प्रेम चाहीए तो समर्पण खर्च करना होगा,
विश्वास चाहीए तो निष्ठा खर्च करनी होगी,
साथ चाहीए तो समय खर्च करना होगा।
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कौन कहता है की रिश्ते मुफ्त में मिलते हैं,
मुफ्त में तो हवा भी नहीं मिलती ।
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एक साॅंस भी हमें तब मिलती है
जब हम एक साॅंस छोडते हैं ॥
🙏🚩🇮🇳
झंझटिया @ArvindKejriwal जी को भी अब समझ आ ही गया होगा...
सर जी के दोस्त, पिच मास्टर सलीम उर्फ @_YogendraYadav ने क्या टुकड़े न मिलने पर पलटी मारी, और सर जी की करतूत का पर्दाफाश किया? सलीम को समझना चाहिए कि सर जी सत्ता में नहीं रहे, फिर टुकड़े कहां से फेंकेंगे?
अश्लील फिल्म, अश्लील सीरियल, अश्लील वेब सीरीज, अश्लील कॉमेडी, अश्लील डायलॉग.
भारतीय समाज, भारतीय सभ्यता, भारतीय परंपरा, भारतीय संस्कृति, भारतीय संस्कार और युवाओं को बर्बाद करने के लिए ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब पर अश्लीलता परोसी जा रही है
अश्लीलता नियंत्रण कानून जरूरी है
यही होता है जब किसी सेलिब्रिटी पर हुए ‘अतिसंदिग्ध हमले’ पर पुलिस तीस टीमें बना लेती है और हर टीम पर अपराधी ढूँढ कर केस बंद करने का दवाब होता है। भालू पकड़ कर, उसे पीट कर कहलवा लिया जाता है कि वो बाघ है। मुंबई पुलिस ने जिसे पकड़ा है, उसका भी चेहरा CCTV वाले से नहीं मिल रहा। अवार्ड बाँट लिए आपस में, वो तो अलग ही लेवल की बात है।
इस व्यक्ति का जीवन एक रात में बुरी तरह से पलट गया। यदि यह संदिग्ध ही था, तब भी क्या पुलिस ने इसकी फोटो सार्वजनिक नहीं होने दी? इसे कौन कम्पन्सेट करेगा? मुख्यमंत्री @Devendra_Office जी से आग्रह है कि इसका संज्ञान लें और इसे अपवाद मानते हुए, उचित मुआवजा पुलिस विभाग से दिलवाएँ।
मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात के हत्यारे से जज ने पूछा- "तुमने राष्ट्रपति सादात की हत्या क्यों की?"
हत्यारे ने जवाब दिया- "क्योंकि वह सेक्युलर था।"
जज ने तुरंत अगला सवाल किया- "सेक्युलर का मतलब क्या है?"
हत्यारे ने कहा- "मुझे नहीं पता।" मस्जिद में मौलाना साहब की तकरीर सुना था कि हमारा राष्ट्रपति सेकुलर है
मिस्र के लेखक नगीब महफूज पर छुरा मारने की कोशिश करने वाले से जज ने पूछा- "तुमने नगीब साहब को छुरा क्यों मारा?"
आतंकी ने जवाब दिया- "क्योंकि उसने धर्मविरोधी 'चिल्ड्रेन ऑफ गेबालावी' उपन्यास लिखा है।"
जज ने रुचि दिखाई- "क्या तुमने उपन्यास पढ़ा है?"
अपराधी ने जवाब दिया- "नहीं।" मस्जिद में मौलाना साहब की तकरीर सुना था की नगिब महफूज ने इस्लाम विरोधी किताब लिखा है
मिस्र के साहित्यकार फराग फौदा के हत्यारे से जज ने पूछा- "तुमने फराग फौदा को क्यों मार डाला?"
हत्यारे ने जवाब दिया- "क्योंकि उसका ईमान नहीं था।"
जज जानने के लिए उत्सुक हुए- "तुम कैसे समझे कि उसका ईमान नहीं था?"
आतंकी का जवाब था- "उसकी किताबें पढ़ने से सब समझ आता है।"
जज की जिज्ञासा और बढ़ गई- "उसकी किस किताब में तुमने उसकी ईमानहीनता का सबूत पाया?"
हत्यारे ने स्वीकार किया- "मुझे किताब का नाम नहीं पता। मैंने वह सब नहीं पढ़ा।"
जज आश्चर्यचकित हुए- "क्यों नहीं पढ़ा?"
हत्यारे ने कहा- "मैं लिखना-पढ़ना नहीं जानता।" मस्जिद में मौलाना साहब की तकरीर सुना था
घृणा, कभी भी ज्ञान के माध्यम से नहीं फैलती। घृणा अज्ञानता के माध्यम से फैलती है। समाज अज्ञानता की कीमत, अज्ञानी बनाए रखने की कीमत, इसी तरह चुकाता है।
मुसलमानो! सोचो कि ये तुम से क्या चाहता है। ये चाहता है कि तुम्हारे बच्चे पुलिस पर पत्थर फेंके, पुलिस की गाड़ियों को आग लगाएँ और वो पुलिस की फायरिंग में सूअर की मौत मारे जाएँ ताकि ये शायरी लिख कर ट्वीट कर सके।
HELLO FRIENDS
एजाज खान के इंस्टाग्राम पर 56 लाख फॉलोवर्स है
और इसे वोट मिले सिर्फ 43 ...
मैने तो सुना है इसके परिवार में कुल 80 लोग है,
ओह माय गोट- परिवार वाले भी खेल गये 🤣🤣
*जेल में बंद एक कैदी वोट नहीं डाल सकता उसे कानून कहते हैं*
*उसी जेल का एक कैदी चुनाव लड़ सकता है उसे मौलिक अधिकार कहते है।*
*ऐसा महान् संविंधान बनाने वाले थे भीमराव अंबेडकर*
😂😂😂😂😂😂
देहरादून की घटना न तो पहली है, न अंतिम। पाँच मित्र, नई इनोवा कार, पार्टी, दारू, लॉन्ग ड्राइव की चर्चा और फिर ‘दारू पीने से कन्सनट्रेशन बढ़ता है’ जैसे निरर्थक उपहास को सत्य मानने वाले लाखों बच्चों की तरह, अल्कोहल के नशे में सड़क पर।
एक BMW उन्हें ओवरटेक करती है। संभवतः, ‘भाई, इसने तो तुझे ओवरटेक कर दिया, ये क्या गाड़ी चला रहा है तू’ जैसी उकसाऊ ललकार जैसा मजाक और स्पीड 100 से 120-30-50 की ओर। दो लोग सनरूफ से बाहर देख कर ठिठोली करते हुए ‘उत्साहवर्धन’ कर रहे थे।
स्पीड और बढ़ती है, ट्रक आता है और गाड़ी टकराती है। दोनों बच्चों का सर सनरूफ के साथ कार और शरीर से अलग हो जाता है। बाकियों के देह की दुर्दशा ऐसी हो जाती है कि उसे लिखना भी मुश्किल है। इम्पैक्ट इतना भयावह की नई कार का ढाँचा पहचानने योग्य नहीं रह जाता। एक भी सवारी बचती नहीं, उनकी देह क्षत-विक्षत।
शराब, नशा, गाड़ी और मित्र मंडली ऐसा कॉकटेल है, जिसे हर कोई तब तक हल्के में लेता है, जब तक वो स्वयं इसका शिकार नहीं हो जाते। सबको लगता है वो अजेय, अजित, अमर है, उस पर महादेव का हाथ है। ऐसा होता नहीं। उनके परिजनों के बारे में सोचिए।
ऋषभ पंत के साथ 2022 के 31 दिसंबर को जो हुआ, पूरे देश ने देखा। ऐसे एथलीट को भी रिकवर करने में बीस महीने लग गए जिसके पास हर व्यवस्था थी। वो नशे में नहीं था, केवल स्पीड में था।
शराब जानलेवा है, सड़क-गाड़ी-मित्र-रात्रि न हो तब भी। नशे में गाड़ी चलाना जानलेवा है, स्पीड-मित्र-समय से कोई मतलब नहीं। गाड़ी जानलेवा है, यदि मित्र आपको दारू पीने के बाद भी उस पर बिठाते हैं। मित्र मंडली जानलेवा है यदि उनमें से एक भी आपको ऐसी स्थिति में कार पर बैठने से रोक न रहा हो।
मैं न तो शराब पीता हूँ, न मेरे पास गाड़ी है, परंतु ऐसे मित्रों के साथ रहा हूँ जो ऐसा करना चाहते हैं। मैं ऐसी गाड़ी पर नहीं बैठता चाहे मुझे मित्रों द्वारा ‘डरपोक, कायर, फट्टू’ जैसे विशेषण सुनने पड़े। मेरे लिए उस क्षणिक ‘पौरुष’ प्रदर्शन से करोड़ों-गुणा कीमती मेरा जीवन है।
वीरता और पौरुष सड़क पर दूसरी कार के पीछे भागते हुए मरने में नहीं है। वीरता है स्वयं पर संयम रखना और अपने मित्रों को किसी भी प्रकार से उस समय, उस अवस्था में, गाड़ी पर बैठने से रोकना।
@ajeetbharti आपका सोचा अच्छा है, हम लोगों का प्रयास होगा तो बड़े हैंडल का साथ हो या ना हो कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। बस आम हिंदू का साथ होना चाहिए ऐसे भी बड़े लोग या हैंडल कुछ भी सोच समझ कर करते, मतलब जहां फायदा हो ?
https://t.co/27dqxxvUaa
रात के इस समय में जब मैं सोने जा रहा हूँ तो एक बात लिख रहा हूँ। ऐसा नहीं है कि आपने डासना मंदिर पर जो हुआ, वो कल रात नहीं देखा। पर, कितनी विचित्र बात है कि एक ट्वीट तक नहीं निकला बड़े हैंडलों से!
क्यों? आपको नरसिंहानंद के कथनों से समस्या है? डासना तो हिन्दुओं का सिद्ध पीठ है, यति जी का व्यक्तिगत मंदिर तो नहीं। आपको अंदाजा भी है कि कल यदि गाजियाबाद पुलिस जुबैर के ट्वीट्स से होने वाले दंगों की आशंका से वहाँ पहले से तैनात न होती तो क्या होता?
दस हजार की भीड़ थी। जो वीडियो में दिखा वह आधा भी नहीं था क्योंकि आधे लोग दूसरी साइड से आ रहे थे। आपने यति जी को नहीं त्यागा है, आपने मंदिर को त्यागा है।
दूसरी बात, यति जी ने क्या अनुचित कह दिया? मुसलमानों को लग रहा है गुस्ताखी है, वो तो उनकी समस्या है, आपको कैसे अनुचित लग गया? अर्थ यह है कि आप मुसलमानों के ब्लासफेमी वाली बात को समर्थन देते हैं।
पुनः, यह कहना चाहूँगा कि यति नरसिंहानंद स्वयं ही मरने के लिए उद्यत हैं, उनको इससे बहुत अंतर नहीं पड़ता कि वो क्या कह रहे हैं, और कौन उन्हें मारेगा। बात यह है कि क्या आप चाहते हैं कि एक और कमलेश तिवारी बने, कन्हैयालाल हो, उमेश कोल्हे हो जाए?
यदि नहीं, तो फिर अंतर क्या है? वो सब तो निर्दोष और सामान्य व्यक्ति थे, क्या नरसिंहानंद हिन्दुओं को जगाने के कारण उनसे विशिष्ट नहीं हो जाते? फिर आपका समर्थन क्यों नहीं?
क्योंकि आप संवेदनशील दिखना चाहते हैं। क्या यति जी ने आपका पैसा हड़प लिया? क्या उन्होंने मंदिर के फंड की लूट की? क्या उन्होंने कोई मंदिर बनवाया जो हवा में टूट गया? क्या उन्होंने हिन्दुओं के शत्रुओं को घर बनवा कर दिया, उन्हें लीगल सपोर्ट दिया या उनके साथ वो स्वार्थवश मिल गए?
नहीं! फिर आपको समस्या उनके राजनीति में महिला वाले कथन से होगी? क्या उन्होंने क्षमा नहीं माँगी? या आपने बंद कमरों में कभी कोई अनैतिक बात नहीं की, आपसे कोई अनुचित कार्य नहीं हुआ? फिर आपका समर्थन कहाँ है?
धिक्कार है आप जैसे लोगों पर जो नवरात्रि में देवी भवानी के पीठ पर होने वाले इस्लामी हिंसा पर चुप रहे। स्वयं को न्यूट्रल दिखाने के चक्कर में इतना मत गिर जाओ।
दो कौड़ी के ओपिनियन पोल से ले कर वायरल हो रहे वीडियो शेयर कर के दो डॉलर कमाने के चक्कर में, औपचारिकता से भी आपसे एक ट्वीट तक नहीं पाया! यति नरसिंहानंद अमर नहीं है, लेकिन वो मंदिर अमर रहना चाहिए। मेरी लड़ाई उसी के लिए है।
आपका साथ मिलेगा तभी 95% मुसलमान जनसंख्या के मध्य खड़ा यह मंदिर बचा रह सकेगा। दूसरे पक्ष को देखिए कि वो कैसे जिहादियों की भीड़ भेज रहा है और ट्वीट लिख-लिख कर हैदराबाद से दिल्ली तक, आतंकी आक्रमण की योजना के साथ पहुँचने वाली भीड़ के वीडियो होने के बाद भी, सांसदों से ट्वीट करवा ले रहा है।
सरकार, प्रशासन या अन्य संस्थाएँ अपनी गति और परस्पर प्रेम/घृणा के आधार पर कार्य करती हैं। राजनीति वैसे ही कार्य करती है। पर हम और आप तो राजनैतिक कारणों से मंदिर नहीं जाते, फिर चुप्पी क्यों है?
#SaveDasna #DasnaDeviMandir
तिरुपति मन्दिर में #गौ_चर्बी से बने लड्डू के चढ़ावे पर एक मिनट पर नियंत्रण हो सकता है। हर मन्दिर अपने निकट के #गौपालक_समाज से अनुबंध कर लें। गौ भी समृद्ध, समाज भी सशक्त। पर नहीं हो सकेगा। क्योंकि मन्दिर प्रबन्धन पर सरकार का नियंत्रण, टेंडर..और इस सिस्टम का उद्देश्य है #करप्शन।
@bastipolice@digbasti@DMBasti2 पिकौरा जनूबी से पिपरा २०० L T 440 volt तार बिना विभाग के परमिशन का जबर दस्ती हमारे हरे पेड़ों 12,13 पेड़ों में बांधकर जबरन ले गये है नगरथाने के एस आई जयराम यादव ने लगवाया है किसी भी घटना सर किसी घटना का कौन जिम्मेदार होगा हरीकृष्ण त्रिपाठी
@bastipolice@digbasti@DMBasti2 पिकौरा जनूबी से पिपरा २०० L T 440 volt तार बिना विभाग के परमिशन का जबर दस्ती हमारे हरे पेड़ों 12,13 पेड़ों में बांधकर जबरन ले गये है नगरथाने के एस आई जयराम यादव ने लगवाया है किसी भी घटना सर किसी घटना का कौन जिम्मेदार होगा हरीकृष्ण त्रिपाठी
जो लोग छुद्र राजनैतिक स्वार्थों में बांग्लादेश में हो रही दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को भारत के साथ अपने ही चश्मे से जोड़कर देखना चाहते हैं और अपनी राजनीतिक पराजय की कुंठा की संतुष्टि देखने का प्रयास कर रहे हैं उनसे कहना चाहूंगा हाँ सच में कुछ मामलों में भारत की राजनीति के लोगों को बांग्लादेश के घटनाक्रम से क्या क्या सबक़ लेने की ज़रूरत है । वरना संविधान का ख़तरा तो छोड़िए देश के अस्तित्व और आम नागरिकों की जान को गंभीर ख़तरा उत्पन्न हो सकता है