“आज़ादी के तराने” की इंदौर, मुंबई और पुणे में सफल प्रस्तुतियों के बाद इप्टा इंदौर इकाई के कलाकारों, तकनीकी सहयोगियों और टीम के सभी सदस्यों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित
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बीसवीं सदी के मध्य में जिन एंटीबायोटिक्स को प्राणरक्षक के रूप में देखा गया अब वो हमारे शरीर में कई तरह से एक शत्रु के रूप में पहुंच रही हैं। कभी भोज्य पदार्थों (मीट इत्यादि) के साथ और कभी सीधे हवा-पानी में घुलकर। हिमाचल प्रदेश में दवा कंपनियों की लापरवाही ने बहुत बड़ी जनसंख्या को ख़तरे में डाल दिया है ... ये वो रिपोर्ट है जो @ajayprakashm सामने लाये हैं वरना इस देश में मेडिकल कचरा निस्तारण का कानून भले ही हो लेकिन उसका ठोस क्रियान्वयन या प्रभावी मॉनिटरिंग कतई नहीं है।
Why no one is talking about this? In Himachal pradesh almost 2 lakh people are affected by antibiotic resistance. Around 600 factories are dumping pharma waste without any care. Most of them are dumping directly in rivers. Sirsa river TDS is cross 1000. Thank you Dainik bhaskar for covering this.
व्यूज और विज्ञापन राजस्व से निर्देशित होकर वित्तपोषकों की धुन पर नाचता मीडिया किसी महिला की मौत को मानता है प्राइम टाइम मुद्रा !
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रेलवे के संरचनात्मक बदलाव में हो कुली के काम की सुरक्षा, राष्ट्रीय कुली मोर्चा की वर्चुअल बैठक में उठी सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
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देश के सबसे बड़े फार्मा हब के हर घर में मरीज़; पूरे इलाके में तीखी सड़ांध से दम घुटने लगता है, आखों में जलन होती है और गला भारी हो जाता है
आज के @DainikBhaskar की ग्राउंड रिपोर्ट देश के सबसे बड़े फार्मा हब, हिमाचल प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र की भयावह स्थिति के बारे में है.
यहाँ करीब 600 दवा बनाने की फैक्टरियां हैं, जहां से 200 देशों को दवाएं भेजी जाती हैं. भारत की 40% दवाएं यहीं बनती हैं.
लेकिन दवा फैक्ट्रियों से निकलनेवाले untreated antibiotic कचरे ने यहाँ की हवा और पानी को जहरीला बना दिया है.
इस क्षेत्र के हर घर में मरीज है. यहाँ रहनेवाले लोगों के शरीर पर antibiotic दवाओं का असर खत्म हो गया है.
अफसरों ने भी खूब खेल किया, कागज़ों में दिखाया की फैक्ट्री के 10 किमी के दायरे में कोई गाँव नहीं है. हकीकत में दर्जनों गाँव सालों से बसे हुए थे. अब एक स्थानीय संस्था ने रिपोर्ट बनाई है, आठ गावों में 200 कैंसर के मरीज़ हैं .
कारखानों का कचरा और धुंआ पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है, जिससे दो लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं.
2024-25 में 20 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित करने वाली 35 एकड़ से अधिक भूमि पर फैले दवा कारखाने IMPCL को किसके फायदे के लिए बेच रही धामी सरकार !
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यूजीसी के नए नियमों को रोका जाना सांस्थानिक हत्या के शिकार रोहित वेमुला और पायल तड़वी के साथ ही दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों-अल्पसंख्यकों के साथ नाइंसाफी !
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