श्रम विभाग में करोड़ों का छात्रवृत्ति घोटाला: दलालों, ई-मित्र और बाबूओं के '40% कमीशन सिंडिकेट' ! 🚨
राजस्थान सरकार के श्रम विभाग (BOCW) की "निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना" का उद्देश्य गरीब मजदूरों के बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन जिला नागौर में यह योजना भ्रष्टाचार और दलाली का शिकार बन चुकी है।
यहाँ एक सुसंगठित सिंडिकेट चल रहा है, जिसका Modus Operandi (काम करने का तरीका) बेहद चौंकाने वाला है:
1. 40% कमीशन की डील:
ई-मित्र संचालक (जो बैंक बीसी भी चलाते हैं) अभिभावकों को बिना किसी कागजी झंझट के स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर पहले ही 40% कट (कमीशन) के लिए राजी कर लेते हैं।
2. दलालों की लिस्ट पर बाबूओं का 'स्टाम्प':
श्रम विभाग कार्यालय में बैठे बाबू केवल उन्हीं फॉर्मों को अप्रूव (Approve) करते हैं जिनकी लिस्ट संबंधित ई-मित्र या दलालों द्वारा उन्हें भेजी जाती है। इसके बदले बाबुओं को 25% से 30% तक का फिक्स कट पहुँचता है। जो गरीब या ईमानदार बच्चा खुद जाकर फॉर्म भरता है, उसके आवेदन पर जानबूझकर 'ऑब्जेक्शन' लगाकर उसे खारिज कर दिया जाता है।
3. AePS (बायोमेट्रिक) से सीधी लूट:
जैसे ही छात्रवृत्ति का पैसा छात्र के खाते में (DBT) जमा होता है, बाबू ई-मित्र को पास हुए खातों की सूची भेज देता है। ई-मित्र संचालक तुरंत अभिभावक को बुलाकर आधार फिंगरप्रिंट (AePS) से पूरी राशि निकाल लेते हैं। 40% का मोटा कट काटकर बाकी 60% नकद थमा दिया जाता है।
इस पूरे खेल में फर्जीवाड़ा करने वाले और दलाल मालामाल हो रहे हैं, लेकिन नागौर के वे असली व पात्र गरीब बच्चे पिस रहे हैं जो किसी दलाल के पास नहीं जाते और अपने वाजिब हक से वंचित रह जाते हैं।
श्रम विभाग में पिछले 2 वर्षों में स्वीकृत हुए सभी फॉर्मों की ई-मित्र वार विशेष विजिलेंस व स्पेशल ऑडिट जांच करवाई जाए।
फॉर्म सत्यापन की प्रक्रिया को स्थानीय बाबूओं से हटाकर राज्य स्तर पर रैंडम एलोकेशन (Random Allocation) से जोड़ा जाए।
फर्जीवाड़े में शामिल ई-मित्रों के लाइसेंस तुरंत रद्द कर उन पर और संबंधित बाबुओं पर FIR दर्ज की जाए।
@RajCMO@RajGovOfficial @ACB_Rajasthan @DmNagaur@NagaurPolice@BhajanlalBjp
Proto-Elamite?
The Pashupati seal has an elephant, a water buffalo and a rhinoceros. Ancient Elam was centred in southwestern Iran. Elephants, water buffalos and rhinoceroses are not native to ancient Elam. BTW, they are native to India. Also, the figure is seated in a Yogic posture. Is Yoga also Elamite now? Seriously?
Your profile says you are a professor. I don't mean to sound rude, but your students deserve a refund. And seriously, Western universities need to improve their hiring practices.
I travelled through Great Nicobar today.
These are the most extraordinary forests I have ever seen in my life. Trees older than memory. Forests that took generations to grow.
The people on this island are equally beautiful - both the adivasi communities and the settlers - but they are being robbed of what is rightfully theirs.
The government calls what it is doing here a “Project.” What I have seen is not a project. It is millions of trees marked for the axe. It is 160 square kilometres of rainforest condemned to die. It is communities that have been ignored while their homes have been snatched away.
This is not development. This is destruction dressed in development’s language.
So I will say it plainly, and I will keep saying it: what is being done in Great Nicobar is one of the biggest scams and gravest crimes against this country’s natural and tribal heritage in our lifetime.
It must be stopped. And it can be stopped - if Indians choose to see what I have seen.
जोजरी नदी वाले गांव में...
राजेश्वर नगर है यह। जोधपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर है। नदी के नाम से एक अच्छा सा अहसास होता है लेकिन यह जोजरी नदी एक बेहद गंदे पानी का नाला बनाकर छोड़ दी गई है। नदी के बगल में ही स्कूल है और यहीं पर किनारे-किनारे लोगों के घर भी हैं खेतों में। यहां जो बदबू उठती है उसे झेलने सच में बेहद मुश्किल काम है। मेरे साथ इसी इलाके के श्रवण पटेल और दो अन्य युवा हैं जो इस मुद्दे को लगातार सोशल मीडिया के जरिए उठा रहे हैं। लेकिन सरकार और प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। सिर्फ 50 किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद जोधपुर कलेक्टर ने एक बार भी यहां आकर हालात को देखना जरूरी नहीं समझा।
अभी अंधेरा है। कथित पानी का रंग सुबह ठीक से दिखा पाऊंगा। हालात सच में नारकीय हैं।
फिर भी उम्मीद है
#जोजरी #प्रदूषित_जोजरी_से_जीवन_बचाओ
@BhajanlalBjp@RajCMO@JogarampatelMLA@JodhpurDm@RSPCB_official@CPCB_OFFICIAL@byadavbjp@Sanjay4India1
IIT बाबा आने वाले दिनों में पॉडकास्ट बाबा बनेगा
अभी हर चौथी वीडियो उसकी आ रही
अभय सिंह ग्रेवाल मेरे जिले का ही है
हालातों का मारा हुआ जाट साधु बन जाता है, या फिर बागी तो पक्का ही बनता है
अभी वह न साधु बना है और बागी बनने के लक्षण उसके हैं नहीं
वह राम रहीम की तरह ठग बनेगा
श्री @BhajanlalBjp शर्मा जी,
मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार
विषय – प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ-2023 के बचे हुए क्लेम सेटल करने बाबत।
मान्यवर,
आपके नेतृत्व में राजस्थान सरकार के एक वर्ष पूरा होने पर आपको बधाई और शुभकामनाएं.
इस अवसर पर मैं आपका ध्यान राजस्थान के लाखों किसानों से जुड़े एक संवेदनशील मसले पर आकर्षित करना चाहूंगा. यह मसला फसल बीमा योजना से जुड़ा हुआ है.
आपकी जानकारी में मैं यह बात लाना चाहता हूँ कि खरीफ 2023 में राजस्थान के अलग अलग जिलों में फसल बीमा कंपनियों ने बेवजह आपत्तियां लगाकर क्लेम को रोकने की कोशिश की है. वे अक्सर इस तरह का खेल खेलकर प्रीमियम से बहुत कम क्लेम देने में सफल हो जाती हैं. ऐसा करके उन्होंने अभी तक किसानों का वाजिब हक़ मारते हुए खरबों रूपया डकार लिया है. किसानों की जागरूकता में कमी और अफसरों की उदासीनता के चलते यह हो रहा है.
सामान्यतया गोपनीयता के नाम पर यह सब घपला फाइलों में चुपचाप होता रहा है. लेकिन खरीफ 2023 में हमने इन आपत्तियों के खेल को उजागर कर दिया और फाइलों में दफ़न सच बाहर आ गया. बिना सिर पैर की आपत्तियों पर जब पुनर्विचार हुआ तो जिला कमेटियों ने इनमें से अधिकतर को खारिज कर दिया.
असल बात यह है कि खरीफ 2023 में दो महीने तक बारिश नहीं होने से फसलों को भारी नुकसान हुआ था. इसलिए किसानों का क्लेम भी ज्यादा बन रहा था. लेकिन कंपनियों ने क्लेम को कम से कम करने के लिए आपत्तियों का सहारा लिया.
अब जिला कमेटियों की रिपोर्ट के बाद खरीफ 2023 की फाइल जयपुर में कृषि आयुक्तालय के पास पेंडिंग है. किसानों के प्रति उदासीन प्रशासन लम्बे समय से प्रदेश स्तरीय कमेटी की मीटिंग ही आयोजित नहीं कर रहा है. ऐसे में एक साल बीत जाने के बाद भी लाखों किसान अपने वाजिब क्लेम से वंचित हैं. नियम तो यह है कि हर सीजन के ख़त्म होने और नुकसान का आकलन करने के दो महीने में क्लेम दिया जाना चाहिए. लेकिन यहाँ तो खरीफ -2024 भी पूरी हो गई है और अभी पिछली सीजन का हिसाब भी अधूरा पड़ा है.
ऐसे में आपसे अनुरोध है कि कृषि विभाग को निर्देश देकर प्रदेश स्तरीय शिकायत निवारण समिति की बैठक आयोजित करवाएं. साथ ही ये बैठकें नियम से और समय पर आयोजित हों, ऐसे निर्देश दें. प्रशासन की उदासीनता के कारण इस महत्वपूर्ण केंद्रीय योजना से किसान किनारा करने लगे हैं और अविश्वास के साथ अनिश्चितता से भरने लगे हैं. राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए यह शुभ संकेत नहीं है, क्योंकि प्रदेश की दो तिहाई आबादी खेती पर निर्भर है.
सादर,
🙏
जिन लोगों को व्यापारियों, धन्नाढ़्य चौधरियों, कंपनियों की करोड़ों रुपये की फ़र्ज़ी लिस्ट चलाकर ख़ामख़ा की हवाबाज़ी करने में ख़ुशी मिल रही थी, वे संजय चौकीदार के विनेश को दिये गये 100 रुपए के मान सम्मान का मतलब नहीं समझ सकते. वे कुंवर साहिब द्वारा विनेश को भेंट की गई तलवार का मतलब नहीं समझ सकते. वे गाँव के मज़दूरों द्वारा दिये गये पैसों और आशीर्वाद का मतलब नहीं समझ सकते.
विनेश कोई ट्रॉफ़ी नहीं है जिससे फ़र्ज़ी का पीआर किया जाए, फ़र्ज़ी हवाबाज़ी की जाए या जातीय घमंड किया जाए. मैं विनेश की उस यात्रा को अपने कई समझदार पत्रकार दोस्तों के साथ कवर कर रहा था और सोशल मीडिया पर जो चल रहा था उसको भी देख रहा था. ग्राउंड पर विनेश के लिए हर जाति हर धर्म के लोग लुगाई आशीर्वाद दे रहे थे. लड़की को बहुत प्यार मिला है.
हमारे साथी नितिन शर्मा की इस रिपोर्ट को पढ़िए और लोगों की भावना समझिए. विनेश जिस मुल्क की बेटी है उसकी आबादी के 91 प्रतिशत लोग आज भी 25 हज़ार रुपए प्रति महीने से कम आजीविका कमाते हैं, इसलिए विनेश को करोड़ों रुपए देने की वह फ़र्ज़ी लिस्ट मुझे तो कम से कम परेशान कर रही थी. क्योंकि विनेश आम लोगों की बेटी है, पर यहाँ के धनाढ्य चौधरी और उनके तनखाई गुर्गे विनेश को एक ट्रॉफ़ी बनाने पर तुले हुए हैं.
जैसे हुड़दंगियों की एक भीड़ बहुसंख्यक (ज़्यादा गिनती के लोग) धर्म का नारा अल्पसंख्यक समुदाय को परेशान करने के लिए लगाती है ठीक वैसे ही दो तीन बड़ी जातियों (इस केस में जाट राजपूत बामन) के अतिउत्साहित और संकीर्ण मानसिकता के नौजवान सोशल मीडिया पर आपस में खिजाने में लगे हुए हैं. यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि लड़ाई जुल्म के ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि आपस में दो समुदायों के बीच में है.
दिनबंधु चौधरी छोटूराम ने कहा था कि इस धरती पर दो ही जातियाँ हैं, एक कमेरे और दूसरे लुटेरे.
जो मेहनत से कमाकर खाए वह कमेरे
जो कमेरे लोगों की मेहनत को लूटकर खाए वह लुटेरे
विनेश कमेरों की बेटी है, परंतु लुटेरों के नाम लिख करोड़ों की फ़र्ज़ी लिस्ट इसलिए वायरल करवाई गई ताकि वे फर्जी पीआर किया जा सके. सर्वश्रेष्ठ जाति का ख़िताब पाने के लिए बेताब लोग उसको ले उड़े और फिर कमेरों की एकता को धनाढ्यों के सस्ते पीआर ट्रिक पर क़ुर्बान कर दिया.
जात बड़ी नहीं होती है, ज़मात बड़ी होती है. यह गाँठ बाँध लीजिए. आपकी जाति के अमीर लोग ही आपके सबसे बड़े दुश्मन हैं. धनाढ्य चौधरी हों या महल मुनारों वाले राजपूत वे सभी अपने वर्ग हित (लूट जारी रखने) के लिए एक हैं. आम राजपूत और आम जाट का शोषण ही करेंगे. जाति को सर्वश्रेष्ठ घोषित करवाने के लिए जाति के नाम पर बनी सभाओं के नेता दलालों से ज़्यादा कुछ नहीं होते.
और जो ये राजा रुज़ा रहे हैं न चाहे कोई जाट राजा हो या राजपूत बामन या किस और जात का - सब फर्जी रहे हैं और किसी के भी सामने हग देते थे. इस देश की असली लड़ाइयाँ आम लोगों ने लड़ी हैं. आज़ादी की लड़ाई को याद करिए. आम घरों के लड़के (भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, बिसमिल, अश्फ़ाक) ही लड़े थे. सब राजे रजवाड़े तो अंग्रेजों के लिये चाय बनाते थे.
इसलिए कमेरों को एकता रखनी चाहिए ताकि आपकी मेहनत की लूट न हो सके. किसानी, मज़दूरी, बेरोज़गारी, ग्रामीण संकट, महिला सुरक्षा, शिक्षा ये ऐसे मुद्दे हैं जिनके लिए कमेरों को लड़ना चाहिए. न की फर्जी जातीय गौरव के लिये एक दूसरे को खिजाना चाहिए. बल्कि ऐसे मौक़े तलाशने चाहिए जिससे भाईचारा बन सके.
आख़िरी में लिख रहा हूँ लड़ाई जुल्म के ख़िलाफ़ है, कमेरों की मेहनत की लूट के ख़िलाफ़ है. लड़ाई दो समुदायों के बीच नहीं है.
लुटेरे कोशिश करेंगे कि लोग आपस ही में लड़ते रहें और हमें बहाने और मौक़े ढूँढने हैं कमेरों की एकता बनाने की.
ट्विटर पर जो ढंग के लोग थे वे भी आजकल इंफ्लून्यून्सर बनने की दौड़ में शामिल हैं, उनके लिए मुझे शकील आज़मी साहब याद आ रहे हैं -
हर घड़ी चश्म-ए-ख़रीदार में रहने के लिए
कुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए
मैं ने देखा है जो मर्दों की तरह रहते थे
मस्ख़रे बन गए दरबार में रहने के लिए
ऐसी मजबूरी नहीं है कि चलूँ पैदल मैं
ख़ुद को गर्माता हूँ रफ़्तार में रहने के लिए
अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग
नंगे हो जाते हैं अख़बार में रहने के लिए
‼️ मूंह के छाले ‼️
इनका इलाज
बार बार होने पर छालों के दुष्प्रभाव ।
ORAL ULCER
TREATMENT
CONSEQUENCES OF THEIR REOCCURRENCE
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1. सवाल सत्ताधारी पार्टी से होने चाहिए या विपक्ष से?
2. बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाला कोई दूसरा उम्मीदवार बताइए जो खुद को बीजेपी का सदस्य बताएगा।
3. क्या यह पर्याप्त कारण नहीं है कि आपको किसानों कौम के साथ अन्याय करने वाली भाजपा का राजनीतिक षड्यंत्र मान लिया जाए?
#NirmalChoudhary