“शिवानी पवार भी तो देश की बेटी थी”
बृजभूषण सिंह: जैसे एक खिलाड़ी हैं, उनका ओलंपिक में वजन नहीं आया, तो ये कैसे गए थे?
चित्रा त्रिपाठी: विनेश फोगाट, नाम के लीजिए।
बृजभूषण सिंह: हमारे खेल में नियम है कि एक दिन में दो वेट कैटेगरी में ट्रायल नहीं दे सकते हैं।
इन्होंने ऐडहॉक कमिटी पर दबाव डालकर 50 किलो में भी ट्रायल दिया, जब हार गईं तो 53 किलो में ट्रायल देकर चली गईं।
तो मैं होता तो ये नहीं होता 😥
चित्रा त्रिपाठी: तो आप ये कह रहे हैं कि जो सजा यहां नहीं मिली, वो वहां मिली। तो आप बड़े खुश हुए होंगे?
बृजभूषण सिंह: वहीं मिली, हम बड़े खुश थे।
चित्रा त्रिपाठी: देश का मेडल चूक गया, आप खुश थे?
बृजभूषण सिंह: जो मध्यप्रदेश की बच्ची थी, जिसको नहीं जाने को मिला, शिवानी पवार, वो देश की बेटी नहीं थी?
डांगावास (राजस्थान): 2015 में जाट हिंदुओं ने दलितों पर हमला किया। 5 दलित सहित 6 लोगों की हत्या हुई। कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया।
ऊना (गुजरात): 2016 में हिंदुओं ने दलितों को बर्बरता से पीटा। कोर्ट ने सभी 35/40 आरोपियों को बरी कर दिया।
भारत दलितों के लिए एक 'नरक' है।
दलित प्रेम के ढोंग के आड़े आया डोटासरा जी का सजातीय प्रेम।
डांगावास हत्याकांड के सभी आरोपियों को बरी किए जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा जी ने चुप्पी साधे हुए हैं।
क्या डोटासरा जी के लिए दलित सिर्फ वोट मात्र है..?
क्या डोटासरा जी समाज के दवाब में काम करते है.?
11 वर्ष पूर्व डांगावास में पांच दलित व्यक्तियों समेत 6 लोगों की बर्बर हत्या ने देश भर को झकझोर दिया था और यह नृशंस हत्याकांड पीड़ित परिवारों को जीवनभर का दर्द दे गया था। इस हत्याकांड के सभी 40 आरोपियों को स्पेशल कोर्ट द्वारा बरी किया जाना अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब ये सभी आरोपी बरी हो गए तो इस हत्याकांड के गुनाहगार कौन हैं ? पीड़ित परिवारों ने कई साल तक अदालत की चौखट के चक्कर काटे और उसके बाद आज दिन तक अगर दोषी कौन हैं ये ही पता नहीं चला तो इन लोगों को न्याय कब और कैसे मिलेगा ? कोर्ट का यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है। न्याय की इस लड़ाई में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह पीड़ितों के साथ है।
डांगावास दलित हत्याकांड में 11 साल बाद सभी 40 आरोपियों के बरी होने का फैसला पीड़ित परिवारों के लिए बड़ा झटका है। 2015 में नागौर (राजस्थान) के इस चर्चित मामले में पाँच दलित (मेघवाल) समेत कुल छह लोगों की हत्या हुई थी। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अब पीड़ित परिवारों का सवाल है—अगर सभी आरोपी बरी हैं, तो उनके अपनों की हत्या किसने की? न्याय व्यवस्था पर उठे इन सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
@arjunrammeghwal@narendramodi@RajCMO
#डांगावास #नागौर #राजस्थान #दलित #Justice
मारा किसने....?
आरोपियों को बरी कर दिया गया....SC/ST कोर्ट के जज जाट साहब ने
जाट आरोपियो के जाट वकीलो की दलील पर जाट वकील मुकदमा जीत गए
अफसोस 11 साल से अब तक इंसाफ दलित समाज को नही मिला
🚨 मिशन स्टार्ट... ✊
आपको क्या करना है... 👇
इन चारों के ट्विटर हेंडल्स कमेंट बॉक्स में मेंशन करने हैं।
शुरू हो जाओ... 🙏
[ टारगेट : 100+ कमेंट्स ]
कल सुबह इन चारों का ट्विट डांगावास पर मिल जाएगा।
संवैधानिक पद की जिम्मेदारी निभानी ही पड़ेगी। 🙏
भर दो कमेंट बॉक्स... 👇👇👇
Does the Supreme Court now want everybody to take bullets?
When these kinds of statements are made by the judges of the Supreme Court against opposition leaders, what hope does it leave for the common person?
चन्द्रशेखर ने न तो जातिवादी गुण्डों की जाति बताई और न ही वर्ग।
मैं आपको बताता हूँ कि डांगावास में दलितों का नरसंहार करने वाले गुण्डे और सामन्तवादी जाट जाति से थे।
सामन्तवादी गुण्डे , चन्द्रशेखर के दोस्त हनुमान बेनीवाल की जाति से थे।
चन्द्रशेखर जाट जाति से आने वाले गुण्डों की जाति नहीं बताएगा।
ऊना कांड की तरह ही 'डांगावास जातीय नरसंहार' मामले में भी यही हुआ। 2015 में राजस्थान में जाटों ने दलितों पर बर्बर हमला किया। 5 दलितों सहित 6 लोग मारे गए।
जाटों के प्रभाव में सरकार और प्रशासन पक्षपाती बने रहे। नतीजा यह हुआ कि सभी 40 आरोपी बरी कर दिए गए।
जो बृजभूषण के बरी होने पर न्याय बता रहे थे वो डांगावास के आरोपों से बरी होने वाले के खिलाफ क्यों..!
जो बृजभूषण के बरी होने के खिलाफ थे वो डांगावास के आरोपों से बरी होने वाले लोगों के साथ क्यों..!
ऐसा दोगलपन क्यों..?
नेता BJP से हो या कांग्रेस से लेकिन अपनी जाति के जातिवाद को महत्व पहले दिया जाता है
अब ये भी देखलो जाट नेता राजवीर जो भाजपा युवा मोर्चा का प्रवक्ता है
जैसे ही 40 अपराधी को बरी कर दिया वैसे ही दलितों की मौत पर ऐसे खुशियां मनाने लग जाते हैं
एक जगह पर सब पावर अपनी जाति के पास हो तो अपराधी बरी क्यो नही होगें ?
#ङांगावास_दलित_हत्याकांड