प्रधानमंत्री जी,
राष्ट्र और सेना आपकी छवि, आपकी राजनीति, आपके PR और प्रचार से बहुत ऊपर है।
यह समझने की विनम्रता रखिए, यह स्वीकार करने की गरिमा रखिए।
आपमें अगर निर्णय लेने की क्षमता नहीं थी, तो सेना और राष्ट्र का स्वाभिमान गिरवी रखने का भी आपको कोई अधिकार नहीं था।
@madandilawar Sir, मेरा बेटा Golden Era Academy, Jagatpura Jaipur में पढ़ते हैं बच्चों को स्कूल के नाम प्रिंट की हुई बुक्स नोटबुक ड्रेस लगभग सभी सामग्री खुद देते हैं और मनमाना पैसा चार्ज करते है।
आपके टैक्स के पैसों का इस्तेमाल सरकार कुम्भ मेले की सजावट और भव्यता बढ़ाने के लिए कर रही है। क्या यह सही है कि जनता के पैसे को धार्मिक आयोजनों पर खर्च किया जाए, जब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी प्राथमिकताएँ अनदेखी हो रही हों?
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राजस्थान की भजनलाल सरकार का यह फैसला दलितों और आदिवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। धारा 42 (बी) में बदलाव करके उन्होंने न केवल इन समुदायों की जमीन छीनने का रास्ता तैयार किया है, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों की भी अवहेलना की है। यह कदम सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। भजनलाल शर्मा का यह निर्णय यह दर्शाता है कि उनकी सरकार बड़े पूंजीपतियों और प्रभावशाली वर्गों के हितों को प्राथमिकता देती है, जबकि समाज के वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को हानि पहुंचाने में कोई झिझक नहीं दिखाती। यह नीति न केवल अमानवीय है, बल्कि भविष्य में राज्य में सामाजिक असंतोष और अस्थिरता को भी बढ़ावा देगी। भजनलाल शर्मा को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकार संरक्षित रहें।