India–US Trade Deal ने 140 करोड़ भारतीयों का भविष्य गिरवी रख दिया।
युवाओं के रोज़गार दांव पर,
किसानों की फसल समझौते की मेज़ पर,
और ऊर्जा सुरक्षा विदेशी शर्तों पर!
कोई PM बिना भारी दबाव के ऐसे घुटने नहीं टेकता। भारत समझता है - यह समझौता बराबरी का नहीं, मजबूरी का है।
Epstein files से हो या Adani Case से - मोदी जी ने अपनी सत्ता बचाने की कीमत राष्ट्रीय हित से चुकाई है।
दयाशंकर मिश्र ने राहुल गांधी पर एक किताब लिखी। पब्लिशर्स ने मना किया तो सेल्फ पब्लिश किया। पहले दिन 1000 प्रतियां बिक गईं। फिर @amitmalviya का मैसेज आया बधाई। और उसके बाद शुरू हुआ उत्पीड़न का खेल।
1. अमेज़न लिंक की क्लोनिंग कर फर्जी साइट बनाई गई।
2. डायरेक्ट बिक्री शुरू की तो बैंक अकाउंट्स में ट्रांजैक्शन की दिक्कत हो गई।
3. डाकखाने से किताब भेजने लगे तो पोस्टमास्टर ने कहा राहुल गांधी पर किताब लिखने की क्या ज़रूरत!!!!
इस किताब के लिए @DayashankarMi जी को नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि संस्थान को पसंद नहीं आया।
ये है हमारे देश का माहौल। जहां मीडिया में शीर्ष स्तर का एक व्यक्ति किताब लिखता है तो पहले वो मीडिया के लिए अछूत हो जाता है और फिर उसको परेशान करने की कवायद शुरू हो जाती है।
ये है सबसे मज़बूत सरकार वाले दौर में एक लेखक की स्थिति।
पूरी बातचीत @moliticsindia के यूट्यूब पर। लिंक कमेंट बॉक्स में।
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का आख़िरी वीडियो -
मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप,
गुज़रे पलों में भी सच बोलने का साहस।
इतिहास गवाह रहेगा, सत्ता के दबाव में झुकने वालों में उनका नाम कभी नहीं होगा।
यहाँ इसलिए शेयर कर रहे हैं ताकि चुनाव आयोग की MISLEADING वाली स्याही ख़र्च हो सके। आयोग को पता होना चाहिए कि उसके ठप्पे पर कोई यक़ीन नहीं करता क्योंकि उसके प्रति लोगों का भरोसा कम हो गया है। EC भारत का नया ED न बने तो बेहतर है। इसी तरह ED ने जब विपक्ष पर हमला किया तो लोगों को लगा कि भ्रष्टाचार से लड़ाई हो रही है लेकिन इसके नाम पर विपक्ष को डरा दिया गया। ज़्यादा नहीं पाँच छह साल के भीतर ही कोर्ट में ED का खेल खुल गया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस इसे CROOK कह रहे हैं। अतः भारत के नए ED को यानी EC को समझना चाहिए कि जनता वोटर लिस्ट के खेल को समझ गई है। उसे वोटर लिस्ट की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी, पाँच बजे के बाद का वोटिंग का वीडियो सौंप देना चाहिए। चुनाव आयोग को शपथ पत्र देना चाहिए कि हमारे बनाए लिस्ट में कोई गड़बड़ी नहीं है। अगर एक भी ग़लती निकली तो वह अपने अधिकारियों को जेल भेजेगा। आयोग अगर यह कहता तो लोग शपथ पत्र पर लिख कर देते कि हमें आयोग पर भरोसा है। वरना पाँच रुपये के शपथ पत्र पर लोग ठीक इसका उल्टा लिख कर देने लग जाएंगे। हमें नहीं पता कौन अधिकारी रिटायर होकर रिलायंस की नौकरी करने वाला है या बीजेपी से चुनाव लड़ने वाला है। इसलिए आयोग को संदेहों से ऊपर होना चाहिए। शपथ पत्र दिखा कर जनता को भटकाने का प्रयास बंद होना चाहिए।
.@avinashonly की फिल्म “इन गलियों में” के क्लिप में हिमांशु बाजपेयी की लाइनों को सुनिए...नफरत जेहन वाले लोगों के लिए गहरा संदेश है .
मौका मिले तो ये फिल्म ज़रूर देखिए.
"हजार लोग कुंभ में मर गए..200 से ज्यादा लोग दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसे में मर गए.."- @Aloksharmaaicc
◆ देखिए राष्ट्र की बात, मानक गुप्ता के साथ
#RashtraKiBaat | #RKB | @manakgupta