ?
इस पीड़ा से भरे सवाल का जवाब कौन देगा?"
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