ये भारत में नहीं रहते, ये पाकिस्तान, सीरिया, गाजा, फिलिस्तीनी, ईरान, इराक, बांग्लादेश, म्यांमार, लंदन, अमेरिका बाकी हर जगह रहते हैं। इनको वहाँ का सब पता है, बस इसी देश का कुछ नहीं पता।
Let's tag @MehboobaMufti and tell her how Girija Tickoo was cut alive into two pieces with a carpenter saw & her body thrown on the roadside on this very day, 25 June 1990 in Kashmir.
We cannot ever move on with life and forget the massacre of our own.
NEVER FORGET.
I urge everybody to watch Citizen Vigilante.
Uwe’s film @CitizenVMovie has been banned in Germany because they care more about rapists than the victims.
I fully support this film. Protect your sons & daughters.
बिहार सरकार को निहत्थे लोगों के एनकाउंटर से फुर्सत मिले तो इस वहशी शस्त्र प्रदर्शन को रोके
पीरपैंती रेलवे स्टेशन , भागलपुर
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मोहर्रम में किसी भी प्रकार के शस्त्र प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है
मुझे याद है कि वर्ष 2016 में मदनपुर थाने से कैसे असलहे लूट लिए गए थे और पूरे थाने को आग लगा दिया गया था।
आज मुहर्रम है, कहीं किसी का अता-पता नहीं है। कोई अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन, सड़कों पर गुंडागर्दी नहीं कर सकता है।
अगर करेगा तो फिर सात पीढ़ियों तक भुगतेगा भी...
At a Moharram procession in Ujjain, organisers displayed this: suspended a van 40 feet in the air using a crane, blasted it, then three men appeared waving red flags with the message - “le fir aa gaye”
What message are they sending?
@sp_ujjain must take stringent action
"Pakistan has implemented the Quran — India should bring it too, we demand this."
She is daughter of Nawab Malik who had financial connections with Dawood and Haseena Parkar.
She is a part of NDA govt in Maharashtra.
कांग्रेस के युवराज संविधान की प्रति लेकर देश भर में जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम करते हैं...
लेकिन जब इनको और इनके पूर्वजों को मौका मिला तो इन्होंने क्या कृत्य किया था...
तबूसम ख़ान तो गौरक्षक को आजीवन कारावास देंगीं ही
जब यह केस ऊँचली आदतलत में ख़ारिज हो तब इन जज साहिबा पर भी करवाई होनी चाहिए
किस क़ानून के तहत आजीवन कारावास दिया
कुछ लोगों को अपने लिए सम्मान की बैटरी 🪫 स्तर तक पहुँचने से पूर्व ससम्मान पद छोड़ देना चाहिए। मोहन भागवत जितना मुँह खोलते हैं, नैरेटिव के लिए केवल और केवल नकारात्मकता ले कर आते हैं।
अखिलेश जी, अपने चेले-चपाटों को भी थोड़ा उपदेश दे दो कि अपनी भाषा पर संयम कर लें...
नहीं समझा सकते तो हमारे हवाले कर दो, हम उनको अच्छी तरह समझा देंगे...