जौनपुर
➡जौनपुर के रोहित यादव ने नीरज चोपड़ा को पछाड़ा
➡रोहित बने दुनिया के नंबर दो भाला फेंक खिलाड़ी
➡25 साल उम्र, देश में नंबर एक-दुनिया में नंबर दो
➡नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मिली कामयाबी
➡चैंपियनशिप के अंतिम दिन 87.05 मीटर भाला फेंका
➡जापान में होने वाले एशियन गेम्स में भी क्वालिफाई
➡14 साल की उम्र में बांस के डंडे से करते थे अभ्यास
➡वर्ल्ड रैंकिंग में श्रीलंका के थरंगा पाथिरागे पहले पर
➡नीरज चोपड़ा 85.69 मीटर के साथ चौथे स्थान पर
➡जिले के गांव अदारी डभिया के रहने हैं रोहित
#Jaunpur #NeerajChopra #SportsNews
आपकी नजर में एक लीडर कैसा होना चाहिए...❓
मेरी नजर में लीडर ऐसा होना चाहिए जो खुद भी हंसता-मुस्कुराता हो और अपने आसपास के लोगों को हंसाता हो, जनता की दुख तकलीफ में भावुक होता हो...मीडिया में उसकी हंसती मुस्कुराती तस्वीरें छपती हों।🙂
ऐसा नहीं जो हर समय गुस्से में रहता हो हर समय मारने-काटने और यमराज की बात करता हो। मीडिया में जिसकी एक ही तरह की गुस्से वाली तस्वीरें छपती हों...ऐसा नेता होगा तो उसकी लीडशिप में काम करने वाले अफसर भी वैसे ही होते जाएंगे😡
दूसरों का तो नहीं पता लेकिन कम से कम हम तो ऐसा ही लीडर चाहते हैं जिसकी बातों में सकारात्मकता झलकती हो और यूपी में फिलहाल ऐसा अखिलेश यादव ही दिखते हैं जो हंसते- मुस्कुराते हैं पढ़ाई-लिखाई और न्याय की बात करते हैं।
यूपी में अखिलेश यादव उम्मीद की तरह हैं मैं इन्हें फिर से सिर्फ इसलिए यूपी का CM बनते हुए देखना चाहता हूं जिससे हम यूपी के CM की बिना डरे आलोचना कर सकें हम यूपी के सीएम से सवाल पूछ सकें और हमें FIR का डर ना हो। मैं इसलिए चाहता हूं कि वो CM बनें जिससे जब हम यूपी वालों के साथ कुछ गलत हो तो मीडिया उसे दिखा सके मीडिया यूपी के CM से नाम लेकर सवाल पूछ सके। आज उनका जन्मदिन है तो उन्हें जन्मदिन की खूब शुभकामनाएं...🌻
बाकि आप लोग जरूर बताइए कि
आपको कैसा लीडर पसंद है क्योंकि आपकी पसंद आपके व्यक्तित्व को दर्शाती है।
अगर आप झूठ बोलने वाले नेता को पसंद करते हैं तो आप झूठे हैं आप नफरती नेता को पसंद करते हैं तो आप नफरती हैं। आप वैसा ही नेता पसंद करते हैं जैसे आप होते हैं या जैसा होना चाहते हैं और आपके बच्चे भी वैसा ही पसंद करेंगे और वैसा ही बनते जाएंगे...
चंपत राय की एक अलग दुनिया थी। जैसे कोई राजा टाइप। उनकी अपनी सेना थी जिसे निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स कहते हैं। एक करोड़ रुपया महीना और सालाना 12 करोड़ निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स को दिए जा रहे थे वो भी नंबर एक से और अकाउंट से। ये सेक्युरिटी गार्ड्स लूट के मॉल के रूट पर तैनात रहते थे। ये चढ़ावा चोरी का मामला आपको जितना सरल लगता है वो बेहद पेचीदा और साजिशों से भरा हुआ है। बहुत ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल गैंग की तरह इसे ऑपरेट किया जा रहा था।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अब 400 निजी सुरक्षाकर्मी रडार पर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा अब और बड़ा होता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। उनकी ड्यूटी, रोस्टर, CCTV फुटेज, एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद मंदिर परिसर में इतनी बड़ी संख्या में निजी गार्ड क्यों लगाए गए थे?
सूत्रों का दावा है कि जिस निजी सुरक्षा कंपनी को यह जिम्मेदारी दी गई थी, वह RSS से जुड़े बिहार के एक पदाधिकारी से संबंधित बताई जाती है, जो पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। इसी कंपनी पर ट्रस्ट हर महीने करीब 1 करोड़ रुपये खर्च करता था। यानी सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च हो रहे थे।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि चढ़ावे के आवागमन के दौरान नियमों का पालन हुआ या कुछ लोगों को बिना जांच के आने-जाने की छूट दी गई। सवाल यह भी है कि अगर दान-पात्र, गिनती कक्ष और चढ़ावा रूट पर निजी सुरक्षा तैनात थी, तो चोरी और गड़बड़ी कैसे होती रही?
अब जांच सिर्फ गिनती कक्ष तक सीमित नहीं है। बैंक नियमों के उल्लंघन, ट्रस्ट की निगरानी, निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका और करोड़ों के सुरक्षा खर्च तक सवालों के घेरे में हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में हर दिन नया खुलासा हो रहा है, और जांच अब छोटे कर्मचारियों से आगे बढ़कर पूरे सुरक्षा और प्रबंधन सिस्टम की तरफ जाती दिख रही है।
#Breakingnews | @ShriRamTeerth@Uppolice@LucknowDivision@Igrangelucknow@ayodhya_police@dir_ed@CBIHeadquarters
राम मंदिर में एक आदमी 6 महीने पहले नौकरी पाया.
फिर 2 महीने में ही 25 लाख रुपए की जमीन खरीद ली. उस जमीन पर 15 लाख लगाकर ढांचा खड़ा कर दिया.
घर में 12 लाख रुपए छिपा दिए. शराब के ठेके पर एक बार में 50 हजार उड़ा देता.
इस कर्मचारी की सैलरी बस 12 हजार रुपए थी, नाम- लवकुश मिश्रा.
ये एक कर्मचारी को लेकर 'कुछ जानकारी' है, जो खबरों में है.
असल में कितना लूटा गया है, इसका तो हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते.
जो कर्मचारी निकाले गए हैं, वो बता रहे हैं कि कई साल से ये खेल चल रहा था.
शिकायत करने पर उन्हें ही निकाल दिया गया.
और आरएसएस के खुद ही राम मंदिर आंदोलन खत्म कर दिया:
चंदा और चढ़ावा चोरी की FIR और राम मंदिर ट्रस्ट के कर्ताधर्ता चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र के इस्तीफों के बाद मंदिर के चढ़ावे में 90% की कमी आई है और रोज़ दर्शन करने वालों की संख्या कोई आधी रह गई है.
क्या ये काम कोई और कर सकता था जो आरएसएस ने कर दिया?
राम मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि ये बाबरी मस्जिद को गिरा कर सुप्रीम कोर्ट के एक बेतुके फैसले से बना.
तीस साल से भी ज़्यादा समय तक राम मंदिर आंदोलन ने देश की राजनीति को प्रभावित किया, एक लंबा और हिंसक नफ़रत का दौर चला इस आंदोलन की वजह से.
बीजेपी दो सांसद से 1989 के चुनाव में 85 पर पंहुची और फिर लगातार चुनाव जीतने का सिलसिला बना.
उत्तर भारत में चुनाव जन मुद्दों की जगह ध्रुवीकरण पर होने लगे.
विपक्षी पार्टियों को लंबे समय तक समझ में ही नहीं आया कि राम मंदिर के घोड़े पर सवार बीजेपी को रोके कैसे. उत्तर प्रदेश और बिहार से कांग्रेस का सफ़ाया ही हो गया. विपक्षी नेता ही अपने आपको बीजेपी से बड़ा हिंदू साबित करने की होड़ में लग गये. अंततः राहुल गांधी संविधान और सामाजिक न्याय के ज़रिये इस नफ़रत की राजनीति की काट निकालने में सफल हुए.
लेकिन साम्प्रदायिकता की राजनीति की चुनौती अभी भी बरकरार है, हालांकि नई पीढ़ी इसे रिजेक्ट कर रही है.
राम मंदिर में हुई प्रतिष्ठा में मोदी और मोहन भागवत सेंटरस्टेज पर थे, शंकराचार्यों ने बहिष्कार किया, साधू संतों की उपेक्षा हुई. तब साफ़ हो गया था कि ये आस्था का केंद्र न होकर पैसा उगाही और रियल इस्टेट के धंधे का जरिया बनेगा. वैसा हुआ भी. राम मंदिर एक इंडस्ट्री बन गया.
गुजराती व्यापारी वहां पहुंच गये, बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीदफरोख्त हुई, सस्ती ज़मीन खरीद महंगी बेचने का धंधा शुरू हुआ. वो सब वहाँ हुआ जिसका आस्था या आध्यात्म से कोई सरोकार नहीं है.
आरएसएस में नैतिक बल की हमेशा से कमी रही है. वो अयोध्या में भी दिखी.
राम मंदिर में वही हुआ जिस वजह से इसे बनाया गया था.
इस पूरे प्रकरण में तीन दशक का एक राजनीतिक आंदोलन खत्म हो चुका है, अब राजनीति वापिस असल मुद्दों पर लौटेगी. बीजेपी चाहे भी इस डैमेज को रिपेयर नहीं कर सकती.
राम मंदिर चंदा चोरी की ख़बर अख़बार और टीवी पर प्राथमिकता से छापी और दिखाई जा रही है।रोज़ टीवी पर बहस हो रही है।दिल्ली ख़ामोश है।योगी जी के रणनीतिकार समझा रहे है कि चम्पत राय निपट रहे है।दिल्ली को लग रहा है कि संघ और योगी जी का नुक़सान हो रहा है लेकिन ये कोई नहीं सोच रहा है कि बीजेपी भी निपट रही है !
राज शामानी के पॉडकास्ट में UPSC मेंटर अमित किल्होर आए थे. अमित किल्होर ने कहा, भारत की ब्यूरोक्रेसी सबसे भ्रष्ट है.
राज शामानी ने पूछा UPSC पास कर आईपीएस आईएएस बनने वालों के बीच भ्रष्टाचार की शुरुआत कब होती है.
अमित किल्होर ने कहा, जिस दिन UPSC का रिजल्ट लगता है, उसी दिन बिना IAS IPS IFS बने बहुत लोग लाखों करोड़ों कमा लेते हैं.
UPSC पढ़ाने वाले कोचिंग सेंटर पास होने वाले कैंडिडेट को फोन करेंगे कि आप बोले हमारे कोचिंग सेंटर से पढ़े हो. बदले में मोटी रकम मिल जाती है.
अमित किल्होर ने बताया एक राज्य में 50 IAS अफसरों ने 5-5 करोड़ की एक जगह पर जमीन खरीदी. हाईवे प्रोजेक्ट को उस जमीन के बीच से By-Pass कर दिया. 2.5 साल में 5 करोड़ की जमीन 65 करोड़ की हो गयी. गूगल करने पर उस राज्य का नाम मिल जाएगा.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में शक के दायरे में रहने वाले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पहला बयान सामने आया है
चंपत राय ने कहा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मेरी कोई भूमिका नहीं है बल्कि मुझे जब चढ़ावा चोरी की जानकारी हुई तो मैं सक्रिय हुआ।
मेरे कहने पर ही संदिग्ध लोग पकड़े गए हैं। मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि टिन्नू यादव ऐसा करेगा।
यही चंपत राय कुछ दिनों पहले लीपापोती कर रहे थे कि नहीं यहां ऐसा कुछ भी नहीं है कोई चोरी नहीं हुई है और अब क्रेडिट लेने आ गए।
आलू के बिना समोसा नही बन सकता, उसी तरह नाना पाटेकर और अनिल कपूर के बिना वेलकम सीरीज की कोई फ़िल्म नही बन सकती.
2007 की Welcome फ़िल्म हो या 2015 की Welcome Back फ़िल्म हो. दोनों फिल्में आज भी जहन में बसी हुई हैं.
2007 की फ़िल्म में अक्षय कुमार थे. लेकिन फ़िल्म को कामयाबी नाना पाटेकर और अनिल कपूर की जोड़ी के कारण मिली. फिर इस जोड़ी को Welcome Back में आजमाया गया.
Welcome Back में अक्षय कुमार की जगह जॉन अब्राहम को लिया गया. फ़िल्म सुपरहिट थी. वेलकम सीरीज की तीसरी फ़िल्म Welcome to the Jungle में बड़ी स्टार कास्ट है,
अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना, दिशा पटानी, जैकलीन फर्नांडिस, जैकी श्रॉफ,जॉनी लीवर, परेश रावल और भी बहोत लोग हैं. इतने कलाकार होने के बावजूद फ़िल्म बोर करती है.
फ़िल्म की कहानी बिखरी हुई है. कॉमेडी को जबर्दस्ती ठूसा गया लगता है. कुछ सीन हंसाते हैं, लेकिन फ़िल्म पूरी तरह दर्शकों को बांधकर रख नही पाती. नाना पाटेकर और अनिल कपूर की कमी साफ नजर आती है.
बेहद प्रभावशाली कविता और उतना ही कमाल का पाठ राजेंद्र जी का। गिरने का महत्व बहुत सुंदर से बताया गया है। इसे सुनने के बाद गिरते रहने की असीम प्रेरणा मिलेगी। जो भी गिर रहे हैं, ज़्यादा गिरने के लिए यह कविता सुनें।
राजेंद्र जी के यू ट्यूब चैनल का लिंक-
https://t.co/F08YBm1faP
जंतर मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट में एक 8 साल के बच्ची की वीडियो देखी जिसे देखकर के आप भी अपनी हंसी नहीं रोक पाओगे।
पत्रकार: क्या नाम है आपका?
लड़की: My name is निशा
पत्रकार: अभी कुछ देर पहले आप स्टेज से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही थीं? जानती हैं वो कौन हैं?
निशा: I don't know But I want इस्तीफा, I think He is in राजनीति 😂😂
पत्रकार: But Why?
निशा: I want My Birthday Gift like a इस्तीफा
पत्रकार: आपको लगता है कि इस्तीफा दे देंगे?
निशा: He is a बेशर्म 😂😂
पत्रकार: आप क्या कहना चाहेंगी?
निशा: I'm Little Cockroach and I Want Resign.
बच्ची और पत्रकार की ये तीखी नोंकझोंक काफी मजेदार रही और उसकी कमाल की इंग्लिश ने दिल जीत लिया।🤣
लखनऊ अग्निकांड के बाद दिल्ली में आज तक के सीनियर पत्रकार अरविंद ओझा (@arvindojha) रियलिटी चेक करने एक लाइब्रेरी पर पहुंचे। लाइब्रेरी पर मौजूद लोगों ने बदसलूकी कर उन्हें बाहर निकाल दिया। तंग कमरों में लाइब्रेरियां चल रही हैं। Video देखिए...
पत्रकारिता अभी बाक़ी है! इंडियन एक्सप्रेस में आज एक और रिपोर्ट छपी है ..कि मोदी सरकार के मंत्री ने अपने ही मंत्रालय से खुद को करीब एक करोड़ की सब्सिडी दी है। @harikishan1 की रिपोर्ट।