@Sachingupta भाई ये वाला छाप 55 रुपया किलो थोक रेट में मिलता है
और वही असली सोयाबीन वाला 100 रुपये का 250 ग्राम है
अब बताओ बेचने वाला ग़लत की ख़रीदने वाला
वही पनीर 160 रुपया किलो थोक रेट
जिसको खा कर मरना हो ओ मरे
आज त्रिलोकपुरी में मेरा पर्श जेबकतरों के द्वारा निकाल लिया गया जिसमे 15000 रुपये थे
मैंने तुरंत ही एक जेब कतरा पकड़ा और अपना बटुआ छुड़ा लिया
मेरा तो मिल गया लेकिन ऐसे हजारों लोगो की जेब कटती है दिल्ली में ,और दिल्ली पुलिस सो रही है @DelhiPolice
जेबकतरों के पास चाकू भी था
आज त्रिलोकपुरी में मेरा पर्श जेबकतरों के द्वारा निकाल लिया गया जिसमे 15000 रुपये थे
मैंने तुरंत ही एक जेब कतरा पकड़ा और अपना बटुआ छुड़ा लिया
मेरा तो मिल गया लेकिन ऐसे हजारों लोगो की जेब कटती है दिल्ली में ,और दिल्ली पुलिस सो रही है @DelhiPolice
जेबकतरों के पास चाकू भी था
@askrajeshsahu चाक जानते हो जिसे दुद्धी बोलते थे हम लोग पढ़ाई के टाइम पर
वही मिलाया जाता है
पब्लिक को भी 150 रुपये में 5 किलो आटा खाना है तो चक्की वाले क्या करे
पेपर लीक पर कानून जब बनेगा तब बनेगा, आप पहले ये जान लीजिए कि यूपी में दो विधायक खुद भी पेपर लीक के आरोपी हैं। दोनों बीजेपी के साथ गठबंधन में सरकार में हैं।
पहले हैं- बेदीराम। ये ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा से इस वक्त गाजीपुर की जखानिया सीट से विधायक हैं। दूसरे हैं- विपुल दुबे, ये संजय निषाद की निषाद पार्टी से इस वक्त भदोही की ज्ञानपुर सीट से विधायक हैं।
2006 में रेलवे ग्रुप-D का पेपर लीक हो गया था, परीक्षा रद्द करना पड़ा था। इसमें इन दोनों माननीयों को आरोपी बनाया गया था।
बेदीराम पर तो रेलवे भर्ती पेपर लीक से जुड़े 5 मामले हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन के 2 व पुलिस भर्ती एग्जाम का 1 मामला दर्ज है। विपुल दुबे पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज है। अब दोनों ही कहते हैं कि हमारे ऊपर दर्ज मामला झूठा है।
सवाल यही है कि जब पेपर लीक के आरोपी विधायक बनेंगे, तब दूसरे आरोपियों में डर कैसे आएगा, वह तो उत्साहित होंगे कि ऐसा करके विधायक बना जा सकता है।