40 फ्लैट के लिए 400 व 40 Km. सड़क के लिए 4000 पेड़ कटवा दिये जाते हैं और सरकारें कहती हैं कि हम विकास कर रहें हैं..🙏
400 For 40 flats and 4000 trees for 40km roads are cut down & Gov. are saying we are developing...
#EnvironmentalJustice#savetree@UNEP@UN@UNFCCC@UNICEF
पंच की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति बिगाड़ के डर से ईमान की बात कहना बंद नहीं कर सकता है.
इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के संपादक @saurabhtop की पूरी बात सुनने के लिए देखिए 'साम दाम दंड भेद' का पूरा एपिसोड इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
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चुनाव आयोग में कैसी गड़बड़ी चल रही है, इस पर दो चुनाव आयुक्तों ने लगातार आपत्तियां दर्ज कराईं. लेकिन उनकी बात को दरकिनार किया जाता रहा. पढ़िए इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट.
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#ECI#GyaneshKumar
Jamui में नाबालिगों के साथ जो हुआ उसने बिहार सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है. इसी दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बयान भी खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वो बिहार में सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे और दावा कर रहे थे कि अगर कुछ हुआ तो वो इस्तीफा दे देंगे. #Bihar
इतनी महंगाई के लिए भी एक दिया जलाइए… 🪔
आज एक तरफ़ साहब का जन्मदिन मनाया जा रहा है, दीये जलाए जा रहे हैं, जश्न की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं…
और दूसरी तरफ़ जिस घर में रसोई का तेल खरीदना मुश्किल हो गया है, वहाँ चूल्हा कैसे जलेगा?
जिस परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, दवा, बच्चों की फीस, गैस और रोज़मर्रा की जरूरतों में चला जाता है, उसकी परेशानी कौन दिखाएगा?
और बिहार को देखिए…
एक तरफ़ पानी में डूबे घर, बर्बाद फसलें और राहत का इंतज़ार करते 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
दूसरी तरफ़ उसी बिहार में जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने के कार्यक्रम हो रहे हैं।
सवाल जन्मदिन मनाने का नहीं है।
सवाल प्राथमिकताओं का है।
जब जनता महंगाई से परेशान हो,
जब बाढ़ में घर डूब रहे हों,
जब परिवार राशन और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हों-
तब मीडिया का कैमरा सिर्फ़ जश्न पर क्यों रहे?
एक दिया साहब के जन्मदिन के लिए सही…
लेकिन उस परिवार के चूल्हे के लिए ? जिसमें आज खाना बनाने के लिए तेल तक नहीं है।
जश्न मनाइए, शुभकामनाएँ दीजिए-
लेकिन जनता की तकलीफ़ को जश्न की रोशनी में छिपाइए मत।
शिक्षा और Student प्राथमिकता कब होगी?
Delhi के Satya Niketan में पेड़ से दबकर 3 बच्चों की जान गई। पहले भी दिल्ली में इस तरह के हादसे होते रहे हैं। 4 दिन के तमाशे के बाद सब भूल जाते हैं।
शिक्षा व्यवस्था और Student देश की प्राथमिकता में ही नहीं हैं। नेता आपस में लड़ते हैं और आप लड़ते हो और भोगते आपके बच्चे हैं।
'सारी मांगें सरकार ने मानी
5 सितंबर का प्रोटेस्ट कैंसिल'
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने हम 5 सितंबर को इंडिया गेट से नए पुलिस मुख्यालय तक होने वाले अपने शांतिपूर्ण विरोध मार्च को रद्द करने को लेकर क्या कहा, सुनिए...
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने न्यूज चैनलों के हिंदी डिबेट शो को धोया!
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#samdamdandbhed#indianexpresshindi#indianpolitics
ज़रूरतमंद कैंसर मरीज़ों को सस्ता और बेहतर इलाज देने के लिए बने दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की हालत आज बेहद खराब है.
करोड़ों की मशीनें बंद हैं, दवाइयों की कमी है और मरीज इलाज के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं. देखिए रील.
#indianexpresshindi#CancerTreatment#Cancer
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
एक आंदोलन है, जो चाहता है कि देश के सभी स्कूल ठीक हो। वो चाहता है कि देश के गरीब, पिछड़े तबके से आने वाले बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिले। ज़मीनी स्तर पर वो सरकार और प्रशासन को स्कूलों के लिए जवाबदेह बनाना चाहता है।
एक राजनैतिक दल है, जिसकी देश के 60% राज्यों में सरकार है। वो स्कूल ठीक करने की बजाय आंदोलन करने वालो के साथ हिंसा करने, मारपीट करने, गाली-गलौज करने, और फर्जी FIR करने में व्यस्त है।
मजे की बात यह है कि यह दल खुद को देशभक्त और आंदोलन को गद्दार कहता है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. लोग भ्रष्टाचार में ईमानदारी बरतने की शपथ ले रहे हैं. हाथ में जल लेकर नगर निगम की आमदनी को बराबर बांटने की कसम उठाई जा रही है. दावा किया जा रहा है कि वीडियो शाहजहांपुर का है. और शपथ लेने वाले लोग नगर निगम पार्षद हैं.
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रसन्न बी. वराले ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले पर होने वाले खर्च का 0.1 प्रतिशत हिस्सा भी सरकार अगर शिक्षा पर खर्च कर दे तो शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प हो जाए. महाराष्ट्र के धुले जिले में एक स्कूल का दौरा करते हुए उन्होंने यह बात कही.
उन्होंने साफ किया कि सरकार द्वारा विकास परियोजनाओं या धार्मिक आयोजनों पर खर्च करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बुनियादी शिक्षा जैसी जरूरी व्यवस्थाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
बिहार में चली लाठियां...सरकारें कुछ नहीं सीखतीं.
पहले एक अफसर नौजवानों को गाली देता है, अब सरकार की तरफ से लाठियां मिल रही हैं...इंसाफ कौन दिलाएगा?
@samrat4bjp
A Cockroach Janta Party (CJP) team, led by its co-convenor Ashutosh Ranka, was attacked while it was on its way to inspect a government school in Bagru near Jaipur on Friday.
One of the key reasons behind the team’s visit was to look into the allegation that the school was being run out of a cowshed. Last year, the school building was declared as unsafe and closed down, with entry prohibited. The students were shifted nearby to a temporary enclosure which also allegedly houses buffaloes.
The school, though, is not the only one in the state afflicted by such “structural” issues.
Written by: Hamza Khan
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