आदिलाबाद जो आदिवासी डिस्ट्रिक्ट है
का 1834 मे�� लिखा हुआ गजट पढ़ा कुल 9 लाख की आबादी मे आदिवासियों के गांव में
एक भी राजपूत नहीं है न ��्राह्मण फिर इनका शोषण कौन किया और इन्हें 5000 साल पढ़ने कौन नहीं दिया?
फिर क्यों नहीं पढ़े?
और इन्हें किस बात का आरक्षण?
@neha_laldas फिर यह क्यों बोल��े हैं कि ठाकुर ब्राह्मण तुम लोगों ने 3000 साल अत्याचार किया है दलित पिछड़ों पर इसलिए इनका आरक्षण जरूरी है मुसलमान पर किसने कब अत्याचार किया? फिर भाजपा मुसलमान को आरक्षण की मलाई क्यों खिला रही है
अवैध निर्माणों के खिलाफ JDA के कड़े एक्शन का असर
अब लोग स्वयं अपने स्तर पर हटा रहे अवैध निर्माण
जोन 1- टोंक रोड पर जेकेजे के पास किए गए छ��्जे के अवैध निर्माण को भूखंड मालिक द्वारा स्वयं के स्तर पर हटाए जाने की कार्रवाई बदलाव का संकेत है
#JDAJaipur #RuleCompliance #UrbanDiscipline
क्या ‘Joshi’ होना कोई विशेषाधिकार है?
सदियों से जात पूछकर अन्याय करने वालों को आज #CasteCensus में ‘कौन जात हो’ पूछने से क्यों हो रही परेशानी ?
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But this would make it difficult to advance the party's agenda, some say. There is a simple solution to that. The parties should nominate people who are already aligned to its agenda. Then it's unlikely that they would disagree at the time of a vote.
Note that in all this, no one is thinking about the citizens who voted for the representatives. It is as though the only two choices are to represent one's own views or the party's, but it is not necessary to ask what the constituents think and represent that.
हमने पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुके सैकड़ों colonial कानूनों को रद्द किया है।
आजादी के इतने दशक बाद गुलामी की मानसिकता से उबरते हुये देश ने इंडियन पीनल कोड की जगह 'भारतीय न्याय संहिता' को adopt किया है: PM @narendramodi#PMModiInRajasthan
UPSC का रिजल्ट आया। इसमें SC कैटेगरी के 165 और अनुसूचित जनजाति (ST) कैटेगरी के 86 कैंडिडेट्स हैं. अब इस लिस्ट में ये भी देखिए कि भील, भिलाला, गोंड, बैगा, वाल्मीकि जैसे समाज के कितने लोग चयनित हुए? अभी कितने भील,भिलाला, गोंड समाज से UPSC में सिलेक्शन हुआ है? अगर ये छात्र चयनित नहीं हो रहे हैं तो क्यों? गाँव में रहने वाले इन गरीबों तक क्यों नहीं पहुंच रहा आरक्षण का लाभ?
पिछले दिनों एक मामले में पटना उच्च न्यायालय ने टिप्पणी दी कि असफल विवाह में पत्नी को ‘भूत’ और ‘पिशाच’ कहना क्रूरता नहीं है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ख़राब भाषा का इस्तेमाल आईपीसी की धारा 498ए के तहत ‘क्रूरता’ नहीं है।
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स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 के तहत घर - घर कचरा संग्रहण प्रणाली को और बेहतर बनाने हेतु SBM नोडल अधिकारी व उपायुक्त, (गैराज) द्वारा सभी गैराज इन्चार्ज, टाईमकीपर की समीक्षा बैठक कर कचरा संग्रहण व ट्रासफ़र स्टेशन के कार्य को और बेहतर बनाने हेतु दिशानिर्देश दिए गए