ये सब न्यूज़ वाले... एक ये दीदी, दूसरे वो गज़बे भाई... डिजिटल बोर्ड पर न्यूज़ में कैसी नौटंकी करते हैं।
आजकल न्यूज़ चैनलों में पत्रकार कम, शिक्षक बनने का शौक ज़्यादा हो गया है।कभी कोई डिजिटल बोर्ड लेकर माइलेज पढ़ा रहा है, कभी कोई अर्थशास्त्र, कभी कोई विज्ञान...
इतना ही पढ़ाने का शौक है तो न्यूज़रूम छोड़िए, क्लासरूम आइए... शिक्षक बन जाइए। बोर्ड पकड़ लेने से कोई शिक्षक नहीं बन जाता।
शिक्षक बनने के लिए वर्षों का अध्ययन, अनुभव और ईमानदारी चाहिए...
उलूल-जुलूल डेटा का आधा-अधूरा विश्लेषण करके देश को गुमराह मत कीजिए।
खुद पाठशाला में सही से पढ़ लिया होता, तो आज देश के वास्तविक दृश्य पर चर्चा करते, सरकार से सवाल करते और जनता के हित को समझते...PR की क्लास नहीं चलाते।देश को न्यूज़ चाहिए... न्यूज़ के नाम पर नौटंकी नहीं।
Hello @nytimes@guardian@lemondefr@BBCWorld@AJEnglish@FT please watch how police in Indian state of Bengal watch complicit as PM Modi’s ruling BJP goons in a lynch mob attack an Opposition MP’s premises & keep her confined for 4 hours.
संसद जैसी लोकतांत्रिक संस्था में दिया गया हर शब्द करोड़ों लोगों के विश्वास से जुड़ा होता है।इतने गंभीर मामलों में हर शब्द की ज़िम्मेदारी होती है।जनता तो इतनी भोली है कि हर बार कुछ भी कह दीजिए और इन्हें लगता है लोग भूल जाएँगे? जनता सब देख रही है, सब समझ रही है और समय आने पर हर बात का हिसाब भी करेगी। @rajnathsingh जवाब दे और बताए कि सच क्या है?
एक निडर और सच्चे पत्रकार की पीड़ा
“जिन्होंने नेहरू की किसी किताब के 10 पेज नहीं पढ़े वो उनके बारे में न जाने क्या-क्या बक रहे हैं
जिन्होनें महात्मा गांधी की किसी किताब के 20 पेज नहीं पढ़े वो बापू को गाली देते हैं
प्रधानमंत्री के खिलाफ़ कुछ बोलो तो कहते हैं राष्ट्र के खिलाफ़ हो गया
सरकार के खिलाफ़ बोलो तो कहते हैं देश के खिलाफ़ हो गया”
मैं 2017 में उस समय YouTube पर 10 लाख (1 Million- aap hi bio mai million ka aura dekha) लोगों को जोड़कर बैठा था, जब न Reels थीं, न Shorts थे और न ही Jio का आज जैसा विस्तार था।
उस समय लोगों को जोड़ने का एक ही तरीका था -विषय पर पकड़, पढ़ाने की क्षमता और छात्रों का विश्वास।
शिक्षक का मूल्यांकन पत्रकार से नहीं, लाखों छात्रों के परिणामों से होता है।
पत्रकारिता बची है नहीं, देश की जनता कर रही है इसका फैसला।
पेपर लीक, बेरोज़गारी और भर्ती घोटालों पर सवाल पूछने वाले शिक्षक आपको तमाशेबाज दिख रहे हैं।
देश के इन हालातों के लिए इस देश की मीडिया पूरी तरह जिम्मेदार है जिसने सत्ता की एक तरफा तरफदारी की और विपक्ष और देश के मुद्दों पर सवाल करने वालों को दुश्मन की तरह पेश किया।
आज YouTube मीडिया जर्नलिस्ट तक TV मीडिया को गलत कहते और रोस्ट करते दिख जाएंगे...
आज back to back paper leak हो रहे हैं, परीक्षाएँ cancel हो रही हैं, सरकार back foot पर है, असहाय महसूस कर रही है, मगर TV मीडिया और उनके so called बड़े anchors इस दर्द को अपना दर्द मानकर सरकार को बचाने के लिए बौखलाहट में कुछ भी बयान दे रहे हैं।नैतिकता भी कोई चीज़ होती है....
जैसा अंजना ने इस व्यवस्था में सबसे बड़ा दोषी YouTube Teachers को बता दिया और 2 कौड़ी तक का कह दिया.....यदि किसी व्यक्ति विशेष से असहमति थी तो उसका नाम लेकर आलोचना करती।
इसके लिए India Today @aroonpurie को और अंजना को सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी करनी चाहिए, India Today के हर platform का boycott होना चाहिए और किसी भी शिक्षक को कभी वहाँ नहीं जाना चाहिए।
हमें 2 कौड़ी का कह देना उन छात्र समुदाय के दिल पर भी आघात है जो हमें गुरु मानते हैं...
अगर आज आप अपने घर में पढ़ रहे बच्चों से... सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछेंगे, तो हमारे योगदान को आपको बता पाएंगे...
पिछले 10 वर्षों से गणित पढ़ाने के साथ मैं बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ रहा हूँ।
मीडिया एवं प्रचार विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने के लिए पहुँचे, लेकिन जिस सवाल को पूछा जाना चाहिए था, उसके विपरीत ही आदेश आया। सुप्रीम कोर्ट को यह पूछना चाहिए था कि हिमंता बिस्वा सरमा पर लगाए गए आरोप सही हैं या गलत। हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर तीन देशों का पासपोर्ट रखने, दुबई में संपत्ति होने और अमेरिका में निवेश करने के आरोप लगे हैं। अब तो सच बोलना गुनाह हो गया है। ऐसे में लोग न्याय के लिए कहाँ जाएँ? क्या अब झूठ की ही विजय होगी?
एक यात्री, बस स्टैंड से निकल रहा था, तभी बिल्डिंग का एक हिस्सा उसके ऊपर आ गिरा, यात्री की मौत हो गई....
लेकिन हैरानी की बात है... ये एक विकसित बस टर्मिनल था।
2014 में खुद मोदी जी ने Vadodara bus terminal का उद्घाटन किया था। सबने इसे Airport जैसी सुविधाओं वाला बताया....
फिर भी, मोदी जी खुद इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। लेकिन सवाल है जनता सवाल किससे पूछे?
कौन है वो नेता, अधिकारी, मंत्री जो ऐसी घटनाओं को होने से रोक सकता है? जिसकी मौत हुई उसे उचित मुआवजा कौन देगा?
जिसने कंस्ट्रक्शन में करप्शन का खेल किया, उसे सजा कौन दिलाएगा?
सुनो अशोक, तुम्हारे वीर कितना बड़ा माफिवीर था, उसका पूरा कच्चा चिट्ठा... तुम भी वही हो...
बस सावरकर अंग्रेजों की पेंशन ले रहे थे, और तुम जनता के टैक्स की सैलरी, और दलाली Extra..
The present CM of Assam is the most corrupt in the country. He will not escape the law. His abuse of state power to harass his political opponents and critics is against the Constitution.
The questions that are being raised have to be probed. Transparency, accountability of power and rule of law are the basis of our Constitutional values.
The Congress Party stands with Pawan Khera. We will not be intimidated.
इससे शर्मनाक क्या हो सकता है। भारत को वोट कटवाने के काम में ग्लोबल रोल ले लेना चाहिए। जहाँ भी चुनाव हो रहे हों वहाँ चुनाव आयोग को भेज कर वोट कटवाने में मदद कर सकता है।