समाजवादी पार्टी प्रवक्ता : 'अनुराग भदौरिया' अयोध्या हम जीत गए, भगवान राम हमारे साथ है.
BJP प्रवक्ता प्रेम शुक्ला जी : जब राम जी अयोध्या गए थे, तो मंथरा 14 वर्षों तक भी अयोध्या में ही रही थी, पर इस��े अयोध्या मंथरा की नही हो गई थी। 😂
*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्���र, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महारा���्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत ��र्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं ���रते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के ���ुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मा��ग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई ���ई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुर��ध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा ���ंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है ��ह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
प्रदेश सरका�� के वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ ठीक पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन हुये लिखित समझौते का उल्लेख करते हुये बिजली कर्मियों ने आज सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि प्रदेश सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज की ही तारीख को 06 अक्टूबर, 2020 को वित्त मंत्री एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री से वार्ता के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते के पहले बिन्दु में ही लिखा गया है -"विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार हेतु कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाह��� की जायेगी। कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।"
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ किए गये लिखित समझौते का खुला उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा ऐलान किए जाने का दुष्परिणाम यह है कि प्रदेश के ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी विगत 314 दिनों से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने हेतु विवश हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि कि बिजली कर्मी सदा ही संघर्ष से पहले सुधार को महत्व देते हैं किंतु बड़े अफसोस की बात है कि 06 अक्टूबर 2020 को हुए समझौते के अनुरूप पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने सुधार पर आज तक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से कोई वार्ता नहीं की। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने समझौते के ���क महीने के अंदर ही पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को सुधार का प्रस्ताव दे दिया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुए समझौते का सम्मान न करने से बिजली कर्मियों में अनावश्यक रूप से अविश्वास का वातावरण बन रहा है जो सरकार और प्रबन्धन दोनों के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
समझौते के ठीक पांच साल पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों में समझौते की प्रतियां लेकर व्��ापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने नारे लगाये - " समझौते का सम्मान करो, निजीकरण वापस लो।"
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विजया दशमी के पहले बोनस देने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन की बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी : निजीकरण के लिये उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां करने का आरोप
विद्युत कर्मचारी स��युक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश के अनुसार नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति में लगे बिजली अभियंताओं और कर्मियों को विजया दशमी के पूर्व बोनस देने के बजाय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की पूरी सूची जारी कर ���नके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति तत्काल मांगी गई है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियंताओं को जबरन सेवा निवृत्त करना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 सितंबर को जारी किए गए पत्र में तीन दिन के अंदर 27 सितंबर तक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की अद्यतन स्थित मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पदों की पदोन्नतियां के लिये चयन पहले ही ��ो चुका है। ऐसे में सभी अधीक्षण अभियंताओं और सभी मुख्य अभियंताओं की सूची जारी कर उनके बारे में अनुशासनामक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति मांगने के पीछे जबरन सेवा निवृत्ति देना ही एकमात्र उद्देश्य दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि शक्ति भवन के कॉरिडोर से मिल रहे समाचारों के अनुसार निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों की बड़ी पैमाने पर जबरन सेवा निवृत्ति कर छ���नी की जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन विगत कई महीनों से लगातार बिजली कर्मियों का अलग-अलग तरह से उत्पीड़न कर रहा है। अभी ��ी हजारों बिजली कर्मचारियों को फेशियल अटेंडेंस के नाम पर 3 माह से रुका वेतन नहीं दिया गया। बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों को दूर दराज स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, हजारों संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर निकाला गया और अब जबरन सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं किंतु वह आम जनता को किसी प्रकार की तकली�� नहीं होने दे रहे हैं बिजली कर्मी नवरात्र, दशहरा और दीपावली पर जनता को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे, यह संघर्ष समिति का निर्णय है ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजीकरण हेतु की जा रही दमनकारी नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज करने का फैसला दशहरे के बाद लिया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 307 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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#UPCM@myogiadityanath जी नव���ात्रि त्योहार पर क्या हिन्दू बिजली कर्मचारी परिवारों को पूजन पाठ का अधिकार नही है
@dmbas_ संज्ञानि�� हो कि ऐसे तानाशाही आदेश त्योहार के दिनों में औद्योगिक अशांति को निमंत्रण दे रहे है । प्रशासन द्वारा स्थानीय अवकाश घोषित है।
@UppclMedia @rvppksbasti
निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आंदोलन: आन्दोलन के लगातार 300 दिन पूरा होने पर बिजली कर्मियों ने भरी हुंकार : प्रान्त भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन : आरए��पी डॉक्यूमेंट गोपनीय रखने के समाचार से बिजली कर्मियों में उबाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि यदि जोर जबरदस्ती करके निजीकरण का टेंडर निकाला गया तो टेंडर निकलते ही बिजली कर्मी समस्त जनपदों में सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी ।
निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 300 दिन पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सामूहिक जेल भरो सत्याग्रह प्रारम्भ करने का संकल्प लिया।
राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज शक्ति भवन मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कहा कि बिजली कर्मी घाटे के झूठे आंकड़े,दमन और उत्पीड़न के नाम पर किसी भी स्थिति में निजीकरण की साजिश कामयाब नहीं होने देंगे।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यह विदित हुआ है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच यह तय हुआ है कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाय। इसके अंतर्गत पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के पांच निगम बनाकर पांच अलग अलग टेंडर निकाले जाएंगे जिनमें एक लिंक दी ज���एगी। लिंक तभी खुलेगी जब टेंडर डालने वाली निजी कंपनी पांच लाख रुपए का भुगतान करें साथ में यह शपथ पत्र भी देना होगा की लिंक खुलने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई कंपनी सार्वजनिक नहीं करेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ नियमित मुलाकात हो रही है और डिस्कॉम एसोशिएशन निजीकरण के मामले में बिचौलिए की भूमिका का निर्वाह कर रही है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच में आ ���ाने के बाद से निजीकरण के मामले में लेन देन की चर्चा भी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है।ऐसे में टेंडर की पूरी प्रक्रिया और आरएफपी डॉक्यूमेंट को गोपनीय रखना बहुत गंभीर बात है और इस तरह सारी प्रक्रिया में ही भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो संभवत: यह देश के इतिहास ���ें पहली बार होगा की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को इतने गुपचुप ढंग से बेचा जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि आरएफपी डॉक्यूमेंट को छिपाना बहुत ही गंभीर मामला है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 28 नवंबर से लगातार चल रहे आंदोलन के आज 300 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों औ�� अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि वे किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर निजीकरण के विरोध में अपना आन्दोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में हुई विरोध सभा को शैलेन्द्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, अजय कुमार, बलबीर सिंह यादव, महेन्द्र राय, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद,श्री चन्द ,दीपक चक्रवर्ती, मोहम्मद इलियास , प्रेम नाथ राय, सरजू त्रिवेदी ने मुख्यतया सम्बोधित किया।
राजधानी लखनऊ के अलावा वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
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हम सभी के प्रेरणास्रोत, करोड़ो स्वयंसेवको के मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूजनीय मोहन भागवत जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
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निजीकरण के पहले वर्टिकल सिस्टम के नाम पर हजारों पदों को समाप्त ���र बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल सिस्टम लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप��त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समा��्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घट���कर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिस प्रकार मध्यांचल में,लेसा और केस्को में और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में हजारों मत समाप्त किये जा रहे हैं उससे बिजली कर्मियों की यह आशंका और बलवती हो गई है की संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण किया जा जाने वाला है। पूर्वांचल और ���क्षिणांचल विद्युत वितरण निगम तो शुरुआत मात्र है। इससे बिजली कर्मियों का गुस्सा और बढ़ गया है।
निजीकरण हेतु किये जा रहे उत्पीड़न और पदों को समाप्त करने की कार्यवाही के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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