आखर पेज प , भोजपुरी के अनगढ हीरा " भिखारी ठाकूर " के जयंती (18 दिसम्बर ) प भिखारी ठाकुर के कृतित्व आ व्यक्तित्व से अलग - अलग लेख, रचना से राउर परिचय करावल जाई ।
रउवा सभ से निहोरा बा के एह जानकारियन में अउरी जानकारी जोड़ के भोजपुरी के एह महानायक के बारे में सब केहू से बताईं । आज उहां के खुंट परिवार, पुर्वज, मूल बशिंदा आ जनम के दिन के सही दिन के बारे में जानकारी ।
भिखारी ठाकुर के पुर्वज
आरा भोजपुर से गंगाजी के बाढ के वजह से भिखारी ठाकुर के पुर्वज लो दियरा में ( कुतूबपुर ) आ गइल लो जवन सारण जिला में परत रहे । अइसे त कुतूबपुर सरजू जी आ गंगाजी के बीचे बा बाकि तबो सहूलियत के हिसाब से कुतूबपुर आ गइल लो ।
भिखारी ठाकुर के खासियत रहे कि उंहा के अपना रचना में ना खलिहा समाज बलुक अपना घर परिवार पुर्वज आदि के बारे में काव्य शैली में लिखले बानी ।
चौपाई –
पुराखा पद के ककरू प्रनाम । लिखत बानी श्रेष्ठ के नाम ।।
जवना बंस में जनम भइल । जेकर हई कितनी कइल ।।
श्री गुमान सुत रमई नाई । ता सूत दलसिंगार कहलाई ।।
ताके सुत भिखारी मोर नामा । कुतुपुर में करत मोकामा ।।
तेकर भइलन सिलानाथ । जातिक सभा में नाव माथ ।।
एह छंछेप कहा मैं गाई । देखहूँ राधेश्याम मँह जाई ।।
दोहा –
' राधेश्याम बहार ' में , पुरा छपल बा नाम ।
कुतुपुर से जाहवाँ जाके , कइलन वंश मोकाम ।।
भिखारी ठाकुर आ खुंट परिवार के बारे में
मूल रुप से आरा जिला ( भोजपुर ) के रहे वाला रहनी । बाकि इँहा के जनम से पहिले पुरा परिवार कुतुबपुर ( सारण ) चल आइल । सरजू गंगा के कछार प अइसन बदलाव आ पलायन बहुत आम बात ह ।
राधेश्याम बहार में भिखारी ठाकुर जी अपना परिवार आ खुंट के बारे में पुरा लिखले बानी । तबो अपना खुंट के बारे में बतावत भिखारी ठाकुर जी के हइ लाइन –
पहिले बास रहल भोजपुर में, मौजें अरथू अवारी ।
पुरखा पांच बसलन शंकरपुर जानत बा सब नर-नारी ।
एहि विस्थापन प भिखारी ठाकुर जी के एगो कवित्त बा -
आरा जिला ममहर ससुरार फुफहर, आरा जिला परोहित गुरु आरा परिवार है
आरा जिला राजा दिवान छड़िदार आरा डाकघर बबुरा बरह गांवो में बधार है ।
थाना बड़हारा आरा छपरा का मध्य मांहि, परत करीब चकियाँ मटुकपुर बाजार है
ढह कर कुतुपुर गाँव बसल दियरा में, तबहीं से भिखारी कहत छपरा प्रचार है ।
भिखारी ठाकुर के जनम
शुक्रवार शुभ लग्न घडी , शुभ तारीख हुई पांच ।
उनईस स एकतालीस को दिया प्रेस मे सांच ॥
शुभ सम्वत ११४४ शाके , १८०१ तदनुसार १२६५ फसलो आ सन १८८७ ई. पुस महीना के शुक्ल पक्ष के सोमार के दिने १२ बजे हमार जनम भईल रहे । आठ बरिस नहोशी ( नादानी / अज्ञानता ) मे बीतल आ नउवा बरिस से जीवन चरित रचि रहल बानी । जब एकावन साल के भईनी तब जीवन चरित रचाईल आ अब प्रेस मे छपवावेनी ।
बारह सौ पंचानबे जहिया , सुदी पूस पंचमी रहे तहिया ।
रोज सोमार ठीक दुपहरिया , जनम भईल ओहि घरिया ॥
बारह सौ पंचानबे साल कहावल जब ।
कुतुपुर के कहत भिखारी जन्म हमार तब ।
पुष महिना शुक्ल पक्ष मे पंचमी रोज सोमार ।
कहत भिखारी बारह बजे दिन मे जनम हमार ।
तेरह स सनतावन साल ह आज ह मंगल दिन ।
पंचमी कृष्ण आसाढ भइल मोर बासठ वर्ष के सीन ।
अपना जन्म के बारे मे परिचय देत भिखारी ठाकूर ई कहले बाडे , एहि ढंग से कवित्त दोहा चौपाई के माध्यम से अपना गांव के पता भी उँहा के बतवले बानी । भिखारी ठाकुर के जन्म 18 दिसम्बर 1887 के कुतुबपुर गांव जवन कि बिहार के छपरा जिला मे बा , भईल रहे ।
भिखारी ठाकुर के जनम के दिन ( 18 दिसम्बर आ कि 19 दिसम्बर) ले के आखर के वरिष्ठ सदस्य यशवंत मिश्र जी कुछ जानकारी दे रहल बानी -
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अपना जनम प भिखारी ठाकुर लिखत बानी कि –
बारह सौ पंचानवे जहिया , सुदी पूस पंचिमी रहे तहिया ।
रोज सोमार ठीक दुपहरिया, जन्म भइल रहे ओहि घरिया ॥
बारह सौ पंचानबे साल कहावल जब ।
कुतुबपुर के कहत भिखारी जन्म हमार तब ।
पुष महिना शुक्ल पक्ष मे पंचमी रोज सोमार ।
कहत भिखारी बारह बजे दिन मे जनम हमार ।
तेरह स सनतावन साल ह आज ह मंगल दिन ।
पंचमी कृष्ण आसाढ भइल मोर बासठ वर्ष के सीन ।
तदनुसार 1295 फसली आ सन् 1887 ई. पुस महीना के शुक्ल पक्ष के सोमार के दिने 12 बजे हमार जनम भईल रहे ।
अब अगर 1887 के कैलेंडर के देखल जाव त 18 दिसंबर के एतवार (Sunday) रहे, सोमार ना.
कैलेंडर आ पञ्चांग के अनुसार पुस महिना शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि आ सोमवार दिन 19 दिसंबर के रहे.
एसे हम इहे कहेम कि भिखारी ठाकुर जी के जयंती 19 दिसम्बर के मनावल जाव, 18 के ना.
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[ तबो चुकि अबहीं ले 18 दिसम्बर के दिन के भिखारी ठाकुर जी के जयंती के रुप में मनावल जाला एह से हमनी के 18 दिसम्बर के ध्यान में राखि के रउवा सभ से जानकारी साझा कइल जाई । ]
स्व. घनश्याम शुक्ल : स्मृति शेष
जन्मतिथि - 5-11-1949
पुण्यतिथि - 23-12-2021
आखर परिवार अपना संरक्षक, अपना गुरुजी, शिक्षा जगत के अखंडदीप, सामाजिक चेतना के अगुआ, कर्मयोगी, स्व. घनश्याम शुक्ल (मास्साब) के पुण्यतिथि प बेर बेर नमन क रहल बा श्रद्धांजलि दे रहल बा ।
भिखारी ठाकुर - जयंती प विशेष
जयंती - 18 दिसम्बर 1887
पुण्यतिथि - 10 जुलाई 1971
आखर परिवार अपना सांस्कृतिक नायक, समग्र अभिनेता , लोकगीत , लोक-भजन के शान, भोजपुरी नाट्य मंचन के पहिचान भिखारी ठाकुर जी के जयंती प बेर बेर नमन क रहल बड़ुवे।
[ भिखारी ठाकुर जी के लिखल रचना आ ओह से मिलल जानकारी जवन कि पांचांग आधारित बा, ओह आधार प आखर परिवार के वरिष्ठ सदस्य यशवंत मिश्र जी के हिसाब से भिखारी ठाकुर जी के जन्म तारीख 19 दिसम्बर 1887 होखे के चाहीं । चुकि शुरु से 18 दिसम्बर मनावल जा रहल बा एह से आखर परिवार ओहि दिन के ले के चल रहल बा । ]
लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के जन्म 18 दिसम्बर 1887 में बिहार के सारण जिला के कुतुबपुर गांव में भइल रहे । अपना जनम प भिखारी ठाकुर लिखत बानी कि -
बारह सौ पंचानवे जहिया , सुदी पूस पंचिमी रहे तहिया ।
रोज सोमार ठीक दुपहरिया, जन्म भइल ओहि घरिया ॥
बारह सौ पंचानबे साल कहावल जब ।
कुतुबपुर के कहत भिखारी जन्म हमार तब ।
पुष महिना शुक्ल पक्ष मे पंचमी रोज सोमार ।
कहत भिखारी बारह बजे दिन मे जनम हमार ।
तेरह स सनतावन साल ह आज ह मंगल दिन ।
पंचमी कृष्ण आसाढ भइल मोर बासठ वर्ष के सीन ।
शुभ सम्वत 1144 शाके , 1801 तदनुसार 1265 फसलो आ सन् 1887 ई. पुस महीना के शुक्ल पक्ष के सोमार के दिने 12 बजे हमार जनम भईल रहे । आठ बरिस नहोशी ( नादानी / अज्ञानता ) मे बीतल आ नउवा बरिस से जीवन चरित रचि रहल बानी । जब एकावन साल के भईनी तब जीवन चरित रचाईल आ अब प्रेस मे छपववनी ।
शुक्रवार शुभ लग्न घडी , शुभ तारीख हुई पांच ।
उनईस स एकतालीस को दिया प्रेस मे सांच ॥
अपना जीवन चरित के बारे में भिखारी ठाकुर जी लिखत बानी कि 8 बरिस ले ' नहोशी' में बीतल , नउवा साल पढे खातिर पाठशाला गइनी बाकि साल भर में ' राम गति ' लिखे ना आइल आ फेरु पढाई छोड़ देहनी । फेरु सरेही में गाई चरावल आ अपना जातिगत पेशा , लोगन के हजामत बनावल , इहे काम रहि गइल रहे । गांवही के बनिया के लइका भगवान से कुछ पढे के सीखला के बाद , रामायण के काथा में ढेर मन लागे लागल । ओकरा बाद कमाई खातिर खड़गपुर - कलकत्ता । ओजुगा दिन मे हजामत बनावल आ रात खा रामलीला देखल । रामलीला से मन में तमाशा के इच्छा जागल । जगन्नाथपुरी घुमला के बाद जब वापसी कलकत्ता भइल त संघतिया के गठरी में रामचरितमानस मिलल । ओहि के पढे में मन लाग गइल । ठाकुरद्वारा से खड़गपुर आ एहि बीचे रामायण के पाठ ( रामचरितमानस ) ।
फेरु वापसी गांव खाति भइल । गांवे अइला के बाद जेकरे से होखे ओकरे से कवित्त , छन्द , गीत , श्लोक सीखे पढे लगले । ओहि क्रम में खुद लिखहूँ के कोशिश होखे लागल । कैथी लिपि में भोजपुरी भाषा में रचना होखे लागल । गांव के संघतियन के सलाह प गांवही में कागज के मुकुट क्रीट बना के रामलीला शुरु हो गइल । ओहि घरी हमार बिआहो हो गइल रहे । बाद में अइसहीं रामलीला करत करत नाच पाटी बन गइल । घरे के लोग नाच पाटी से खुश ना रहे मना करत रहे बाकिर मन ना मानल आ नाच पाटी शुरु हो गइल । राम-कृष्ण के जय बोल के दोहा चौपाई कहिके उपदेश देत रहनी ।
ओह घरी भिखारी ठाकुर के नाच गाना बजाना कुछ के जानकारी ना बस , भोजपुरी में राम-कृष्ण के बारे में उपदेश । अपना तरिका से अपना भाषा में आपन बात कहत । माई भगवती के किरपा से नाव सगरे फइले पसरे लागल । नया-नया सृजन होखे लागल ।
भोजपुरी के समर्थ लोक-कलाकार , सामाजिक कुरितियन प अपना नाटकन से बरिआर चोट करे वाला लोकगीत , लोक भाषा के असली साधक रहले भिखारी ठाकुर । अपना समाज के धार्मिक , आर्थिक , पारिवारिक , सामाजिक चीजन के बहुत गहिर समझ राखत रहले , एहि वजह से हर चीझू के अपना नाटकन में उचित आ सही रुप दे के एगो सटीक अंजाम तक पहुंचवले बाडे । अतने ना लोकभजन , भक्ति-भाव , गंगा से जुड़ल भक्ति गीतन के एगो नया उंचाई मिलल बा भिखारी ठाकुर के रचना आ लेख से ।
भिखारी ठाकुर सम्पुर्ण कलकार रहले ह , लेखक , साहित्यकार , गीतकार , स्क्रिप्ट राईटर , अभिनेता , नर्तक , संवादी , निर्देशक यानि कि मय कला से भरल-पुरल । जन-चेतना खातिर ना खाली भक्ति बलुक हास्य व्यंग्य गाभी टिबोली के संगे संगे लोक से जुड़ल हर छोट से छोट बड़ से बड़ बात के सहारा ले ले बाडे भिखारी ठाकुर ।
दलित उत्थान , नारी उत्थान प भिखारी ठाकुर के प्रस्तुति अदभुत बा । भिखारी ठाकुर के मातृभाषा भोजपुरी ह । उ भोजपुरी के ही अपना काव्य आ नाटक के भाषा बनवले बाड़े । भोजपुरी गद्य में पुरहर काम भिखारी ठाकुर कइले बाडे । भोजपुरी भाषा में साहित्य के हर विधा में गोट काम भिखारी ठाकूर कइले बाडे ।
भिखारी ठाकुर के नाटक , उँहा के लिखल गीत भोजपुरिया समाज ही ना , भारत देश ही ना बिदेश में ले आपन एगो अलग स्थान बनवले बड़ुवे आ भोजपुरी भाषा साहित्य के विकास में आजुओ भरपुर योगदान दे रहल बड़ुवे ।
भिखारी ठाकुर ( खुंट परिवार के बारे में )
मूल रुप से आरा जिला ( भोजपुर ) के रहे वाला रहनी । बाकि इँहा के जनम से पहिले पुरा परिवार कुतुबपुर ( सारण ) चल आइल । सरजू गंगा के कछार प अइसन बदलाव आ पलायन बहुत आम बात ह ।
राधेश्याम बहार में भिखारी ठाकुर जी अपना परिवार आ खुंट के बारे में पुरा लिखले बानी । तबो अपना खुंट के बारे में बतावत भिखारी ठाकुर जी के हइ पंक्ति -
पहिले बास रहल भोजपुर में, मौजें अरथू अवारी ।
पुरखा पांच बसलन शंकरपुर जानत बा सब नर-नारी ।
एहि विस्थापन प भिखारी ठाकुर जी के एगो कवित्त बा -
आरा जिला ममहर ससुरार फुफहर, आरा जिला परोहित गुरु आरा परिवार है
आरा जिला राजा दिवान छड़िदार आरा डाकघर बबुरा बरह गांवो में बधार है ।
थाना बड़हारा आरा छपरा का मध्य मांहि, परत करीब चकियाँ मटुकपुर बाजार है
ढह कर कुतुपुर गाँव बसल दियरा में, तबहीं से भिखारी कहत छपरा प्रचार है ।
भिखारी ठाकुर के प्रकाशित रचना !
भिखारी ठाकुर में अदभुत प्रतिभा रहे । उ मूल रुप से कवि रहले , गीतकार रहले , आ बहुते सुरीला उ गावतो रहले । बेहतरीन अभिनय के क्षमता रहे उनुका में । नाटकन के संवाद के रचना उ करत रहले । नाटक के पात्रन के संगठित क के ओह लोगन के अभिनय , गायकी आ नाचे के प्रशिक्षणो देत रहले । साज आ संगीत के जुड़ाव उ देखत रहले । भोजपुरी भाषा में , कैथी आ देवनागरी लिपि में उ लिखतो रहले । उनुकर कुल्हि 29 गो किताब / रचना प्रकाशित भइल रहे ।
1- बिरहा बहार
2- राधेश्याम बहार नाटक
3- बेटी-वियोग नाटक
4- कलियुग प्रेम नाटक
5- गबरघिचोर नाटक
6- भाई-बिरोध नाटक
7-श्री गंगा स्नान नाटक
8- पुत्रबध नाटक
9- नाई बहार
10-ननद-भौजाई संवाद
11-भांड़ के नकल
12-बहरा-बहार नाटक
13-नवीन बिरहा नाटक
14-भिखारी शंका समाधान
15- भिखारी हरिकीर्तन
16- यशोदा सखी संवाद
17- भिखारी चौयुगी
18- भिखारी जै हिन्द खबर
19- भिखारी पुस्तिका सुची
20- भिखारी चौवर्ण पदबी
21- विधवा-विलाप नाटक
22- भिखारी भजनमाला
23- बूढशाला के बयान
24- श्री माता भक्ति
25- श्री नाम रतन
26- राम नाम माला
27- सीताराम परिचय
28- नर नव अवतार
29- एक आरती दुनिया भर के
एकरा अलावा कुछ छुटकर फूट नोट हेने - होने कापी कागज के टुकी प लिखाइल रहे । बिहार राष्ट्रभाषा परिषद " भिखारी ठाकुर रचनावली " नाव से भिखारी ठाकुर के रचना / लेख के एक जगहा प्रकाशित कइले बड़ुवे । बिहार राष्ट्र भाषा परिषद भिखारी ठाकुर के रचना के दु भाग में वर्गीकरण कइले बड़ुवे -
लोकनाटक -
1- बिदेसिया
2- भाई-बिरोध
3- बेटी -बियोग
4-विधवा -बिलाप
5- कलियुग प्रेम
6- राधेश्याम बहार
7- गंगा - स्नान
8- पुत्र-बध
9- गबरघिचोर
10- बिरहा - बहार
11- नकल भाड़ आ नेटुआ के
12- ननद भउजाई
भजन - कीर्तन - गीत - कविता -
1- शिव - विवाह
2- भजन कीर्तन - राम
3- रामलीला गान
4- भजन कीर्तन - कृष्ण
5- माता भक्ति
6- आरती
7- बूढशाला के बयान
8- चौवर्ण पदबी
9- नाई बहार
10- शंका समाधान
11- विविध
12- भिखारी ठाकुर परिचय
भिखारी ठाकुर के हर रचना समाज खातिर घर परिवार खातिर बहुत बरिआर आ गहिर सनेश रखले बाडी स आ उहे कारण रहे कि भिखारी ठाकुर के हर प्रस्तुति हर रचना के पहुंच जन-जन ले रहे । उनुकर लिखल कुछ रचना नाटकन के समाज के दृष्टिकोण से बहुत महत्व रहे आ ओकर असर भी बहुत बरिआर रहे । आस्था , भक्ति धर्म आ आडम्बर के बीच के भेद आ एह के रुप बड़ा ही सुनर तरिका से भिखारी ठाकुर अपना रचना में देखवले बाडे । उँहा के कुछ रचना / नाटक के समाज से जुड़ाव -
1-बिदेसिया - पति - वियोग / पलायन / पलायन से उपजे वाला पारिवारिक परेशानी
2-भाई -विरोध - संयुक्त परिवार में विघटन
3-विधवा- विलाप - विधवा के संगे सामाजिक अत्याचार
4-गंगा स्नान - धार्मिक आडम्बर
5-पुत्र -बध - नारी चरित्र के विचलन
6-गबरघिचोर - पुरुष प्रधान समाज के तुरे के कोशिश , मानव के वस्तु के रुप में देखे के मानसिकता
7-ननद भउजाई - बाल विवाह , पारिवारिक नफरत
8-कलियुग प्रेम - नशाखोरी आ ओकर असर
9-बेटी-वियोग - बेटी बेचे वाली सोच आ बेमेल बिआह
भिखारी ठाकुर के नाटकन के खास बात इ बा कि आधा आबादी यानि कि नारी समाज के बहुत उचित आ प्रधान रोल दिहल गइल बा । आधा आबादी के आवाज बन के क गो नाटक सोझा आ रहल बा । चाहें उ बिदेसिया होखे भा गबरघिचोर । नारी के हर रुप देखे के मिल रहल बा भिखारी ठाकुर के नाटकन में ।
भिखारी ठाकुर के रचना में काव्य बेसी बा , आ काव्य के हर रुप हर भाव के दर्शन होला । इनिकर गीत लय सुर ताल से ले के आरोह -अवरोह में नीमन से सरिहरइला के वजह से गेय आ प्रभावी बड़ुवे । लोकगीत के प्रचलित विधा में इँहा के अधिकतर रचना कइले बानी । जइसे कजरी , फाग , चइता , चौबोला , बारहमासा , सोहर , वियाह के गीत , जंतसार , सोरठी , आल्हा , पचरा , भजन , बिरहा , कीर्तन आदि बा ।
भिखारी ठाकुर के बारे में कुछ बड़हन साहित्यकार लोगन के कथन -
हमनी के बोली में केतना जोर हवे , केतना तेज बा - ई अपने सब भिखारी ठाकुर के नाटक में देखीला । भिखारी ठाकुर हमनी के एगो अनगढ हीरा हवे । उनुका में कुलि गुन बा , खाली एने-ओने तनी-मुनी छांटे के काम हवे ।
-राहुल सांकृत्यायन
भिखारी ठाकुर वास्तव में भोजपुरी के जनकवि बाडे । उनुका कविता में भोजपुरी जनता अपना सुख-दुख , नीमन-बाउर के सोझ आ साफ रुप में देख सकेले । गांव से जुड़ल विषयन प ठेठ आ टकसाली भोजपुरी में लिखे में भिखारी ठाकुर सिद्धहस्त बाडे ।
-डा. उदय नारायण तिवारी
उ ( भिखारी ठाकुर ) कइ गो नाटक समाज-सुधार -संबंधी लिखले बाडे । उ एगो नाटक मंडली बनवले बाड़े जवना के धुम भोजपुरिया जिला आ भोजपुरियन के बीचे खुबे बा ।
-दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह
जनता के चीझू के जनता के सोझा , जनता के मनोरंजन खातिर , प्रस्तुत क के भिखारी ठाकुर बड़ लोकप्रियता पवले । सांच त इहे बा कि खाली इ एगो आदमी , भोजपुरी के जतना प्रचार कइले बा , ओतना प्रचार शायदे केहू कइले होखे । भोजपुरी प्रदेश में भोजपुरी कविता आ भोजपुरी नाटक के धूम मचा देबे वाला एह नाटककार आ अभिनेता के भोजपुरी भाषा के प्रचार प्रसार में सबसे बेसी योगदान बा ।
-डा. कृष्णदेव उपाध्याय
उ ( भिखारी ठाकुर ) सही माने में लोक-कलाकार रहले , जे वाचिक / मौखिक परम्परा से उभर के आइल रहले बाकिर उनुकर नाटक हमनी के सोझा मौखिक आ लिखित दुनो रुप में बा । उ एगो लोक-सजग कलाकार रहले , खलिहा मनोरंजन कइल उनुकर मकसद ना रहे । उनुकर हर कृति कवनो ना कवनो सामाजिक विकृति भा कुरिति प बरिआर चोट करत बड़ुवे आ अइसन करत घरी उनुकर सबसे चोख हथियार बड़ुवे व्यंग्य ( गाभी / टिबोली ) ।
-डा. केदार नाथ सिंह
भिखारी ठाकुर के ' अनगढ हीरा ' राहुल सांकृत्यायन जी कहले रहनी , भिखारी ठाकुर के तुलना ' शेक्सपियर ' से , अंग्रेजी के प्रकांड विद्वान प्रो. मनोरंजन प्रसाद सिंह जी कइले रहनी , भिखारी ठाकुर के ' भोजपुरी के जनकवि ' डा. उदय नारायण तिवारी जी कहले रहनी ।
भिखारी ठाकुर प पहिला हाली काम करे वाला कुछ लोग -
भिखारी ठाकुर प पहिला किताब लिखे वाला रहनी महेश्वराचार्य जी । असल में भिखारी ठाकुर प 1931 से इहाँ के अलग अलग पत्र-पत्रिका में लेख लिखत रहनी जवन बाद में भिखारी ठाकुर के रुप में आइल आ फेरु भिखारी नाव से 1978 के करीब किताब आइल ।
भिखारी ठाकुर के चर्चा आ मंचन के रंगमंच के एलीट-क्लास में ले आवे के श्रेय जाला जगदीश चंद्र माथुर जी के । इहें के भिखारी ठाकुर के नाटक के मंचन, पटना में करवइले रहनी जवन ऐतिहासिक हो गइल रहे ।
भिखारी ठाकुर के सबसे पहिला साक्षत्कार लेबे वाला व्यक्ति रहनी पो. रामसुहाग सिंह । 1 जनवरी , 1965 के धापा कलकत्ता में इंटरव्यू ले ले रहनी ।
भिखारी ठाकुर के नाटक ' बिदेसिया ' के सबसे बेसी हाली मंचन करे के श्रेय जाला संजय उपाध्याय जी के । 725 हाली से बेसी, भारत के अलग अलग क्षेत्र शहर में बिदेसिया के मंचन संजय उपाध्याय जी के निर्देशन में निर्माण कला मंच के माध्यम से भइल बा । इहां द्वारा मंचित बिदेसिया नाटक के प्रस्तुति आखर के युट्युब प देखीं - https://t.co/khBz4iTqUg
भिखारी ठाकुर प पहिला शोध , डा. तैयब हुसैन पिड़ीत जी के ह । 1988 में बिहार विश्वविद्यालय , मुजफ्फरपुर से भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व आ कृतित्व प शोध कइले रहनी । सही माने में इहाँ के शोध के बाद भिखारी ठाकुर प एक हाली फेरु से चर्चा सगरे होखे लागल ।
आखर परिवार अपना सांस्कृतिक, साहित्यिक नायक के बेर बेर नमन क रहल बा,।
[ एह लेख में अलग अलग किताब , अलग अलग ब्लाग आ अलग अलग पत्रिका से जानकारी लिहल गइल बा । एह लेख के माध्यम से भोजपुरिया नायक भिखारी ठाकुर के बारे में बेसी से बेसी जानकारी देबे के कोशिश कइल गइल बा ।
भोजपुरी संगीत जगत के अनमोल नगीना शारदा सिन्हा जी ब्रह्मलीन हो गइनी। भोजपुरी सहित सगरी लोक भाषा खातिर ई अपूरणीय क्षति बा । आखर परिवार आपन लोर भरल श्रद्धांजलि व्यक्त करत ईश्वर से प्रार्थना कर रहल बा कि ऊंहा के अपना श्रीचरणन में स्थान देत परिवार के एह दुःख से निकाले में मदद करस 🙏🙏
जिस आवाज़ से छठ की शुरूआत हुआ करती थी, वही आवाज़ छठ के शुरू होते ही ख़ामोश हो गई। शारदा सिन्हा जी अब हमारे बीच नहीं हैं। शारदा सिन्हा ने अपनी गायकी से ऐसी सामूहिकता का सृजन किया जिसे पहचानने के लिए ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना नहीं पड़ता है बल्कि चुपचाप अपने भीतर महसूस करना होता है। उनके गीत छठ का हिस्सा हैं। कहते हैं छठ में कुछ भी बाहरी परिवर्तन नहीं हुआ, जो पुराना है वही चला आ रहा है सिवाय शारदा सिन्हा के छठ गीतों के। क्या कोई छठ को शारदा सिन्ही की आवाज़ से अलग कर सकता है? इन्हीं दिनों लाउड स्पीकर बजने लगते हैं। खेत खलिहानों और नदी किनारे बने घाटों से आ रही उनकी आवाज़ गांव-घर बुलाने लग जाती है।शारदा सिन्हा की आवाज़ बिहार जैसे ग़रीब राज्य की सबसे बड़ी समृद्धी थी। आज बिहार थोड़ा ग़रीब हो गया। हम आपको अपनी यादों में रखेंगे। जब रोएँगे अपनों की याद में, आपको भी याद करेंगे। अलविदा शारदा जी।
लोकपर्व - छठ - 2024
आज नहाय खाय ह । छठ पर्व के पहिला दिन
जहां आज बिहार में चार दिन के एह लोकपर्व के पहिला दिन यानि कि नहाय खाय ह ओजुगे पुर्वांचल में क जगह प नहाय-खाय खरना के दिने यानि काल्ह होई ।
शशिरंजन मिश्र आ संजीव सिन्हा के माध्यम से एह लोकपर्व से जुड़ल कुछ जानकारी !
आखर प एह छठ गीत के सुनीं -
https://t.co/uCh9001eQs
King Kohli reigns supreme 👑
Virat Kohli is awarded the @Aramco POTM after his 76 off 59, played a pivotal role in India lifting the #T20WorldCup trophy 🏆
#SAvIND