वैसे तो स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी स्वयं में जोश भरने के लिए वन्देमातरम गाते थे। लेकिन वन्देमातरम को 1950 मे "राष्ट्र गीत" का दर्जा मिला। जबकि जिन्ना 1947 मे भारत से चला गया। @gauravbhatiabjp जिन्ना का परिवार मूल रूप से गुजराती हिन्दू था, बाद मे इस्लाम धर्म अपना लिया था।
अगर यह बयान सही है तो हम पूरे विश्वास से कह सकते हैं कि मोदी को PM की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। क्योंकि अब उस कुर्सी के क़ाबिल नहीं रहे।
मोदी का जन्म 1950 में हुआ, कह रहे हैं कि जिस दिन (15 अगस्त 1947) देश आजाद हुआ था उस दिन मै तिरंगा लेकर गांव में लड़ु बांट रहा था।
#दिमागीनक्सल
@premkumarcbn01 संघीगैंग के पास नैतिकता ही नही है। फिर धर्मेन्द्र या अन्य संघी नैतिक आधार पर इस्तीफा कैसे दे ? राममंदिर जैसे आस्था केंद्र से सैकड़ों करोड़ रुपए की चन्दाचोरी व हजारों करोड़ रुपए के खरीद फरोख्त में हेराफेरी पर संघियों ने इस्तीफा नही दिया तो पेपरलीक जैसे मुद्दे पर इस्तीफा कैसे देंगे
स्वतंत्र भारत के इतिहास में RSS और भाजपा के पास अपना कोई ऐसा नेता नहीं जिसे वह अपना आदर्श बना सके।
इसीलिए RSS पर प्रतिबंध लगाने वाले कांग्रेस नेता सरदार बल्लभ भाई पटेल के छांव के नीचे फोटो खिंचवाना पड़ रहा है।
@manojtiwari4u@apnarajeevnigam
उत्तर प्रदेश कि विधान सभा के अध्यक्ष और भाजपा नेता सतीश महाना जी ने करोड़ो राम भक्तों की श्रद्धा पर सवाल उठा कर महा पाप किया है जिसका उन्हें श्राप लगेगा और बाबा बजरंगबली की गदा भी पड़ेगी!
महाना जी जब से आप आए हो रोज विधान सभा में तोड़ फोड़ करवाते रहते हो क्या ये भी सब चंदे या चोरी या फिर किसी कट के लिये होता है?
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन को आज 17 दिन पूरे हो गए हैं और इतने पर भी सरकार की तरफ से एक बयान तक नहीं आया है। ये देखकर शशि थरूर की एक मारक बात याद आ गई जो उन्होंने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कही थी।
शशि थरूर कहते हैं कि
"महात्मा गांधी का सत्याग्रह, अंहिसा और अनशन इसलिए कारगर साबित हुआ क्योंकि उनके सामने अंग्रेज थे जो कुछ हद तक सही थे अंग्रेज जानते थे कि वे गलत कर रहे हैं, वे मीडिया और दुनिया की नजर में जवाबदेह थे। इसलिए गांधी के सत्याग्रह और अनशन ने उन्हें परेशान और शर्मिंदा किया।
लेकिन अगर यही तरीका हिटलर के खिलाफ अपनाया जाता तो काम नहीं आता, क्योंकि उसके पास कोई नैतिक संकोच नहीं था और ना उसे किसी मीडिया या अंतरराष्ट्रीय दबाव की चिंता थी।
अब इस बात को भारत पर लागू करके देखिए-
2014 से पहले अन्ना हजारे का अनशन का तरीका इसलिए कारगर साबित हुआ क्योंकि उनके सामने कांग्रेस थी जिसकी सरकार में मीडिया को आजादी थी और उसे दुनिया में भारत की इमेज की चिंता थी।
और अब सोनम वांगचुक का अनशन इसलिए कारगर नहीं हो रहा क्योंकि उनके सामने बीजेपी है और बीजेपी के हाथ में मीडिया है बाकि बीजेपी क्या है ये सब जानते हैं...
बिग ब्रेकिंग:-
यह कहानी पाँच किलो अनाज पर पलते देश में चंद व्यवसायियों के बढ़ते धंधों के पीछे चल रहे घोटालों की अनंत कथा का दूसरा हिस्सा है।
NMC हेल्थ के मालिक बी आर शेट्टी के न केवल पीएम नरेंद्र मोदी से बल्कि भाजपा के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों से बेहद गहरे संबंध थे। जिनमें येदुरप्पा और डॉ रमन सिंह का भी नाम है।
क्या आप यकीन करेंगे जिस व्यवसायी के ख़िलाफ़ किसी बैंक ने 25 करोड़ डॉलर की वसूली को नोटिस जारी की हो और संपत्तियों के हस्तानांतरण पर रोक लगाई हो उसी व्यवसायी को लेकर चल रहे मुकदमे में हजारों करोड़ रुपए सिर्फ इसलिए दे दिए जाएं क्योंकि बैंक मुकदमेबाज़ी से परेशान था? जी हाँ, यह हुआ है।
NMC हेल्थ के मालिक बी आर शेट्टी को बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने 2020 में 25 करोड़ डालर वसूली की नोटिस दिया था साथ ही शेट्टी और उनकी पत्नी को अगले आदेश तक कुछ संपत्तियों को बेंचने या हस्तानांतरित पर रोक लगा दी थी लेकिन अब उसी कंपनी के लीगल सेटलमेंट के लिए 5700 करोड़ रुपए दे दिए गए। ग़ज़ब यह है कि बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने पूर्व में इस मामले में अपने पक्ष में फैसला आने की संभावना जताई थी।
कहानी इतनी ही नहीं है ताजा जानकारी मिली है कि बी आर शेट्टी के हेल्थकेयर ग्रुप BR लाइफ ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मल्टी स्पेशियल्टी श्री नारायाणा अस्पताल और उड़ीसा के कलिंगा अस्पताल का अघिग्रहण कर लिया। कलिंगा अस्पताल दो सौ करोड़ में ख़रीदा गया।
श्री नारायणा अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ सुनील खेमका मुझसे बातचीत में अधिग्रहण की बात से इनकार करते हैं। उनका कहना था कि उनका यानि NMC हेल्थ का केवल 20 से 24 फ़ीसदी शेयर है जबकि ख़ुद शेट्टी की कंपनी और शेट्टी का पूरा परिवार इसे अपना अस्पताल बताते रहे हैं । सुनील खेमका का कहना है कि अगर उनका मेजर शेयर होता तो अब तक बैंक का छापा पड़ गया होता। ग़ज़ब यह है कि बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने एक बार भी शेट्टी के द्वारा अधिग्रहित अस्पतालों की संपत्ति को जब्त करने की कोशिश नहीं की।
क्यों बॉब @bankofbaroda यह बात मुझे पता है, तुम्हें क्यों नहीं पता? क्यों हमारा पैसा फेंक आए?
@bstvlive@oprajbhar सही कहा, अखिलेश के बयान को जनता नोटिस नही ले रही। लेकिन अखिलेश के बयान से वर्तमान सरकार के मंत्री व नेताओं में ऐसा करंट लगा है कि गली गली बिलबिला रहे हैं। दूसरी बात राममंदिर में चोरी व रामधन की बर्बादी में शामिल चंपत, अनिल मिश्रा, गोपाल राव, अनुकल्प मिश्रा क्या यादव हैं ?
जैसे राम मंदिर के चंदे में हुई कथित चोरी सामने आईं, वैसे ही—
• एक दिन वोट चोरी की सच्चाई भी सामने आएगी।
• एक दिन नोटबंदी का पूरा कांड भी बेनकाब होगा।
• एक दिन पीएम केयर्स फंड का पूरा हिसाब भी देश के सामने होगा।
और उस दिन, अंजना जी, हम और आप आज तक के मंच पर बैठकर इसी पर खुली बहस करेंगे।
@chitraaum सीता जी पर लांछन लगाने वालों के वशंज आज भी जय सियाराम की जगह जय श्रीराम का नारा लगाते है। श्रीराम को ऐसे समाज की बातें ना मानकर सीता का साथ देने के लिए राजपाट को उसी समय छोड देना चाहिए था। किसी स्त्री की गरिमा से बडा नही होता राष्ट्र। मगर कर्मफल वो सब करवा लेता जो कैकयी-मंथरा-राम