मैं मरघट की हूं राख पड़ी , तुम शिव के भस्म श्रृंगार।
मैं पत्थर नदियों के तट की, तुम शालिग्राम हो उदार।
मैं मरुस्थल की घास समान, तुम्हीं तुलसी हो जगतार।
मैं विरहा व्याकुल मीरा सम, तुम राधे दिल की पुकार।
प्रज्ञा
@DrKumarVishwas@ManojTiwariMP@ChanchalMahour@kavitaaGhar@kavishal
@SrBachchan मैं मरघट की हूं राख पड़ी , तुम शिव के भस्म श्रृंगार।
मैं पत्थर नदियों के तट की, तुम शालिग्राम हो उदार।
मैं मरुस्थल की घास समान, तुम्हीं तुलसी हो जगतार।
मैं विरहा व्याकुल मीरा सम, तुम राधे दिल की पुकार।
प्रज्ञा पाण्डेय
हर हर महादेव 🙏🏻😊