सभी आदरणीय फालोवर्स का ह्रदय से आभार।
शुरुआत से ही हमने सनातनी और राष्ट्रवादी भाई बहनों को किसी अपेक्षा के बिना फालो किया मगर अब जब संख्या 5000 हो जाने के बाद आगे नहीं बढ़ पा रही हैं👇। किसी से फालोबैक की अपेक्षा नहीं करते हैं कुछ निष्क्रिय को हटा रहा हूं जिसमें समय लग रहा है।🙏🏻
📢 आंदोलन का पाखंड बेनकाब! 😂
सफदरजंग अस्पताल पहुंचे वांगचुक!आशंका है 2 दिन पहले चुपके से कुछ खाया जिससे फूड पॉइज़निंग,लूज मोशन और डिहाइड्रेशन हो गया
अब ड्रिप चढ़ रही है और आज नाश्ते में 'पोहा' मिलेगा। आंदोलनकारी चमचों,कैमरे के पीछे की इस चोरी पर अब क्या कहोगे? खाओ पोहा!
#His
"सिय राम मय सब जग जानी। करहुँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥"
आज संकल्प लें कि परिवार के हर सदस्य से प्रेम और आदर से बात करेंगे। जहाँ आपसी संवाद में मिठास और बड़ों का सम्मान होता है, वहाँ प्रभु का वास होता है।
जय श्री राम! 🙏🚩
#हिज
"प्रूफ" शब्द सुना है ना
अगर है तो पेश करो बाकी एक ट्वीट से ना कुर्सी
मिलेगी ना प्रतिष्ठा मिलेगी और ना ही परिणाम मिलेगा
देखो अवैध कब्जे और नक्शे की बात कौन कर रहा है,
जो हमेशा ही ईलिगल इमारतें खड़ी करने वाले माफियाराज को बढ़ावा देता रहा
मुझे तो इनकी बड़ी बड़ी बाते सुनकर ही हंसी आती है!
क्रांतिवीरों का आंदोलन फिरंगियों के खिलाफ था
ताकि अपना देश सुरक्षित रहे
लेकिन कुर्सीवीरो का प्रोटेस्ट अपने ही देश का विरोध है
अपने आका का राजनैतिक भविष्य संवारने
राजनीति से बढ़कर राष्ट्रनीति होनी चाहिए
जो ये लोग भूल चुके हैं 🔥
जनता को अब “Look into the matter” नहीं,
Action into the matter चाहिए
सुबह से आपके अधिकारी कमेंट पास कर टाइमपास
कर रहे है और ये आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं
@RailMinIndia बताइए, गिरफ्तारी कब होगी? या फिर सिर्फ़ सोशल मीडिया पर जवाब देकर ज़िम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी? 🙄
सोनम वांगचुक की पत्नी — अगर नेता अस्पताल में उनसे मिलने आए और संसद में शिक्षा के मुद्दे को उठाए तो वो अनशन छोड़ देंगे
में गारंटी के साथ कहता हूँ कल राहुल गांधी
पक्का मिलने जाएगा
पति-पत्नी को एहसास हो गया की इनका इस्तेमाल
राजनीतिक दल एजेंडे की रोटियां शेकने कर रहे थे
क्योकि आंदोलन की स्क्रिप्ट कोई ओर लिख रहा था
जबकि तालियां कोई और बटोर रहा था 😂😂
जिन्हें लगता था कि उपद्रव और अराजकता से वे कानून से बच निकलेंगे, उन्हें योगी आदित्यनाथ जी के शासनकाल ने साफ संदेश दे दिया है अब हर उपद्रवी को उसके किए का हिसाब चुकाना पड़ेगा।
पहले जहां माफिया और अपराधी खुलेआम कानून को ठेंगा दिखाते थे, आज वही तत्व या तो सुधर चुके हैं या सलाखों के पीछे हैं। यह बदलाव किसी संयोग का नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सख्त नीति का परिणाम है।
सम्भल सहित प्रदेश के हर जिले में अब प्रशासन की पकड़ मजबूत है। जो भी सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करता है, उसके खिलाफ तुरंत और निर्णायक कार्रवाई होती है बिना किसी भेदभाव के।
यही है असली "ठोक दो" नीति का सही अर्थ अपराध पर सख्ती, कानून का राज। जय उत्तर प्रदेश 🚩✨
#Sambhal #ViksitSambhal #ViksitUttarPradesh #Development #YogiAdityanath #YogiSarkar #CMYogi #UttarPradesh #JanKalyan #BulandVikas
भारत में एनजीओ का खेल?
दुनिया में सबसे ज्यादा NGO भारत में लगभग 37 लाख NGO है…
37 लाख NGO लगे है, भारत का विकास रोकने और सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने में???🔥🤬
भारत विरोधी गैंग के पीछे कौन है?
डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को रोकने वाले कौन है?
बढ़ते भारत के पैरों में जंजीर बांधने की साजिश: गुजरात में सरदार सरोवर बांध बन रहा था, मेघा पाटकर जैसे लोगों ने नर्मदा बचाओ आंदोलन शुरू कर दिया।
विरोध इतना बढ़ा कि ऑस्ट्रेलिया की कंपनी वापस चली गई, विश्व बैंक ने इस योजना से अपने हाथ पीछे खींच लिए। 1993 में गुजरात सरकार ने बांड जारी किया।
गुजरात के लोगों ने अपने गहने बेचकर, अपनी बचत के पैसे लगाकर यह बांड खरीदे। इस बांड के पैसे से फिर डैम का निर्माण हुआ।
सरकार को इस बांड से 256 करोड़ रुपए मिले थे। यही सरदार सरोवर बांध के कारण आज 131 शहरों और 9633 गांवों की प्यास बुझाई जा रही है। गुजरात में कच्छ और सौराष्ट्र का सूखा खत्म हो गया है।
जंतर मंतर की नौटंकी के बीच एक बात ठीक हो गयी कि शरद पवार और एमके स्टालिन लगभग NDA मे शामिल हो गए।
NDA का असली नंबर भी आपको इस बिल पर पड़ने वाले वोटस से मिल जाएगा, इंडी गठबंधन की तीन ही सबसे बड़ी ताकत थी शरद पवार, नीतीश कुमार और ममता बनर्जी। नीतीश साथ है, ममता समाप्त हो चुकी, उसने जो सांसद जिताये थे वे बीजेपी के साथ है ऐसे मे सिर्फ शरद पवार बचे थे और ये आखिरी स्तम्भ भी गिर गया।
मोदी जी का इंस्टा पेज 100 मिलियन पार हो गया, जंतर मंतर की नौटंकी का कोई असर जमीन पर तो नहीं है। निजी रूप से मेरी बहस उन्ही से हो रही है जो पहले भी बीजेपी के विरोधी थे, कोई ऐसा नए समर्थक को विरोधी बनते या मेसिव शिफ्टिंग तो कुछ है नहीं।
अन्ना हजारे का आंदोलन जिन्होंने बहुत करीब से देखा है वे समझ सकेंगे कि ये वो आंदोलन नहीं है। अन्ना हजारे के समय हमने एक सरकारी स्कूल मे जाकर आंदोलन के समर्थन मे हस्ताक्षर किये थे, उस समय शहर के लगभग सभी स्कूल के बच्चे वहाँ थे। दुकानदार अन्ना हजारे के बोर्ड बाहर लगाकर बैठे थे। सेना के पूर्व अधिकारी, जज और अफसर भी उसका हिस्सा थे।
बड़ी बात ये थी कि अन्ना हजारे के समय हर राज्य की राजधानी मे एक जंतर मंतर चल रहा था, जो पारा दिल्ली मे था वही भोपाल और जयपुर जैसी जगहों मे था। CJP ज़ब से बनी है लोग तब ही से बोल रहे है कि ये अरविन्द केजरीवाल द्वारा प्रायोजित है, लेकिन इसमें राजनीति या लेफ्ट विंग का प्रत्यक्ष सबूत कुछ नहीं था।
सोनम वांगचुक नाम का तोता ज़ब मरने लगा तो सबको बिल से बाहर आना पड़ा, इस आंदोलन मे अब जो है विपक्ष और वामपंथ ही है, समर्थक भी वे ही है जो हर मोदी विरोधी मुहीम मे समर्थन करते है।
ना कुछ नया है ना कुछ बहुत पुराना, जैसे किसान आंदोलन किसानों का नहीं था, खिलाड़ियों का आंदोलन खिलाड़ियों का नहीं था वैसे ही ये छात्र आंदोलन छात्रों के अलावा शेष सभी का है।
अन्ना आंदोलन के समय जंतर मंतर भरा हुआ था, खुद कांग्रेस के घटक दल उसके विरुद्ध होने लगे थे। सुषमा स्वराज उन दिनों नेता विपक्ष थी, उन्होंने बीजेपी को अन्ना आंदोलन से दूर रखा था क्योंकि दूर की सोची भी थी। मोहन भागवत ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी बल्कि एक रणनीति के तहत गुजरात के विकास का मॉडल प्रचारित करवा दिया था।
ये वो दौर था ज़ब नरेंद्र मोदी एक विकल्प बनकर उभरने लगे थे, RSS-BJP ये बताने मे जुट गए थे कि उनके पास एक आदर्श राज्य गुजरात है जहाँ हिन्दू सुरक्षित है और विकास भी चहुमुखी है। BJP के अंदर जो मर्जी भीतरघात था मगर RSS स्पष्ट था कि अब आडवाणी को जाना होगा।
उन दिनों सोशल मीडिया नया नया था और CAG रिपोर्ट्स के बारे मे लोग जानते नहीं थे इसलिए सुषमा स्वराज जी ने देश भर मे पेम्पलेट बटवाकर कांग्रेस की चूले हिला दी। अन्ना हजारे के आंदोलन से केजरीवाल भी जन्मा, यदि उसने 2013 मे कांग्रेस से गठबंधन ना किया होता तो आज स्थिति बीजेपी के लिए उतनी सहज ना होती।
अन्ना हजारे का आंदोलन किसी ने भी फंड किया हो मगर वो आक्रोशित जनता की आवाज थी, ये नंबर मे भी दिखा 2009 मे कांग्रेस का वोट प्रतिशत 28% के करीब था जो 2014 मे गिरकर 19% तक पहुँच गया। ये ऑर्गनिक वोटस टूटे थे, कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव तब ही हारने शुरू कर दिये थे।
तब से आज मे जमाना बदल गया है, उस समय लोग हस्ताक्षर करने किसी केंद्र पर जाते थे अब इन्हे लग रहा है कि मेटा एड्स चला देने से आंधी आ जाएगी। जिन लोगो को हम सालो से बीजेपी के विरोध मे देख रहे है वे ही बोल रहे है कि अब परिवर्तन आएगा। अरे भाई परिवर्तन वो तय करता है जो बदल रहा हो।
ये एक ही युद्ध है जिसे कारण बदल बदल कर लड़ा जा रहा है, भविष्य मे फिर कोई ऐसी ही एक नौटंकी खड़ी करेंगे और सत्ता पक्ष का ही काम आसान करेंगे। कुणाल, अरुनधति और अरविन्द केजरीवाल जैसे लोगो का शुक्रिया बनता है क्योंकि उनकी उपस्थिति से अब ये कोई जन आंदोलन रहा नहीं।
ये अपने अंत के मुहाने पर खडे वामपंथ और सत्ता के शिखर पर बैठे दक्षिणपंथ की एकतरफा लड़ाई है। 20 जुलाई के लिए अपना दिमाग आप तैयार रखिये, ये लोग आत्मदाह जैसा कोई षड़यंत्र भी रच सकते है। पुलिस के डंडो से कौन कैसा अपाहिज होगा, कौन जियेगा कौन मरेगा ये सब स्क्रिप्टेड है।
ये आंदोलन वामपंथ की एक आखिरी उम्मीद है वही दक्षिणपंथ के लिए एक टेस्ट है। यदि सत्ता पक्ष इसे क्रूरता से कुचल दे तो जो तानाशाही हम सभी चाहते थे ये उसी का औपचारिक आगाज होगा। ये आंदोलन तो नहीं मगर इसका आउटकम अन्ना हजारे आंदोलन जितना ही कीमती होगा।
🌹🌹 ॐ श्री महाकालेश्वराय नमः 🌹🌹
स्वयंभू दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग राजाधिराज मृत्यलोकाधिपति भूतभावन श्री अवंतिकानाथ बाबा महाकाल का आज पावन दिव्य भस्म
आरती श्रृंगार दर्शन कण कण में महादेव बाबा कृपा बनी रहे 🙏🙌 जय श्री महाकाल 🌹 🌹
मृत्युंजय तिवारी राजद के सबसे मुखर और प्रखर प्रवक्ता थे। पार्टी में बार बार अपमान से दुखी होकर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
हर बात में ED CBI को दोष देने के बजाय बेहतर हो कि विपक्षी पार्टियां चिंतन करें, कहीं तो कुछ चूक हो रही है उनसे।