*शिक्षक संघ के नेता चक्रधर बाबू ने शिक्षकों के हक के लिए क्या किया? आंदोलन के दौरान कितने मुकदमे हुए? पदाधिकारियों को भी कैसे सजा कराए। शिक्षक दिवस के अवसर पर पढ़िए यह आलेख*
*शिक्षकों को अपमानित करेंगे तो आपके बच्चों को कैसे शिक्षा देंगे शिक्षक? शिक्षक को उचित सम्मान दीजिए तभी आपके बच्चे आगे बढ़ पाएंगे। शिक्षक दिवस पर विचारणीय मुद्दा।*
ऐसे भी हैं डॉक्टर की श्रृंखला में पढ़िए एक ऐसे डाक्टर की कहानी जो विपत्ति में अपने सहकर्मी डाक्टर और कर्मचारियों के लिए संकटमोचन बन जाते थे। कौन थे ऐसे डाक्टर जो डीसी गोरेलाल यादव से भी भिंड गए थे? पढ़िए यह रिपोर्ट
*ऐसे भी हैं डॉक्टर की श्रृंखला में पढ़िए एक ऐसे डाक्टर की कहानी जिसका एक पैर गरीब के दरवाजे पर ही रहता था। डीसी केके खंडेलवाल ने क्या था ऐसे डॉक्टर को पढ़िए यह रिपोर्ट*
*ऐसे भी हैं डॉक्टर, की श्रृंखला में पढ़िए एक ऐसे डाक्टर की कहानी जिसके रिजन में गोड्डा सदर अस्पताल को मिला था पूरे राज्य में प्रथम स्थान? जिसने हर रोगी को फोलो आप करने के बाद ही बाहर रेंफर करने का दिया था आदेश?*
*ऐसे भी हैं डॉक्टर, की श्रृंखला में पढ़िए एक ऐसे डाक्टर की कहानी जिसके रिजन में गोड्डा सदर अस्पताल को मिला था पूरे राज्य में प्रथम स्थान? जिसने हर रोगी को फोलो आप करने के बाद ही बाहर रेंफर करने का दिया था आदेश?*
*राह चलते भी रोगी को कौन डॉक्टर लिख देते हैं दवा? रोगी ही नहीं, उसके पुरे परिवार का नाम किस चिकित्सक को है याद? पढ़िए ऐसे भी हैं डॉक्टर की कड़ी में यह खबर*
*ईएनटी डां एस के चौधरी 1992 में जो गोड्डा आए, वे यहीं का बनकर कैसे रह गए? उस समय कितना था चिकित्सकों का फीस? रोगी और डॉक्टर के बीच कैसा होना चाहिए रिश्ता? पढ़िए यह रिपोर्ट*
*मंडल कारा गोड्डा (जेल) के मुलाकाती को अभी भी अपने हक की आज़ादी का बेसब्री से रोज इंतजार। देखना है कब मिलता है मुलाकाती को अपना हक। क्या है जेल नियमावली में मुलाकाती का हक? स्वतंत्रता दिवस पर पढ़िए यह रिपोर्
@ourcmo@HemantSorenJMM@JailJharkhand
@jailiharkandig
*गोड्डा जिले के 108 वर्षीय जीवित स्वतंत्रता सेनानी नंदकिशोर मांझी का कहना है कि हमारे उत्तराधिकारी को बिहार की तरह नौकरी में आरक्षण मिले। स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारी को आसाम सरकार की तरह मिले 25 हजार रुपया प्रतिमाह पेंशन।
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स्वतंत्रता सेनानी छोटा धरमा पहाड़िया का परिवार चाहता है कि बिहार की तरह झारखंड सरकार भी स्वतंत्रता सेनानी के वंशज को नौकरी में आरक्षण दे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेनको इसी स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा कर देना चाहिए।
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देव कुमार गुंजन की मां ने कहा कि अगर मेरा बेटा एमवीआई बहू स्मिता को पसंद नहीं था तो उसे वह छोड़ कर चली जाती। मेरे बेटे को जान से मरवाने पर उसे क्या मिला? श्राद्ध कर्म में आई बहू तो मेरे बेटे की याद में कई वार बेहोश भी होती रही।
हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल पर
आज पत्रकारिता में वही संस्थान जिंदा रह पाएगा, जो ग्राउंड रिपोर्ट में मजबूत होगा, आखिर कैसे? पढ़िए संपादकीय पेज पर छपी यह नौंवी किस्त
कब अखबारों का शुरु हुआ स्थानीय संस्करण ? विदेशी निवेश ने कैसे बना दिया इसे बड़ा उद्योग? डिजिटल पत्रकारिता की कब हुई शुरुआत? हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल पर पढ़िए संपादकीय पेज पर छपी सातवीं किस्त
कब टेलीविजन ने भारत में दी दस्तक? सबसे पहले किस ग्रुप ने शुरु किया निजी समाचार चैनल। हिन्दी पत्रकारिता में कब जिला से प्रखंड तक में बहाल होने लगे पत्रकार? हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल पर पढ़िए संपादकीय पेज पर छपी पांचवीं किस्त का यह आलेख