देखिए बोल भी कौन रहा है..? जो खुद हनुमान जी को BJP का झण्डा देकर नचा रहा था वो अब आस्था से खेल की छूट पर बात कर रहा है।
अरे आस्था से तो तुमलोग खेल रहे हो मंदिरों का चढ़ावा गबन कर के। अपने सत्ता के लिए आस्था का सबसे अधिक किसी ने इस्तेमाल किया है वो तुमलोग और ज्ञान देने चले हो।
@MrinalNaresh बिहार के सीएम सम्राट ही रहेंगे। सम्राट के राजनीतिक सुझ–बुझ पर सवाल उठाने वाले या तो नासमझ हैं या अपने आपको बहुत विद्वान समझ रहे हैं!
किसी भी व्यक्ति को सत्ता मिलना उसके पूर्व जन्मों के कर्मों का फल होता है।
करे करावे साइयां, मन में लहर उठाय।
दादू सरधर जीव के, आप बगल हो जाय।।
बिहार के एक एनकाउंटर पर डायरेक्ट मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को टारगेट कर सकते हैं लेकिन राम मंदिर के 200 करोड़ के घोटाले पर योगी आदित्यनाथ को कुछ मत बोलिए ! बिहार में इस्तीफ़ा माँग रहे हैं और उत्तर प्रदेश पर मूहँ बंद 😤
हाइप्रोक्रेसी की भी सीमा होती है 🤡
श्री सम्राट चौधरी : विरोध के बीच और मजबूत होता नेतृत्व
मेरे आकलन में बिहार की राजनीति में श्री @samrat4bjp जी एक ऐसे नेता के रूप में उभर रहे हैं, जिनकी राजनीतिक पहचान अब किसी एक जाति, वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है। वे पिछड़े, अति पिछड़े, वैश्य, दलित, किसान, युवा तथा विकास और सामाजिक भागीदारी में विश्वास रखने वाले व्यापक वर्गों के बीच अपनी स्वीकार्यता का दायरा लगातार बढ़ा रहे हैं।
राजनीति का एक अटल नियम है—जब तक कोई नेता सीमित प्रभाव में रहता है, तब तक उसका विरोध भी सीमित रहता है। लेकिन जैसे ही कोई नेता नए सामाजिक समीकरणों का केंद्र बनने लगता है, स्थापित हितों को चुनौती देने लगता है और समाज के बड़े वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने लगता है, उसके विरोध की तीव्रता स्वतः बढ़ जाती है।
आज श्री सम्राट चौधरी जी के संदर्भ में यही स्थिति दिखाई दे रही है।
उनके समर्थकों का मानना है कि विभिन्न राजनीतिक दलों, वैचारिक समूहों और राजनीतिक प्रतिस्पर्धियों द्वारा किया जा रहा लगातार विरोध इस बात का प्रमाण है कि सम्राट चौधरी जी अब बिहार की राजनीति में एक ऐसी शक्ति बन चुके हैं, जिसकी उपेक्षा करना आसान नहीं रह गया है।
सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि उन्हें कमजोर करने के उद्देश्य से किए जाने वाले अनेक प्रयास उल्टे उनके पक्ष में जनसमर्थन का विस्तार करते दिखाई दे रहे हैं। अति पिछड़ा समाज, वैश्य समाज, दलित समाज तथा लव-कुश समाज का एक बड़ा वर्ग इस पूरे घटनाक्रम को केवल व्यक्ति विशेष के विरोध के रूप में नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के प्रश्न से जोड़कर देख रहा है।
इतिहास गवाह है कि विरोध हमेशा नेतृत्व को कमजोर नहीं करता। कई बार विरोध ही किसी नेता को व्यापक पहचान, स्पष्ट वैचारिक आधार और मजबूत जनसमर्थन प्रदान करता है। जो लोग आज सम्राट चौधरी जी का विरोध कर रहे हैं, वे अनजाने में उनके राजनीतिक कद को और अधिक स्पष्ट करने का काम भी कर रहे हैं।
समर्थकों के लिए यह समय शिकायत का नहीं, बल्कि संगठन विस्तार का है। प्रतिक्रिया का नहीं, बल्कि संवाद का है। विरोध का उत्तर विरोध से नहीं, बल्कि समाज के नए वर्गों को जोड़कर, जनविश्वास बढ़ाकर और राजनीतिक भागीदारी को व्यापक बनाकर दिया जाना चाहिए।
यदि सम्राट चौधरी जी सामाजिक समरसता, विकास और व्यापक प्रतिनिधित्व की राजनीति को इसी प्रकार आगे बढ़ाते रहे, तो वर्तमान विरोध भविष्य में उनके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी साबित हो सकता है।
क्योंकि राजनीति में कुछ नेताओं को उनके समर्थक बड़ा बनाते हैं, लेकिन कुछ नेताओं का कद उनके विरोधी भी बढ़ा देते हैं। बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी जी के संदर्भ में यह बात दिन-प्रतिदिन अधिक प्रासंगिक होती जा रही है।
@AmitShah@narendramodi
अमन सिंह कुशवाहा
लगता है बिहार के भरत तिवारी के बाद यूपी को भी एक भगत सिंह मिलने वाला है नाम है शंकर दत्त शुक्ला।
दरअसल शुक्ला जी ने बृजभूषण शरण सिंह को खुलेआम ठोंकने की चुनौती दी है।
उसके बाद सिस्टम बदलने की बात भी कही है देखते हैं शंकर दत्त शुक्ला के रूप में भगत सिंह मिलते हैं या नहीं।
भरत तिवारी के नाम पर श्री @samrat4bjp जी को टार्गेट करने वाले और अप्रत्यक्ष हमला कराने में शामिल भाजपा-जदयू नेताओं की लिस्टिंग @narendramodi जी , @NitishKumar जी और @AmitShah जी की पोलिटिकल डायरी में शामिल हो रहा है:---
*सम्राट का विरोध मतलब अंदर के विषैले धोखेबाजों की पहचान*
सम्राट चौधरी का विरोध दरअसल केंद्रीय नेतृत्व को भाजपा के अंदर बैठे धोखेबाज लोगों को चिन्हित करने जैसा है।
*सम्राट का विरोध मतलब मोदी-शाह-नीतीश के पसंद का विरोध*
सम्राट का विरोध करने का सीधा मतलब है नीतीश, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के पसंद का विरोध करना।
*मोदी-शाह का तरीका देश जानता है*
मोदी और शाह के राजनीतिक तौर तरीकों को देश जानता है। जो भी इनसे टकराया है, उसका राजनीतिक भविष्य थमते देर नहीं लगती। यही बात नीतीश कुमार के साथ भी लागू होती है।
*काँटा बनने का अंजाम*
यदि कोई भाजपा नेता भाजपा में रहकर मोदी और शाह के पसंद का अप्रत्यक्ष विरोध कर रहा है तो वह मोदी-शाह के नजर का काँटा बन रहा है। काँटों को कैसे निकाला जाता है, यह भाजपा के चाणक्य से बेहतर शायद ही कोई जानता है।
*नीतीश का टार्गेट मतलब करियर खत्म*
यही हाल नीतीश कुमार के साथ है। वो यदि किसी को टार्गेट कर लें तो उसकी राजनीतिक यात्रा दम तोड़ देती है। ऐसे में जनता दल यूनाइटेड का कोई भी नेता, नीतीश कुमार के पसंद से बिहार के मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी को टार्गेट करेगा तो उसका अगला चुनाव हारना तय है। साथ ही वह मजबूत से मजबूर राजनेता की श्रेणी में समायोजित हो जाएगा।
अमन सिंह कुशवाहा
स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं...
जो कुशवाहा समाज को टारगेट करेगा, उसका पूरा जवाब मिलेगा !
चाहे वो कम्बल चोर, चमचा किशोर गैंग हो या चारा चोर गैंग हो !
जय सम्राट, जय अशोक महान !
#SamratChaudhri
तू भी तो जाति के लिए रोना रो रहा हैं, तुझ में ही हजारों कमियां हैं और तू दूसरों की कमियां गिन रहा हैं।
तू अपने को पत्रकार कहता हैं तू पत्रकार नहीं तू चाटुकार हैं।