DELHI POLICE - DOOB MARO 😡
This video makes my blood boil.
Look how these Goons are harassing this woman journalist. And so many police personnel are standing nearby , not doing anything.
She was brave enough to fight for herself but see how there is no BNSS 163 for these people !
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
चौधरी चरण सिंह जी के सम्मान को नेताजी ने सिर्फ शब्दों में नहीं, संस्थाओं और फैसलों में भी उतारा है - मेरठ विश्वविद्यालय को उनके नाम पर कर किसान-नेता की स्मृति को स्थायी बनाया और लखनऊ एयरपोर्ट को उनके नाम पर करने का प्रस्ताव रखा।
अपने पहले मुख्यमंत्रित्व काल में विधान भवन के सामने चौधरी जी की आदमकद प्रतिमा की स्थापना की।
चौधरी चरण सिंह जी का सपना था-किसान समृद्ध हो, गांव मजबूत हों और देश की तरक्की का आधार खेत-खलिहान बने। नेताजी ने इस विचारधारा को केवल सम्मान नहीं दिया, बल्कि उसे अपनी राजनीति का आधार बनाया और चौधरी साहब के नाम पर संस्थाओं को पहचान दी।
आज भाजपा चौधरी साहब का नाम तो लेती है, पर उनके किसान-केंद्रित विचारों पर चलने से क्यों बचती है?
समाजवादी पार्टी का संकल्प है-किसान सम्मान, गांव की खुशहाली और सामाजिक न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ना।
राम जी से घात का पैसा
धर्म-दान पात्र का पैसा
भाजपा के पाप का पैसा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा नहीं फलेगा
ज़्यादा दिन नहीं चलेगा
जो लेगा ~ उसको पाप लगेगा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
तो समझे…
जब भाजपा से कोई आए
पैसे का लालच दिखलाए
तो बैठाके पूछो क्यों चुराया
मंदिर का मान क्यों गिराया
कहना
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
तो समझे…
जिस पैसे से पड़ेगा पाप
उसको नहीं लगाना हाथ
वरना लग जाएगा श्राप
पाप कर देगा सब नाश
इसीलिए
राम जी से घात का पैसा
धर्म-दान पात्र का पैसा
भाजपा के पाप का पैसा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यालय आए सभी आगंतुकों, कलाकारों, प्रतिभावान बच्चों के साथ-साथ सभी सासंदों, विधायकों, पार्षदों, प्रधानों, पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों और मीडियाकर्मियों का अभिनंदन!
इस अवसर पर जिन लोगों ने विविध भेंट देकर, पार्टी के प्रति आदर और स्नेह प्रकट किया है, उन सबका हृदय से सम्मान और दिल से शुक्रिया!
रियल एस्टेट के बिजनेस में तीन चीजें मायने रखती है।
पहली "लोकेशन"
दूसरी.. "लोकेशन"
और तीसरी?
लोकेशन !
एशिया की सबसे शानदार लोकेशन आज के दिन पाकिस्तान के नाम हुई थी। एक ऐसा चौराहा, जिससे गुजरना आधी दुनिया की मजबूरी है। क्येाकि सेंट्रल एशिया के प्लेन्स और समुद्र के बीच सबसे छोटा रास्ता - पाकिस्तान है।
चीन और तिब्बत के बड़े पूर्वी इलाकों के लिए नजदीकी रास्ता - पाकिस्तान है।भारत और अरब दुनिया, याने आगे यूरोप के बीच -पाकिस्तान है।
इस्लामिक देशों के बीच सबसे नया उपजा, याने उसके एतिहासिक सामाजिक बैगेज से फ्री, देश कोई है, तो पाकिस्तान है।
सूखे रेगिस्तानों से अलग, हराभरा, नदियों, पहाड़ों, खनिज से भरा देश पाकिस्तान है। एशिया के सबसे खूबसूरत पहाड़, सबसे पुरानी सभ्यता, और बहुरंगी ट्राइबल कल्चर का देश पाकिस्तान है।
न बेहद बड़ा, न बेहद छोटा देश, न बड़ी न छोटी पॉपुलेशन.. एक परफेक्ट देश पाकिस्तान है।
मगर ठहरिये।
परफेक्ट ..?? न, न
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भारत के एक विजनरी लीडर ने अपनी जनता से कहा था- "धरती, नदी, नाले, पहाड़, लोकेशन , इलाका , सीमाएं, सेनाएं देश नही होते।
"देश है उस पर रहने वाली जनता"
तो जनता, जनमानस तय करता है कि अपनी लोकेशन, संसाधन, सेना, युवा, बच्चे, महिलाओं और पॉपुलेशन को किस दिशा में लेकर जाना है। उस नेता ने जो धारा रची, भारत विज्ञान व्यापार और विकास की धारा में गतिमान हुआ।
पाकिस्तान की किस्मत मे वह नेता न था।
जो नेता मिलेे, उनमे एक जिद थी।
जिस बैगेज से फ्री होकर, एक नए देश को एक नया जन्म मिला था, उस बैगेज को ढोने की जिद, खुद को कठमुल्ला राष्ट्र बनाने की जिद,
अपने बच्चों को इंसान की जगह, हथियार बनाने की जिद ...
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जिद की जगह, नजरिया खुला रखा होता, तो हम कैसा पाकिस्तान देखते?? क्या शान्ति और सुविधाओं से युक्त पाकिस्तानी पहाड़ियां, स्विट्जरलैंड से कम होती? क्या गिलगित बाल्टिस्तान, नीलम वैली, हुंजा जैसे इलाकों में पूरी दुनिया के टूरिस्ट झूम न पड़ते।
क्या ग्वादर- कराची जैसे कई बंदरगाह, सेंट्रल एशिया के अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान और पूर्वी चीन के आयात निर्यात का बिंदु, और नोट गिनने की मशीन न बन जाते?
क्या ये सारे देश, अपने फायदे के लिए पूरे पाकिस्तान में सड़कों, रेलों हवाई अड्डो का जाल न बिछाते? क्या सेंट्रल एशिया और ईरान के बीच तेल-गैस की पाइपलाइन, आवागमन सरल न होता। क्या इसकी कीमत उसे न मिलती।
ओह, उसे भारत से दुश्मनी निबाहनी थी?
तो बताईये, मजबूत पाकिस्तान के हाथ भारत की गर्दन न होती। क्या दुनिया उसे सुरक्षित, शांत, फायदेमन्द बनाए रखने को भारत की मुश्कें न बांध देती ??
एक शान्त, कास्मोपोलिटन पाकिस्तान ने कठमुल्लेपन और हिंदुस्तान से नफरत पर नियंत्रण रखा होता, अगर खुद में और आसपास के देशों में आग न लगाई होती, तो सत्तर साल में वह एशिया का यूरोप होता। सबसे ताकतवर इस्लामी राष्ट्र और बड़ी वैश्विक ताकत होता।
वो एशिया का प्रमुख चौराहा होता,
जहां उसकी खानदानी दुकान होती।
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नही, मुझे पाकिस्तान की चिंता नही है। मुझे हिंदुस्तान की चिंता है। हम दुनिया के सामने जो है, वो इसलिए है, क्योकि हम पाकिस्तान नही हुए।
हमने शांति, खुलेपन, काम धंधों, दोस्ती, मुस्कान को तरजीह दी। हमने बंदूकों, लाठियों और चाकुओं को कभी तरजीह न दी थी। मुठ्ठी भर हरे संतरे कठमुल्ले, जो हमें भड़काते थेे, उन्हें इग्नोर किया।
इस "इग्नोर" करने को "तुष्टिकरण" मानकर, अब पूरी उर्जा इसी पर झोंक रहे है। कौम खतरे मे होने का जो नारा पाकिस्तान दशको पहले लगाकर ढलान पर फिसला, वह नारा हमने 8 साल पहले अंगीकार किया।
सात साल पहले आपको बताया गया कि सत्तर साल में कुछ नही हुआ। आज शायद घटती समृद्धि और बढ़ते पागलपन के बीच अहसास कर सकें कि उन सत्तर साल में क्या क्या हुआ। कितने सेक्टर्स में हम अग्रिम पंक्ति में थे, कितने सेक्टर्स में फिसल और पिछड़ गए हैं।
सच ये है कि, इन सात सालों में हम पाकिस्तान बनने की यात्रा शुरू कर चुके हैं।
पाकिस्तान से लडने की हुनक मे पाकिस्तान की सारे कुटैव, अपने जनजीवन मे उतार रहे हैं। उससे भी बेहतर का्पी बन रहे हैं।
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इतिहास यही लिखता है कि, कोई कौम क्या हो गयी। वह ये नही लिखता की वो कौम क्या हो सकती थी। कौम और देश का मुस्तकबिल तो उस दौर में जी रही पीढ़ी की प्राथमिकतायें तय करती हैं।
कभी सोचिये कि हमारी पीढ़ी का इतिहास कैसा लिखा जाएगा।
क्या हम लोग "हिंदुस्तान का पाकिस्तानीकरण" करने वाली पीढ़ी के तौर पर याद किये जायेंगे।
सोचिये।
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खुद को बदलिए, आसपास लोगो को समझाइए।
तुरंत और अभी, यदि आपको भी पाकिस्तान की नही...हिन्दुओ की,
और उनके हिंदुस्तान की चिंता है.
साभार: मनीष सिंह
ये जो श्री केदारेश्वर महादेव का धाम है
यहाँ सबको मिलता ‘मनचाहा वरदान’ है
ये उस ‘शिवशक्ति अक्ष रेखा’ पर विद्यमान है
जिस पर ‘शिव जी’ के बाक़ी सारे धाम हैं
यहाँ मंदिर के आगे ‘नंदी’ विराजमान हैं
प्रवेश द्वार पर ‘प्रभु राम और श्याम’ हैं
अंदर चमत्कारी ’शालिग्राम’ हैं
जिनके दर्शन से बनते सब भाग्यवान हैं
ये जो श्री केदारेश्वर महादेव’ का धाम है
यहाँ सबको मिलता ‘मनचाहा वरदान’ है
यहाँ आने की जो मन में लेता ठान है
उसका उस पल से ही होता उत्थान है
यहाँ आकर बनते सबके बिगड़े काम हैं
यहाँ ’शंकर जी’ करते सबका कल्याण हैं
सबकी मनोकामनाओं का रखते ध्यान हैं
ये सबकी इच्छापूर्ति का ’परम स्थान’ है
ये जो श्री केदारेश्वर महादेव’ का धाम है
यहाँ सबको मिलता ‘मनचाहा वरदान’ है
श्रावण मास सबके लिए सर्वथा सर्व शुभ हो!
सबके लिए सावन सर्वथा शुभ हो!
जंतर मंतर प्रोटेस्ट समाप्त!
सरकार ने सारी मांग मांगी!
बड़ी जीत के साथ देश का पहला जेन जी आंदोलन सफलतापूर्वक समाप्त!
यह आंदोलन इतिहास में दर्ज होगी और सालों तक इसके बारे में बहुत फक्र से सुनाई जाएगी!
ख़ुशी है की मैं इसके सही साइड से जुड़ा रहा! बतौर नागरिक और मीडिया कर्मी भी! आत्म संतुष्टि!!
है बहुत अँधियार अब सूरज निकलना चाहिए
जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए
रोज़ जो चेहरे बदलते हैं लिबासों की तरह
अब जनाज़ा ज़ोर से उन का निकलना चाहिए
अब भी कुछ लोगो ने बेची है न अपनी आत्मा
ये पतन का सिलसिला कुछ और चलना चाहिए
फूल बन कर जो जिया है वो यहाँ मसला गया
ज़ीस्त को फ़ौलाद के साँचे में ढलना चाहिए
छीनता हो जब तुम्हारा हक़ कोई उस वक़्त तो
आँख से आँसू नहीं शो'ला निकलना चाहिए
दिल जवाँ सपने जवाँ मौसम जवाँ शब भी जवाँ
तुझ को मुझ से इस समय सूने में मिलना चाहिए
#गोपालदास_नीरज • #संकलन
इस न्याय की लड़ाई में जो भी छात्र, नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और समर्थक सच और न्याय के पक्ष में निडर होकर खड़े हुए हैं, उन सभी का हृदय से आभार। किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके वे लोग होते हैं जो बिना किसी निजी स्वार्थ के अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं और लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखते हैं।
इतिहास केवल बड़े नेताओं को ही नहीं, बल्कि उन अनगिनत नागरिकों को भी याद रखता है जिन्होंने कठिन समय में सच का साथ दिया, अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया और न्याय की लड़ाई को अपनी उपस्थिति, अपने साहस और अपने समर्थन से मज़बूत बनाया।
लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। जब तक सच बोलने वाले लोग मौजूद हैं, तब तक न्याय की उम्मीद भी ज़िंदा रहेगी।
#Justice #Democracy #Students #StandForTruth @dimpleyadav@yadavakhilesh@priyankagandhi@RahulGandhi
जो अपने वादे से मुकर जाते हैं
वो आँखों से ख़ुद ही उतर जाते हैं
जब किसी को उसके अच्छे के लिये मना करिये और वो आपको तमाम तरह से भरोसा दिलाये कि मैंने भी ऐसा नहीं किया वैसा नहीं किया और साफ़ साफ़ झूठ बोल जाए तो समझो वो निगाह से उतार देने वाला काम किया है।
जब कोई बड़ी बड़ी बातें कर जाए और समय आने पर केवल अपने फ़ायदे के बारे में सोचे, आपको ऐसे मौक़े पर किनारे करके निकल जाए.. ऐसा एक से अधिक बार करे तो निश्चित रूप से वो नज़र से उतार देने के लायक है।
जब कोई मोरल की बात तो करे, ख़ुद को सबसे अच्छा दिखाए लेकिन अस्ल में वो बस मौक़ापरस्त दिखाई पड़े तो फिर वो ठीक इंसान नहीं है।जो आपके बने में साथी हो और बुरे में पीठ दिखा दे उससे भी वास्ता नहीं रखना चाहिए, निगाह से उतारकर फेंक दीजिये।
~अश्विनी यादव
ये विवशता है स्वरों की, मौन की दुश्वारियां हैं
बात कहनी है नदी की, कंठ में चिंगारियां हैं
आंख का टुकड़ा भले ही, प्यास की कह ले कहानी
पर हमें कहनी पड़ेगी आज लहरों की रवानी
आग पीकर भी हमें ये पीढ़ियों को है बताना
बादलों की देह नम है, हर कुएं की कोख पानी
पीर बिल्कुल मौन रहना,बावली! अब कुछ न कहना
आज आंसू के नगर में, पर्व की तैयारियां हैं
छिन गई हमसे धरा, फिर भी हमें आकाश रचना
दृश्य भर का पात्र होकर, है हमें इतिहास रचना
ये हमें वरदान भी है, ये हमें अभिशाप भी है
पीर का अनुप्रास जीकर, है मधुर मधुमास रचना
हम नियति को मानते हैं, क्योंकि हम ये जानते हैं
एक पतझर, एक सावन की कई लाचारियां हैं
हम उजाला बांटते हैं, इसलिए सूरज निगलते
मोम सा दिल है हमारा, हैं तभी पत्थर पिघलते
दे न दे कोई हमारा साथ पर हमको पता है
कल वही होगा विजयपथ, हम कि जिस पर आज चलते
हर जतन करना पड़ेगा, हां! हमें लड़ना पड़ेगा
विषधरों के पास जब तक चन्दनों की क्यारियां हैं
#मनीषा_शुक्ला • #संकलन