देश ऐसे ही चलेगा तो संविधान, सुप्रीम कोर्ट की क्या जरूरत ?
देश को जाति के नाम पर खंडित ही करना है तो ५५२ रियासते एक करके देश को अखंड बनाने रखने का क्या होगा ?
#कल_भारत_बंद_नहीं_होगा
श्री राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में अपनी जायज मांगों को लेकर जयपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर प्रशासन द्वारा लाठीचार्ज किया जाना अत्यंत निंदनीय है। असहमति की आवाज़ का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता से होना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
@PMOIndia@RajCMO
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिज़र्व घोषित करने के प्रस्ताव पर राजसमंद सांसद श्रीमती @BjpMahimakumari जी द्वारा व्यक्त की गई चिंताएँ गंभीर और विचारणीय हैं।
प्रश्न यह नहीं है कि बाघों का संरक्षण होना चाहिए या नहीं। निश्चित रूप से होना चाहिए। प्रश्न यह है कि क्या किसी नए प्रयोग के लिए हम एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र को दांव पर लगा सकते हैं, जो पहले से ही अनेक महत्वपूर्ण और दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों का सुरक्षित आवास है?
कुंभलगढ़ भारतीय भेड़िये (Indian Wolf) के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक माना जाता है। इसके अलावा यहाँ तेंदुए, स्लॉथ बियर, लकड़बग्घे, चिंकारा, सांभर और दुर्लभ कैराकल जैसी प्रजातियाँ वर्षों से प्राकृतिक संतुलन के साथ निवास कर रही हैं। संरक्षण का अर्थ केवल एक आकर्षक प्रजाति को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखे तो बाघों को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ आबादी के लिए पर्याप्त शिकार, विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होती है। यदि यह आधार पर्याप्त नहीं होगा तो मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका और अधिक बढ़ेगी। रणथंभौर सहित देश के कई टाइगर रिज़र्व क्षेत्रों में ऐसे संघर्षों की घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रही हैं।
कुंभलगढ़ की पहाड़ी एवं पथरीली भौगोलिक संरचना तेंदुओं, भालुओं और अन्य स्थानीय वन्यजीवों के लिए स्वाभाविक आवास रही है। कई संरक्षणवादियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक आधारों और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर पूर्व में भी अपनी आपत्तियाँ दर्ज करवाई हैं।
साथ ही इससे आदिवासी परिवारों एवं रबारी समुदाय की आजीविका, पारंपरिक चराई व्यवस्था और वन संसाधनों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
राजस्थान पहले ही सरिस्का और मुकुंदरा जैसे टाइगर प्रोजेक्ट्स के अनुभव देख चुका है, जहाँ भारी निवेश, संसाधनों और निगरानी के बावजूद अपेक्षित सफलता प्राप्त करने में चुनौतियाँ बनी रहीं। ऐसे में नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा से पहले मौजूदा टाइगर रिज़र्व्स को और अधिक संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें सुदृढ़ बनाना अधिक व्यावहारिक होगा।
मेरी सरकार से मांग है कि कुंभलगढ़ को टाइगर रिज़र्व घोषित करने की जल्दबाजी के बजाय यहाँ पहले से निवासरत वन्यजीवों के संरक्षण हेतु विशेष फंड, बेहतर आवास विकास, जल प्रबंधन और वैज्ञानिक संरक्षण योजनाएँ लागू की जाएँ। केवल पर्यटन या व्यावसायिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया कोई भी निर्णय भविष्य में अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति का कारण बन सकता है।
@byadavbjp@Sanjay4India1@ntca_india@moefcc
बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों का 38 दिन से धरना प्रदर्शन जारी है। शिव विधायक श्री @RavindraBhati__ भी 15 दिन से इन मजदूरों के साथ बैठे हैं परन्तु न तो सरकार ने कोई वार्ता की और न ही प्रशासन ने ध्यान दिया। इस उदासीनता के कारण वे मजदूरों के साथ कलेक्ट्रेट कूच करने एवं अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलने तक को मजबूर हुए।
भाजपा के शासन में एक विधायक को अपनी मांगों पर ध्यानाकर्षण के लिए ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है तो आम आदमी की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। राज्य सरकार को अविलंब इनकी मांगों पर ध्यान देकर सकारात्मक हल निकालना चाहिए।
राष्ट्र नायक, भारतीय स्वाभिमान व शौर्य के अप्रतिम प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा संग्राम सिंह जी (राणा सांगा) की जन्मजयंती पर कोटि-कोटि नमन।
#RanaSanga#राणा_सांगा
प्रिय नौजवान साथियों,
आपका अटूट स्नेह, विश्वास और समर्थन मुझे हमेशा ऊर्जा प्रदान करता रहा है। आज उसी विश्वास के साथ आपसे एक छोटी सी, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण अपील कर रहा हूँ।
वर्तमान समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचनाओं को साझा करने का एक मजबूत स्तंभ है इसे हम समाज को जोड़ने, सकारात्मक सोच फैलाने और अच्छे कार्यों के लिए इस्तेमाल करें। अगर आप स्वयं को मेरा समर्थक मानते हैं, तो मेरी आपसे विनम्र अपील है कि किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या व्यक्ति विशेष के खिलाफ अमर्यादित टीका-टिप्पणी से दूर रहें।
मेरे राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी अपणायत, भाईचारा और आपसी सम्मान रही है जो कि मुझे मेरे पूर्वजों से मिली हैं। राजनीति और वोट से कहीं ऊपर हमारा सामाजिक सौहार्द है, जिसे बनाए रखना हम सबकी सामुदायिक जिम्मेदारी है।
बीते कुछ समय से हमारी इस पावन अपणायत की धरती पर सुनियोजित तरीके से नकारात्मकता फैलाकर आपसी वैमनस्य बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं। लेकिन यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपने स्वविवेक, समझदारी और संयम का परिचय देते हुए इन प्रयासों को सफल न होने दें।
बरसों से चली आ रही भाईचारे, अपनत्व और सामाजिक समरसता की इस परंपरा को बनाए रखना ही हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
आपका अपना,
रविन्द्र सिंह भाटी
लड़की राजपूत समाज की थी और बलात्कारी पासवान थे
बलात्कारियों को 5000 साल से पानी नही ं मिला था इसलिए उन्होंने राजपूत लडकी इज्जत लूट कर अपनी प्यास बुझाई
लेकिन आवाज उठान े वाला कोई नहीं क्योंकि लड़की अगड़ी जाति की थ
सुनो जनरल कैटेगरी वालो, अब सब काम छोड़ के लाइसेंसी हथियार खरीद लो!, (उठा लो)
सरकार पूछ े तो बस इतना कह देना कि –
अब आपकी बस की बात नही ं ह ै हमे ं सिक्योरिटी देना, हमें अपनी सुरक्षा खुद करनी पड़ेगी।
सारण की बेटी, न मोदी की बेटी है न राहुल की न तेजस्वी की न अखिलेश की न चिराग की न प्रियंका की न रवीश की न आशुतोष की न चित्रा की न चंद्रशेखर की....
वह उस सवर्ण की बेटी है जो इन ऊपर लिखें तमाम नामों के एजेंडे मे फिट नहीं बैठती...।
आपने परिवार की आपने बहु बेटी बहन की रक्षा की जिम्मेदारी तुम्हारी स्वयं की है।
शायद ही बिटिया को न्याय मिले 🙏
झूठ े हाथरस केस पर नंगा नाच करने वालो, सारण की घटना पर मुंह में गोबर घुस गया क्या ..,
क्योंकि बच्ची राजपूत समाज की ह ै इसलिए वो रावण भी सड़क पर दौड़ता नही ं दिखेगा .. है तेरे पर
#राजपूत समाज
Orkut जिस ने पहली बार दिल खोल कर दिल की बात करने का मौका दिया ......❤️
एक समय था जब इंटरनेट की दुनिया में एक अलग ही मोहब्बत बसती थी...
नाम था Orkut
2006–07 के आसपास अपने देश में लाखों लोग पहली बार इंटरनेट पर दोस्त बना रहे थे।
कॉलेज के लड़के साइबर कैफ़े में 20–30 रुपये देकर लॉग-इन करते थे, सिर्फ़ यह देखने के लिए कि किसने scrap भेजा है।
सोचिए कि स्क्रैप को भी लोग प्यार समझते थे।
किसी की प्रोफाइल पर लिखा होता था....
"Don’t forget to leave a scrap”
और किसी की प्रोफाइल पर 500+ scraps देखकर लोग सोचते थे ...वाह! कितना famous है!
कई लोगों का पहला ऑनलाइन crush भी Orkut पर ही हुआ था…
कोई DP देखकर दिल दे बैठा, कोई testimonial पढ़कर मुस्कुरा दिया।
लोग communities जॉइन करते थे।
"I love my India" "Shahrukh Khan Fans" या “Friends forever”
वहीं दोस्ती होती, बहस होती, कभी-कभी प्यार भी
लेकिन सच कहें तो आज भी जिन लोगों ने Orkut चलाया है, उनके लिए इंटरनेट की सबसे सच्ची और मासूम यादें वहीं से शुरू होती हैं।
क्योंकि वहाँ फॉलोवर्स नहीं होते थे…
बस दोस्त होते थे।
शायद यहां भी ऐसे बहुत सारे लोग हों जिनकी यादें उसी orkut से जुड़ी हों जिस ने इंटरनेट पर पहली बार दिल धड़काया था।
कॉमेंट कर के बताओ अगर तुम्हारी भी कोई याद उसी स्क्रैप से जुड़ी है👇❤️❤️
#IranWar
#Israel
#किसान_मसीहा_संतरामपालजी
भारत की समुद्री सीमा से बाहर निकलने के बाद भारत की जिम्मेदारी खतम।
अगर उसन े भारत से शरण मांगी होती तो बात अलग होती लेकिन नहीं, कप्तान साहब को भरोसा था चीन पर और उधर शरण लेने चल दिये।
निबटा दिय े गये।
अगर भारत की समुद्री सीमा मे ं बन े रहते तो सुरक्षित रहते।
भारत की संप्रभुता उसकी समुद्री सीमा तक है, पूरे हिंद महासागर का ठेका नहीं लिया उसन े ।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में क्या ईरान ने भारत को स्पेशल क्लियरेंस दी है जो भारत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा में ईरानी नौसेना की सुरक्षा की गारंटी लेगा? और क्यों ले??
हूती विद्रोही व समुद्री डाकूओं को कौन पाल रहा था जिन्होंन े भारत को भी नुक्सान पहुंचाया था?
अरब इजरायल युद ्ध मे ं भारत ने हमेशा अरबों का समर्थन किया लेकिन ऑइल सप्लाई भारत की भी बंद कर दी तो ऐस े दर हरामी इस्लामी मुल्कों के झगड ़ े मे ं हम क्यों फंस े ?
भारत की समुद्री सीमा से बाहर निकलने के बाद भारत की जिम्मेदारी खतम।
अगर उसन े भारत से शरण मांगी होती तो बात अलग होती लेकिन नहीं, कप्तान साहब को भरोसा था चीन पर और उधर शरण लेने चल दिये।
निबटा दिय े गये।
अगर भारत की समुद्री सीमा मे ं बन े रहते तो सुरक्षित रहते।
भारत की संप्रभुता उसकी समुद्री सीमा तक है, पूरे हिंद महासागर का ठेका नहीं लिया उसन े ।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में क्या ईरान ने भारत को स्पेशल क्लियरेंस दी है जो भारत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा में ईरानी नौसेना की सुरक्षा की गारंटी लेगा? और क्यों ले??
हूती विद्रोही व समुद्री डाकूओं को कौन पाल रहा था जिन्होंन े भारत को भी नुक्सान पहुंचाया था?
अरब इजरायल युद ्ध मे ं भारत ने हमेशा अरबों का समर्थन किया लेकिन ऑइल सप्लाई भारत की भी बंद कर दी तो ऐस े दर हरामी इस्लामी मुल्कों के झगड ़ े मे ं हम क्यों फंस े ?
भारत की समुद्री सीमा से बाहर निकलने के बाद भारत की जिम्मेदारी खतम।
अगर उसन े भारत से शरण मांगी होती तो बात अलग होती लेकिन नहीं, कप्तान साहब को भरोसा था चीन पर और उधर शरण लेने चल दिये।
निबटा दिय े गये।
अगर भारत की समुद्री सीमा मे ं बन े रहते तो सुरक्षित रहते।
भारत की संप्रभुता उसकी समुद्री सीमा तक है, पूरे हिंद महासागर का ठेका नहीं लिया उसन े ।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में क्या ईरान ने भारत को स्पेशल क्लियरेंस दी है जो भारत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा में ईरानी नौसेना की सुरक्षा की गारंटी लेगा? और क्यों ले??
हूती विद्रोही व समुद्री डाकूओं को कौन पाल रहा था जिन्होंन े भारत को भी नुक्सान पहुंचाया था?
अरब इजरायल युद ्ध मे ं भारत ने हमेशा अरबों का समर्थन किया लेकिन ऑइल सप्लाई भारत की भी बंद कर दी तो ऐस े दर हरामी इस्लामी मुल्कों के झगड ़ े मे ं हम क्यों फंस े ?