सोशल मीडिया के इंफ्लूएंसर भी गजब हैं ।
जब विपक्ष किसी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनता तो विपक्ष को नकारा बताते हैं।
और जब विपक्ष आंदोलन को बल प्रदान करता है तो कहते हैं कि आंदोलन को विपक्ष ने हाईजैक कर लिया है ।
अरे घोंचू , आन्दोलन का मुद्दा तो बरकरार है न ,
फिर काहे दर्द हो रहा है।
दिन रात लाली लिपस्टिक, स्किनकेयर टाइप ट्वीट करने वाली लड़कियां भी आज मौके का फायदा उठाते हुए अपने ट्वीट से सरकार को नसीहत दे रही है। अरे बहन थोड़ा थम जाओ और अपना बाली, झूमके पर पोट करो, तुम्हारे पॉलिटिकल ट्वीट्स पूरी तरह इलोजिकल लग रहे हैं..।
सिस्टम कोई अलग चीज़ नहीं है, सिस्टम भी हम लोगों से ही बनता है।
पेपर लीक करने वाला भी कोई इंसान है, और अपने बच्चों के लिए पेपर खरीदने वाला भी।
नेता विपक्ष में रहते हुए बदलाव की बातें करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही अक्सर वही सिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं।
और कल जो बेरोज़गार लाठियां खा रहे थे, उनमें से कुछ अगर कल सरकारी नौकरी में आ जाएँ, तो वही लाठी बेरोज़गारों पर चलाते भी दिख सकते हैं।
जब तक सोच नहीं बदलेगी, सिर्फ चेहरे बदलने से सिस्टम नहीं बदलेगा।
सरकार से गुज़ारिश है इन्स्टाग्राम और फेसबुक को जल्द बैन करे, वर्ना आपका अगला भविष्य यानी देश का युवा सब एक इमोशनल फुल मानसिक रोगी इन्फ्लुएंस जॉम्बी की तरह घुमते नजर आएंगे, इनको अता पता कुछ नही कानुन और धारा की लेकिन हरकते कार्ल मार्क्स और चे ग्वेरा जैसे करना है।
इंसान के दिमाग का वजन लगभग समान हो सकता है,लेकिन सोचने,समझने और विवेक से निर्णय लेने की क्षमता हर व्यक्ति में अलग होती है यही कारण है कि कुछ लोग दूसरों की सोच और भावनाओं को प्रभावित या नियंत्रित कर लेते हैं...!
ये अनपढ़ जाहिल गंवार छात्र,
माननीय, आदरणीय, धर्मेंद्र प्रधान के बारे में कुछ नहीं जानते है, धर्मेंद्र जी के ऐसे ऐसे देशहित में कार्य हैं कि उनकी पूजा होनी चाहिए, उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए।
सुनिये उनके बारे में सुप्रसिद्ध चाटुकार कश्यप जी से -