अपनी रक्षा करने में अक्षम एक मासूम जानवर को इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है कि उसे काटकर क़ुर्बानी दी जाएगी,बलि चढ़ाई जाएगी या पकवान बनाया जाएगा।वो बस ये जानता है कि उसकी हत्या होना तय है।वो नहीं जानता कि उसका मांस और खून अल्लाह की ख़िदमत में पेश होगा,देवी देवताओं के चरणों में भेंट होगा या किसी की थाली में परोसा जाएगा।बुद्धिमान इंसान की इस व्यवस्था में उसका जीवन असंभव है और मौत निश्चित।क्योंकि जीवित रहने और रखने का अधिकार उपरवाले ने सिर्फ़ इंसान को दिया है।वही तय करेगा कि किस जानवर की जगह कहाँ है? चिड़ियाघर में,जंगल में,कसाईखाने में या उसकी डाइनिंग टेबल पर।
मैं शाकाहारी हूँ इसलिए ये बात कहने का नैतिक अधिकार रखता हूँ।
AAP- 130
BJP- 106
Cong- 10
Oth- 04
आप रुझानों में बहुमत के आँकड़े को पार कर चुकी है।
आप दफ़्तर में जश्न का माहौल चरम पर.. इतिहास बनाने के बेहद क़रीब हैं केजरीवाल