@awasthis इच्छा ना होती तो जन्म ना होता
जन्म का आधार ही इच्छा है
इच्छाएं कभी पत्तों की तरह
डालियों की तरह
तो कभी फलों की तरह
भटकती, गिरती रहती हैं
कुछ इच्छाएं होती हैं
जो जड़ की तरह
दृढ़ता की तरह
समाज को फलीभूत करती हैं...
@KirenRijiju स्वच्छता की ओर बढ़ते कदम
तब कचरे इकट्ठे होते हैं
कुछ आंख में नाक में
कुछ तन पर कपड़ों पर लगते हैं
लक्ष्य सही विचार सही
कर्म पथ पर चलते हुए
मंजिल तक अवश्य पहुंचते हैं...