सम्मान अपनी जगह है, लेकिन लोकतंत्र में किसी भी नेता को इस स्तर तक पहुँचा देना कि 15 महीने के बच्चे की हर हरकत में भी चमत्कार दिख रहा है, सुनील शेट्टी को... यह ठीक सोच नहीं है।
नेता कितने भी बड़े क्यों न हों, भगवान तो नहीं हैं।
अगर हम बच्चों को बचपन से ही नेताओं की तस्वीरों के आगे लड्डू चढ़ाने की कहानियाँ सुनाकर गर्व महसूस करने लगेंगे, तो कल वे सवाल पूछना तो दूर , सिर्फ़ जयकार करना सीखेंगे।
देश को ऐसे नागरिक चाहिए जो संविधान, विज्ञान और कर्तव्य का सम्मान करें; किसी भी नेता की पूजा करने वाली पीढ़ी नहीं।
बच्चों को भगवान और माता-पिता का सम्मान सिखाइए, नेताओं की पूजा नहीं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जागरूक नागरिक हैं, भक्त नहीं।
जब तर्क कम पड़ जाएँ, तब जादू और चमत्कार की कहानियाँ शुरू हो जाती हैं।फ़िल्मों में अभिनय अच्छा लगता है, लेकिन लोकतंत्र में नहीं shetty ji...
प्रदेश मीडिया के बाद अब राष्ट्रीय मीडिया में भी किरकिरी करवाने की मानो होड़ सी लग गई है। इस मामले में किसी ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी है।
अगर इस पर प्रतिस्पर्धा करवाई जाए, तो मुकाबला वाकई बेहद दिलचस्प और कमाल का होगा।