@ajitanjum तो तुझ जैसा शुद्ध इस्लामिक और सनातन से घृणित जेहन वाला अंजुमन मियां भी किसी को भेजकर हलाला का पाक रिवाज करवा कर घर को पाक करवा कर बदला ले लो इसमें क्या सोचना है।
क्योंकि कांवड़ से लेकर हर सनातनी समस्या पर विरोध जताने वाले मौलाना से किसी हलाला पीड़ित का दुख नहीं बताया गया।
@AnilYadavmedia1@ajeetbharti देख लो कैसे एक ट्वीट में ले आते हो आप लाइन पर टूटपंजियों को अब ये सीधा कह रहा है भैया ये तुम्हारे लिये उसने कभी कहा ही नहीं था😁😁😁
इसके समर्थक क्या सोचते होंगे मन ही मन ऐसे tutpunjiyo के लिए😁😁😁
@SupriyaShrinate अभी तो जीरो पर ही भेजा है GenZ ने केरल यूनिवर्सिटी से लेकर पंजाब और DU में।
ऐसी ही इटालियन धंधा वाले हरकते करता रहे पप्पू फिर देखो KHANGRESI कहां तक जाते हैं😁😁😁
@LambaAlka@RahulGandhi नहीं हल्का भौजी नहीं। चमचों को फिर से औकात बता दिया है GenZ ने की जिसके लिए कपिल सिब्बल ने भी कहा था एक गद्दे के लिए घोड़े अस्तबल से खाली होते जा रहे हैं
@khanumarfa Alqaeda is in all over world but this Habibi never asked why Islamic terrorism in non Islamic country and what Islamists have to do in country of other religions for blood shedin but Arfa biwi has to argue on why silent and peaceful lights and prayers in country of other religion
@ajitanjum बाप SIMI का आतंकी और सजायफ्ता,
बेटा खुल्लमखुल्ला आजादी के नारे भारत तोड़ने के लिए...
लेकिन अंजुमन मियां का दर्द देख लो अपने अब्बा जी लोगों के लिए।
@zoo_bear@UmarKhalidJNU तू ओसामा बिन लादेन को बाप बना या अलकायदा को...
लेकिन इस देश में आतंकी शुगरो का यही अंजाम रहेगा जो इस देश को तोड़ने का सोचेंगे भी।
निशु आजाद के एक-एक ट्वीट पर हर जिले में ईशनिंदा कानून के तहत BNS 299/IPC 295A में केस होना चाहिए। ‘हिन्दू लीगल फंड’ को इसमें मोबिलाइज किया जाए।
इसके बाप पर काउंटर FIR होनी चाहिए। उसको बहुत ‘दो मिनट पुलिस नहीं आती’ करना है न, क्या @DelhiPolice इतनी नकारी है कि कोई भी गुंडा प्रवृत्ति का व्यक्ति खुलेआम वीडियो बना कर धमकी देगा?
जब इनको FIR-FIR ही खेलना है, तो यही सही। फिर देखते हैं कि रावण और राहुल कितने थाने घेर लेता है। नरेन्द्र मोदी ने जो बवासीर बना दिया है, वह अब हिन्दू समाज हर दिन झेल रहा है। दुर्भाग्य यह है कि जो इसका प्रयोग कर रहे हैं वो मोदी के वोटर हैं ही नहीं।
सुबह से इसी उधेड़बुन में रहा कि कृष्ण पर लिखूँ तो क्या लिखूँ? कहाँ से प्रारंभ करूँ, कहाँ इस लीला का अंत लिखूँ? क्योंकि, न तो कारागार से इसकी शुरुआत होती है और न ही किसी वन में इसका अंत!
उन्हें एक अच्छा मित्र लिख दूँ क्या? या फिर एक विश्वस्त सम्बन्धी बता दूँ? उन्हें राजनीतिज्ञ का तम्ग़ा दूँ, या फिर उन्हें सबसे अच्छा दूत कहूँ? श्रीकृष्ण को मैं इस विश्व का सर्वाधिक विख्यात सारथि कहूँ, या फिर उन्हें रणनीतिकार शिरोमणि कहूँ? उन्हें इतिहास का सबसे कुशल संकटमोचक कहूँ, या फिर परम-तत्व कहकर इतिश्री कर लूँ?
इतना तो समझा है कि वो धर्म के रक्षक हैं। धर्म क्या है, इसकी परिभाषा भी वही देते हैं। वो व्यवस्था को संतुलित रखते हैं। व्यवस्था क्या है, ये वही तय करते हैं। वो प्रक्रिया नहीं, परिणाम देखते हैं। उस परिणाम तक पहुँचने का रास्ता वही तय करते हैं। वो शान्ति चाहते हैं, लेकिन युद्ध में बिना शस्त्र उठाए उसका परिणाम तय कर देते हैं। वो संवाद में विश्वास रखते हैं, लेकिन जब हिंसा थोपी जाती है तो सुनिश्चित करते हैं कि उसका प्रत्युत्तर भी असाधारण हो।
जहाँ नियम पर नियम तोड़े जा रहे हों, वहाँ कौन से नियम आदर्श होंगे ये वही तय करते हैं। भीष्म के सामने शिखंडी आती है, द्रोण को उनके पुत्र अश्वत्थामा की मृत्यु का ग़लत समाचार मिलता है, निहत्था कर्ण मारा जाता है और दुर्योधन के जाँघ पर वार होता है - परिस्थितियाँ जैसा साँचा तैयार करती है, श्रीकृष्ण के नियम उसी अनुसार ढल जाते हैं। श्रीकृष्ण के लिए धर्म किन्हीं नियमों की सूची नहीं है, उनके लिए हर उस निर्णायक क्षण में स्वयं के लिए जो भी उचित है वही धर्म है।
उनकी करुणा की कहानियाँ गाई जाती हैं, लेकिन घटोत्कच की मृत्यु पर सबसे अधिक प्रसन्न भी वही होते हैं। वो निकट त्रासदी के पार भी देख सकते हैं। उनकी करुणा को भावुकता संचालित नहीं करती। जब मित्र उलझन में फँसता है तो उनके मुख से निकले उद्गार उस भगवद्गीता का रूप लेते हैं जो अनंतकाल तक मानवता को मार्गदर्शित करती रहेंगी। उनका क्रोध भी कैसा, भीष्म के वध के लिए अपनी प्रतिज्ञा भूलकर स्वयं रथचक्र लेकर दौड़ पड़ते हैं। अर्थात, जिस तरह उनमें प्रेम है, करुणा है, वैसे ही क्रोध भी है। मानवीय, बनावटी नहीं।
शिशुपाल की सौ गालियाँ सुनते हैं, तब शस्त्र उठाते हैं। दंड से पहले सबको विकल्प देते हैं। दुर्योधन को भी पाँच गाँव देकर सबकुछ ठीक करने को कहा था न? कर्ण को भी पांडवों के पक्ष में आने का प्रस्ताव दिया था न?
गीता में अर्जुन उनका विराट रूप देखते हैं। वहीं जब युद्ध के बाद युधिष्ठिर शंकित होते हैं तो कृष्ण उन्हें उपदेश देते हुए दूसरी गीता नहीं सुनाते। उन्हें ले जाते हैं भीष्म के पास। वो स्वयं के ज्ञान को सर्वोपरि नहीं मानते। शोकाकुल गांधारी के श्राप को चुनौती नहीं देते। वन में एक शिकारी का बाण लगने के बावजूद उसपर क्रोध नहीं करते। शरीर, साम्राज्य, कुल, विजय - सब समाप्त होते हैं। श्रीकृष्ण इस नियम में बाधा नहीं बनते।
सत्ता-संपन्न होने के बावजूद बृहद विश्व की चिंता के लिए सारथि बन जाने को ही कृष्ण लिख दूँ? या फिर भविष्य का ज्ञाता होने के बावजूद मानवीय भावनाओं से परिस्थितियों को संचालित होने देने की कला को ही कृष्ण कह दूँ? यही कारण है कि मैं स्वयं को उनकी लीलाओं पर कुछ भी लिखने में अक्षम पाता हूँ, क्षमा कीजिए।
क्षमा कीजिए, कि मैं श्रीकृष्ण पर कुछ भी लिख नहीं सका आज!
@RahulGandhi गजब बेशर्म हो।
बाप बेटी मिलकर दिन रात एक धर्म विशेष को टारगेट करते हैं इसलिए ये बहादुर हो गई।
वही केरल में एक लड़की पत्रकार जिसने तुम्हारी बातों में आकर मौलाना के बात का खंडन कर दिया कि औरतें लड़की पर्दे में नहीं रहेंगी तो बेचारी के साथ क्या क्या नहीं हो रहा केरल में वहां मौन
@JaiHe Why don't you try on "हलाला पाक रिवाज का महत्व"???
Oh her bro i mean ex bro present husband will tell her Talaq talaq talaq and then she too will have to pass through that पाक रिवाज of हलाला।।।
I salute your fierce loyalty to your ancestors.
You stormed in with full force to defend wife of Fahad Ahmad while those same ancestors captured Hindu women, turned them into sex slaves, sold them in markets, and raped them daily. That devotion to your mazhab is truly admirable. The world should take notes.
Before you wrap yourself in the “pro-women” flag, will you ever dare to condemn the people who actually forced Jauhars? The Islamic barbarian invaders of the desert cult who treated Hindu women as war booty?
And during the Kashmiri Pandit massacre, the slogan that echoed was: leave the valley, but leave your women here. Oppose that, and suddenly you’re the anti-woman villain.