बौद्ध सभ्यता 8000 साल से अधिक प्राचीन सभ्यता है.
सिंधु घाटी के लोग द्रविड़ थे. सिंधु घाटी की सभ्यता द्रविड़ों की बौद्ध सभ्यता थी. शुरुआती बुद्धों के नाम द्रविड़ नाम हैं.
ईसा पूर्व वैदिक सभ्यता या संस्कृत भाषा का कोई पुरातात्विक प्रमाण नही है. संस्कृत भाषा का पहला शिलालेख 12वीं शताब्दी में मिलता है.
महान सम्राट असोका ने अखंड भारत का निर्माण किया. भारत को अखंड रखना हम सबकी जिम्मेदारी है. हम लोग जाति वर्ण अव्यवस्था को कमजोर कर,
HINDU DHARAM को मजबूत कर सकते हैं. जहां कोई बड़ा या छोटा ना हो. जाति ने देश और धर्म कमजोर किया है.
जब तक जाति रहेगी, जब जाति का घमंड रहेगा तब तक आरक्षण रहेगा, आरक्षण की सीमा उखाड़ फेंकना होगा, निजी क्षेत्र में लागू करना होगा. जाति जनगणना कराकर उन जातियों को बेनकाब करना होगा जिनका संसाधनों पर ओवर रिप्रजेंटेशन है.
बाकी क्या है, कुछ आप भी बताएं मनुवाद का वायरस को कैसे खत्म किया जाए ?
कल SC-ST-OBC एकता देखने को मिलेगी सुप्रीम कोर्ट के sc st आरक्षण मे वर्गीकरण के खिलाफ कल भारत बंद का आह्वान किया है।
कुछ गोडसे के भक्त भारत बंद नही होने का ट्रेंड करवा रहे है सुन लो कितना कुछ कर लो कल शांतिपूर्ण भारत बंद होगा।
#21_अगस्त_भारत_बंद_रहेगा#कल_भारत_बंद_नहीं_होगा
मणिपुर की सड़कों पर निर्वस्त्र महिलाओं घुमाया गया और हाथरस UP में रात के अंधेरे में जलाई जा रही बेटियों का पूजारी कौन..?
“बहन बेटियों को बलिदान नहीं सुरक्षा चाहिए!”
#मोदी_भगाओ_देश_बचाओ#FalseStatementOfModi
क्या हमने कभी सोचा है कि गरीब कौन हैं? कितने हैं और किस स्थिति में है? क्या इन सभी की गिनती ज़रूरी नहीं?
बिहार में हुई जातिगत गिनती से पता चला कि गरीब आबादी के 88% लोग दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज से आते हैं।
बिहार से आए आंकड़े देश की असली तस्वीर की एक छोटी सी झलक मात्र हैं, हमें अंदाज़ा तक नहीं है कि देश की गरीब आबादी किस हाल में जी रही है।
इसीलिए हम दो ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहे हैं - जातिगत गिनती, आर्थिक मैपिंग, जिसके आधार पर हम 50% की आरक्षण सीमा को उखाड़ कर फेंक देंगे।
यह कदम देश का X-Ray कर सभी को सही आरक्षण, हक़ और हिस्सेदारी दिलाएगा। इससे न सिर्फ गरीब के लिए सही नीतियां और योजनाएं बनाई जा सकेंगी बल्कि उन्हें पढ़ाई, कमाई और दवाई के संघर्ष से उबार कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा भी जा सकेगा।
इसलिए उठो, जागो और अपनी आवाज़ उठाओ, जातिगत गिनती तुम्हारा हक़ है और यही तुम्हें मुश्किलों के अंधेरों से निकाल कर उजालों की ओर ले जाएगी।
गिनती करो हमारा नारा है, क्योंकि गिनती ‘न्याय की पहली सीढ़ी’ है।
#GintiKaro
नरेंद्र मोदी ने ‘चंदे के धंधे’ को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉण्ड का सच जानना देशवासियों का हक़ है, तब SBI क्यों चाहता है कि चुनाव से पहले यह जानकारी सार्वजनिक न हो पाए?
एक क्लिक पर निकाली जा सकने वाली जानकारी के लिए 30 जून तक का समय मांगना बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है।
देश की हर स्वतंत्र संस्था ‘मोडानी परिवार’ बन कर उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगी है।
चुनाव से पहले मोदी के ‘असली चेहरे’ को छिपाने का यह ‘अंतिम प्रयास’ है।