25000 निर्दोष संविदाकर्मियों की छटनी
फेसियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती
दिन रात काम कर रहे ईमानदार बिजली कर्मचारियों का वेतन निर्गत नहीं किया जा रहा है तो व्यवस्था पटरी पर रहे कैसे ?
बिजली और बिजली कर्मी दोनों ही अब राम भरोसे
@BJP4India@UPGovt@UppclMedia@uprvup@htTweets
प्रबंधन एक प्रबंधक के रूप में तो असफल रहा और अब एक मुखिया की भूमिका में भी असफल रहा।अपने परिवार के सदस्यों का पांच महीने से वेतन रोक कर "बिन वेतन दीपावली" हेतू बाध्य करना निंदनीय है ।
"धनतेरस की हार्दिक बधाई व शुभ कामनाएं ।"
@CMOfficeUP@myogiadityanath@aksharmaBharat@UPPCLLKO
@myogiadityanath@GorakhnathMndr राम राज्य में हिंदू बिजली कर्मचारियों की दुर्दशा देखिए
बस्ती के अधीक्षण अभियंता महोदय ने तानाशाही आदेश जारी कर जिले के सभी बिजली कर्मचारियों को नवरात्रि पर मां दुर्गा के पूजा पाठ से वंचित कर दिया है
@yadavakhilesh#upcm@myogiadityanath जी के शासन काल में हिंदू बिजली कर्मचारियों और जनता की दशा देखिए
नवरात्रि पर भी बिजली वसूली और डिस्कनेक्शन जैसे तानाशाही आदेश जारी कर दिए है
नवरात्रि के पावन पर्व नवमी के दिन सनातन धर्मावलंबी,अपने धार्मिक अनुष्ठान को ना कर पाए इसीलिए अधीक्षण अभियंता महोदय ने यह आदेश किया है ,माननीय मुख्य मंत्री जी,माननीय ऊर्जा मंत्री जी,उच्च प्रबंधन ऊर्जा विभाग कृपया संज्ञानित हों @CMOfficeUP@aksharmaBharat@UPPCLLKO@RVPPKSUP
#UPCM@myogiadityanath जी नवरात्रि त्योहार पर क्या हिन्दू बिजली कर्मचारी परिवारों को पूजन पाठ का अधिकार नही है
@dmbas_ संज्ञानित हो कि ऐसे तानाशाही आदेश त्योहार के दिनों में औद्योगिक अशांति को निमंत्रण दे रहे है । प्रशासन द्वारा स्थानीय अवकाश घोषित है।
@UppclMedia@rvppksbasti
#UPCM@myogiadityanath जी नवरात्रि त्योहार पर क्या हिन्दू बिजली कर्मचारी परिवारों को पूजन पाठ का अधिकार नही है
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नवरात्रि के पावन पर्व नवमी के दिन सनातन धर्मावलंबी,अपने धार्मिक अनुष्ठान को ना कर पाए इसीलिए अधीक्षण अभियंता महोदय ने यह आदेश किया है ,माननीय मुख्य मंत्री जी,माननीय ऊर्जा मंत्री जी,उच्च प्रबंधन ऊर्जा विभाग कृपया संज्ञानित हों @CMOfficeUP@aksharmaBharat@UPPCLLKO@RVPPKSUP
उपभोक्ता परिषद ने विद्युत वितरण क्षेत्रों के निजीकरण प्रस्ताव को निरस्त करने की उठाई मांग कहा आयोग द्वारा निजीकरण की कमियों पर सरकार से मांगे गए जवाब पर 90 दिन बीत जाने के बाद अब कंडक्ट आफ़ बिजनेस रेगुलेशन 2019 की धारा 51 के तहत उसे किया जाए खारिज।
उपभोक्ता परिषद ने विद्युत वितरण क्षेत्रों के निजीकरण प्रस्ताव को निरस्त करने की उठाई मांग कहा आयोग द्वारा निजीकरण की कमियों पर सरकार से मांगे गए जवाब पर 90 दिन बीत जाने के बाद अब कंडक्ट आफ़ बिजनेस रेगुलेशन 2019 की धारा 51 के तहत उसे किया जाए खारिज।
#SonamWangchuk#istandwithsonamwangchuk#सोनम_वांगचुक
सरकार को होश में रहने की बहुत जरूरत है!
क्यों बार-बार लोगों को उकसाने में लगे हो @narendramodi जी कि भारत की स्थिति भी नेपाल और बांग्लादेश जैसी हो जाएं?
हम सब अपने देश से बहुत प्यार करते हैं और कभी इस देश को झूकने नहीं देंगे
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।
बिजली के निजीकरण का विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बड़ी सभाएं कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
कोई जानकार हमें समझाएं #एशियाकप में #भारत-पाकिस्तान का मैच देखने पर
हमें #देशद्रोही कहां जाएगा या
मैच देखकर @BCCI को कुछ पैसे मिलने पर इसे #देशभक्ति कहा जाएगा
या मैच का #बायकॉट करने से हमें देशद्रोही कहा जाएगा या 26 लोगों को मारने वाले पाकिस्तानियों का बहिष्कार करने से देशभक्त
"I can’t forget the Pahalgam attack people killed after being asked their religion. And today @BCCI sells India-Pak as ‘greatest rivalry’. After Operation Sindoor, border states lived the pain yet for money, all is forgotten. HAVE SOME SHAME BCCI #BoycottINDvPAK#BoycottAsiaCup
निजी घरानों की विचार धारा द्वारा पोषित ऊर्जा प्रबंधन ने अब मनमानी पर उतारू है
उपभोक्ताओ का करोड़ों का गबन कर विभाग को घाटे में दिखाने का क्रम अभी टूटा नहीं कि ये तानाशाही निर्णय
दमन की एक इंतहा होती है और एक समय के बाद फिर डर लगना भी बंद हो जाएगा और वही से क्रांति फूटेगी ✊📣
निजीकरण के पहले वर्टिकल सिस्टम के नाम पर हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल सिस्टम लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिस प्रकार मध्यांचल में,लेसा और केस्को में और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में हजारों मत समाप्त किये जा रहे हैं उससे बिजली कर्मियों की यह आशंका और बलवती हो गई है की संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण किया जा जाने वाला है। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम तो शुरुआत मात्र है। इससे बिजली कर्मियों का गुस्सा और बढ़ गया है।
निजीकरण हेतु किये जा रहे उत्पीड़न और पदों को समाप्त करने की कार्यवाही के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
त्योहारों को देखते हुए अगले दो माह आंदोलन के साथ उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता:निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी प्रदर्शन जारी: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे त्योहारों के मद्देनजर अगले दो माह तक बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड करें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में हम शुरू से ही किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं अतः त्योहारों में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ध्यान रहे अगले दो माह पितृ पक्ष, नवरात्र, रामलीला, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे अति महत्वपूर्ण पर्व हैं।
इस बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज लगातार 283 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति ने आज सप्ताहांत में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने यूपी ट्रांस्को को स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने पर इसे प्रदेश का गौरव बताया है जो उचित ही है । तो सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की ट्रांसमिशन बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार हो रहे सुधार के बाद भी इनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? ट्रांसमिशन की तरह वितरण कंपनियां भी लगातार सुधार कर रही हैं ऐसे में इनका निजीकरण क्यों ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 23 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 32 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक सप्ताहांत संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी।
राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डी के मिश्रा जी के आकस्मिक निधन पर आज सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने सभा में 2 मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय डी के मिश्रा जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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उपभोक्ता परिषद ने कहा बाबा साहब ने 1934 में ही कहा था बिजली हमेशा सार्वजनिक क्षेत्र यानी सरकारी क्षेत्र में रहना चाहिए ऐसे में बाबा साहब के सपनों का भारत तैयार करने के लिए उनकी नीति पर चलकर प्रदेश को आगे ले जाना होगा।