(राष्ट्र सर्वोपरि, राजनीति बाद में )
पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, युवा राष्ट्रीय पिछड़ावर्ग संघ (उत्तर प्रदेश)
_
संस्थापाक व कोषाध्यक्ष--( प्रो यूथ फाउंडेशन )
"सांसद अरुण गोविल ने मेरठ के सेन्ट्रल मार्केट में आकर खुद से दुकानों के शटर उठाये, व्यापारियों को लड्डू खिलाये और आश्वासन दिया कि अब उनकी दुकानें नहीं तोड़ी जाएंगी... 15 दिन बाद उसी सेन्ट्रल मार्केट पर बुल्डोजर चल गया"
: अक्षय जैन "अरिहंत" (मेरठ मंडल प्रभारी, सपा व्यापार सभा)
ये चाय के प्याले में तूफ़ान खड़ा करना चाहते हैं।
आंदोलनों को बदनाम करने की भाजपाई ख़ुराफ़ात को देश किसान आंदोलन के समय ही समझ चुका है। अब ये चाल नहीं चलेगी ।
यूपी के नोएडा के एक घर में पांच लाशे मिली है, पांचो पति-पत्नी और तीन बच्चे हैं, फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई जा रही है
मुख्यमंत्री बिष्ट ठाकुर आदित्यनाथ और भाजपा के राज में मिलावटी खाद्य पदार्थ, दूषित भोज्य पदार्थ, जहरीली सब्जी और फल धड़ल्ले से बिक रहे हैं और इस सब जहरीले और नकली भोज्य पदार्थ के धंधों के पीछे भाजपाई हैं तथा इन सबको सीधा-सीधा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का वरदहस्त प्राप्त है
पूर्व में भी हिंदू युवा वाहिनी का एक नेता पिसी धनिया के मामले में गधे की लीद मिलाता पकड़ा गया था, सोचिए जरा, कि यह भाजपा की सरकार हम सबको किस तरह से एक-एक करके जान से मार रही है
भाजपा सत्ता में रहेगी तो सबकी जान जाएगी?
आख़िर मोदी सरकार में लोकतंत्र की मूल भावना असहमति अपराध कैसे हो गयी है ?
हमारे राष्ट्रीय प्रतीक तिरंगा फहराने को अपराध क्यो मान लेती है तानाशाही रवैया की सरकार?
दिल में उतर गये वो लोग और थे
जो प्यार कर गये वो लोग और थे।
गुलशन के फूल-फूल पे शबनम की बूँद से
हँसकर बिखर गये वो लोग और थे।
जो दर-ब-दर गये वो लोग और थे
जो प्यार कर गये वो लोग और थे।
हाथों में हाथ बांधकर 'संतोष' रह गया
कुछ कर गुज़र गये वो लोग और थे।
- संतोष आनन्द
नेताजी की यादों को सलाम!
राज्यसभा की बात करनेवाले उप्र के मुख्यमंत्री जी में अगर रत्ती भर भी लाज-शर्म-हया हो तो भाजपा द्वारा बनाए गए सिक्किम के विवादित ‘राज्यपाल’ के बारे में बोलें।
उत्तराखण्ड की बेटी के प्रति उप्र के मुख्यमंत्री जी का भी तो कोई दायित्व बनता है या नहीं। उत्तराखण्ड छोड़ आए तो क्या नैतिकता भी छोड़ आए हैं।
देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी की आवाज़ किसी बच्ची के साथ हुए पाप के ख़िलाफ़ निकलती है या भयभीत होकर उनकी घिग्घी बंध जाती है। हमारी उनसे अपील है कि यदि उनमें अंश मात्र भी धर्म है तो वो एक आरोपी को राज्यपाल बनाने के फ़ैसले का घोर विरोध करें। ये उनको सीधी चुनौती है, नहीं तो वो सदैव के लिए मौन धारण कर लें। फिर तो यही माना जाएगा कि इसमें उनकी ख़ामोश सहमति भी शामिल है।
दिल्ली का ड्रोन-दूरबीन तो सिक्किम तक नहीं देख पा रहा है देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी का बुलडोज़र वहाँ तक पहुँचाता है या नहीं।
आज पूरे देश की हर बेटी और उनके माँ-बाप भाजपा के इस फ़ैसले से बेहद आक्रोशित हैं कि भाजपा ने घोर निंदनीय निर्णय लेते हुए अपने दल के एक ऐसे व्यक्ति को सिक्किम का राज्यपाल बनाया है जिसके घिनौने कुकृत्यों की वजह से एक बच्ची के साथ अन्याय हुआ और उसकी हत्या भी कर दी गई।
भाजपा बेशर्म अपराधियों का गिरोह है।
उत्तराखण्ड की बेटी के साथ न्याय हो!
डॉ. लोहिया ने अपने समय के और बाद के बहुत-से साहित्यकारों, लेखकों, चित्रकारों, रंगकर्मियों यथा सर्वेश्वरदयाल सक्सेना, रघुवीर सहाय, रामधारी सिंह 'दिनकर', आचार्य दादा धर्माधिकारी, धर्मवीर भारती, यूआर अनन्तमूर्ति, महादेवी वर्मा, श्रीकांत वर्मा, प्रयाग शुक्ल, नंदकिशोर आचार्य, राजकिशोर, नंद चतुर्वेदी, रमेशचंद्र शाह, इंदुमति केलकर, मक़बूल फ़िदा हुसैन, आदि को अपनी वैचारिकी व पारदर्शी जीवनशैली से प्रभावित किया। डॉ. धर्मवीर भारती कहते हैं, "पंडित नेहरू ने भारत की खोज की और डॉ. राममनोहर लोहिया भारत से एकाकार थे"। आगे वे लोहिया के मोहक व्यक्तित्व के जादू को कुछ इस तरह बयां करते हैं, "समता, स्वातंत्र्य और सौंदर्य के त्रिविध आयामों वाला उनका वह व्यक्तित्व, संपूर्णता के सम्पूर्ण भाव से जीने की उमंग वाला वह व्यक्तित्व, अपने सांवलेपन में कभी-कभी त्रिभंगी कृष्ण की छवि क्यों मारता था, यह मैं अक्सर सोचा करता हूँ"।
जब डॉ. लोहिया गुज़रे तो बड़े ही मर्मस्पर्शी ढंग से सर्वेश्वर ने उन्हें याद किया।
लोहिया के न रहने पर / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
लो, और तेज़ हो गया
उनका रोज़गार
जो कहते आ रहे हैं
पैसे लेकर उतार देंगे पार।
तुम्हारी घनी भौहों के बीच की
वह गहरी लकीर
अभी भी गड़ी है वहाँ बल्ली-सी
जहाँ अथाह है जल
और तेज़ है धार।
मैं साधारण…
(इसी शब्द से तो था
तुम्हें इतना प्यार)
कहता हूँ: ओ मेरे देशवासियो
एक चिंगारी और।
बर्फ़ में पड़ी गीली लकड़ियाँ
अपना तिल-तिल जलाकर
वह गरमाता रहा,
और जब आग पकड़ने ही वाली थी
ख़त्म हो गया उसका दौर
ओ मेरे देशवासियो
एक चिंगारी और।
खाली पेट पर
जो रखकर चराग़
तैराते जा रहे हैं
अपने ऐश्वर्य के सरोवर में,
बुझती आँखों के जो
बनाकर बन्दनवार
सजाते जा रहे हैं
संसद और विधानसभाओं के द्वार
उनको गया है वह समूल झकझोर
ओ मेरे देशवासियो
एक चिनगारी और।
अब वह नहीं है ‘गया’
यही शब्द देगा
फिर अर्थ नया।
तीन आने भी जब नहीं बचेंगे जेब में
आँख पूरी खुलेगी जब
फँसे हुए झूठ में, फरेब में
उन्हीं घनी भौंहों की तब गहरी लकीर
करकेगी जैसे आधा चुभा तीर।
ओ मेरे देशवासियो
छूट न जाए कहीं क्रान्ति की डोर
एक चिनगारी और।
हाँ, वह गहरी लकीर
खेतों में हल के पीछे-पीछे चली गई है,
झोपड़ियों को थामे है शहतीर-सी
हर मोड़ पर मिलेगी इंगित करती,
मज़बूत रस्से की तरह ऊँचाइयों पर चढ़ाती
गहराइयों में उतारती।
मैं साधारण…
वैसी नहीं दीखती है
मुझे कहीं और
ओ मेरे देशवासियो
उसके नाम पर
एक चिनगारी और।
उसने थूका था इस
सड़ी-गली व्यवस्था पर
उलटकर दिखा दिया था
कालीनों के नीचे छिपा टूटा हुआ फ़र्श,
पहचानता था वह उन्हें
जो रँगे-चुने कूड़े के कनस्तरों से
सभा के बीच खड़े रहते थे।
उसके पास थी एक भाषा
प्यार और सम्मान से जीने के लिए
जिसे वह मन्त्र नहीं बनाता था।
जहाँ सब सिर झुकाते थे
वहाँ भी उसका सिर ऊँचा उठा रहता था,
जिधर राह नहीं होती थी
उधर ही वह पैर बढ़ाता था
फिर बन जाती थी एक पगडंडी
एक राजमार्ग जिन पर दूसरों के
नामों की तख़्तियाँ लग जाती थीं।
निहत्था अकेला वह गुज़र गया
‘चौआलीस करोड़’ लोगों के
दिल में से नहीं
एक जलती सलाख-सी
दिमाग़ से।
अपनी ख़ाली जेबों में
पाओगे पड़ा हुआ तुम उसका नाम
इतिहास करे चाहे न करे अपना काम।
सन्तों की दुकानों के आगे
खड़ी रहेगी उसकी मचान
भेड़ों के वेश में निकलते कमीने तेन्दुओं पर
तनी रहेगी उसकी दृष्टि।
ओ मेरे देशवासियो
बनना हो जिसे बने नए युग का सिरमौर…
अभी तो उसके नाम पर
एक चिंगारी और।
एक चिंगारी और –
जो ख़ाक कर दे
दुर्नीत को, ढोंगी व्यवस्था को,
कायर गति को
मूढ़ मति को,
जो मिटा दे दैन्य, शोक, व्याधि,
ओ मेरे देशवासियो
यही है उसकी समाधि ।
मैं साधारण…
मुझे नहीं दीखती कोई राह और
जिधर वह गया है
उधर उसके नाम पर
एक चिंगारी और।
***
इस छवि-अंकन को देख कर मुझे बरबस एक प्यारा शेर याद आ रहा है:
तस्वीर तेरी लायक़-ए-मेयार बना कर
दानिस्ता मुसव्विर ने क़लम तोड़ दिया है।
वहीं, अनिल जैन जी बताते हैं कि समाजवादी विचारक और चिर विद्रोही डाॅ. राममनोहर लोहिया का यह छवि-अंकन उनके दोस्त और मशहूर चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन की कूची से हुआ था। इसे एक समय की बहुचर्चित और लोकप्रिय पत्रिका 'रविवार' ने अपने आवरण पृष्ठ पर छापा था।
ज्ञान प्रकाश लोहिया को कुछ इस तरह याद करते हैं:
डॉ. लोहिया साठ के दशक में संसद पहुंचे। जिस अंग्रेज़ी का संसद की ज़बान पर क़ब्ज़ा था, उसका तिलिस्म टूटने लगा। संसद की गैलरी में हिंदी पत्रकारों के मुरझाए चेहरे खिल उठे। अब संसद के सवालों में रिक्शा वाले थे, सुक्खो रानी थी, मुंबई के स्लम थे, बैल और कुदाल पर आश्रित तीन आना वाला हिंदुस्तान था। असली हिन्दुस्तान अब संसद में दाख़िल हो चुका था। राष्ट्रकवि दिनकर ने "एनार्की" में लिखा:
तब कहो लोहिया महान है,
एक ही तो वीर
मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ कि ये बाहर आ गए जिन्होंने जंतर मंतर पर लड़की के कपड़े फाड़े थे उससे मारपीट की थी।
इससे पहले पहले भी ऐसे कई अपराधियों का स्वागत फूल मालाओं से किया गया है यहां तक कि रेप की सजा काट रहे आरोपी का भी स्वागत किया गया है।
इसमें सिर्फ हिन्दू रक्षा दल नहीं इसमें बैकसपोर्ट इन्हें सिस्टम से मिल रहा है।
हैरानी की बात है कि ऐसे मामले में कौन इन्हें जमानत दे दिया जबकि लाइव विजुअल्स कैमरे में कैद थे।
ये लड़के लड़किया छेड़ रहे रहे थे पुलिस इनको परेड करा रही है इनका नाम सुभाष पाल और दक्षा पाल है
ये ग़लत किए इन्हें सजा मिलनी चाहिए तुम परेड कराओ या एनकाउंटर करो
लेकिन सवाल है वाराणसी में जब तीन बीजेपी से जुड़े नेताओं ने रेप किया था तब क्यो परेड नहीं कराया
जाती देखकर कार्यवाही करते हो
देश की संवैधानिक संस्थाएं अपनी साख खो चुकी है। सबसे पहले इन तानाशाहों ने जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता को ख़त्म किया और अब चुनाव आयोग तो उनसे भी दस कदम आगे निकल लोकतंत्र का ही हत्यारा बन गया। ज्ञानेश जैसे लोगों ने जनविश्वास और लोक आस्था का क़त्ल किया है।
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के इशारे पर ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को कुचलने का काम किया है। ज्ञानेश कुमार ने एक कठपुतली की तरह काम किया है, उसके लिए उसे सजा जरूर मिलेगी। ये लोग बच नहीं पाएंगे।
यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या पार्टी की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और हर नागरिक के अधिकारों की है। INDIA गठबंधन के सभी दल लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट हैं। लोकतंत्र बचाने के लिए हम कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार है।
आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी के साथ चाय पर चर्चा के दौरान मुलाक़ात और संवाद हुआ।
लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की रक्षा और जनता की आवाज़ को बुलंद करने के संकल्प के साथ यह संवाद महत्वपूर्ण रहा।
लोकतंत्र की रक्षा, संविधान का सम्मान — यही हमारी प्रतिबद्धता है। 🇮🇳
#RahulGandhi #SamajwadiParty #INDIAAlliance #SaveDemocracy #Constitution #PushpendraSaroj
तिरुअनंतपुरम
➡️केरलम विधानसभा में बड़ा फैसला
➡️ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित
➡️मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
➡️मतदाता सूची से बाहर किए गए पात्र नागरिक
➡️पात्र नागरिकों के अधिकार बहाल करने की मांग
➡️चुनाव आयुक्तों के चयन प्रक्रिया में बदलाव का सुझाव
➡️CM वी.डी. सतीशन ने बताया ऐतिहासिक क्षण
➡️केरलम ने इतिहास रचा- CM वी.डी. सतीशन
➡️पहली बार विधानसभा में प्रस्ताव पारित
➡️CEC को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित
#KeralaAssembly #GyaneshKumar #ElectionCommission @ECISVEEP
हम इस देश के ज़िम्मेदार राजनैतिक दल हैं। हम क़तई नहीं चाहते कि हमारे देश के हालात श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल जैसे हों! इस तरह की बात जो कोई भी करते हैं, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के शब्दों में, "वे इतिहास से अनजान हैं, वर्तमान की समझ नहीं है उन्हें, भविष्य के प्रति वे आंखें बंद किये हुए हैं"।
हम बस इतना चाहते हैं कि बड़ी मशक़्क़त से अर्जित इस लोकतंत्र में लोगों का भरोसा वापस हो, और इसके लिए ज़रूरी है कि चुनाव आयोग सत्तारूढ़ दल से अपने अनैतिक गठजोड़ को यथातिशीघ्र तोड़ ले!
जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से ग़ायब कर दिये गये हों, उनसे जब यह कहा जाए कि कोई बात नहीं, अगली बार वोट डाल लेना, तो आपको इस बात की कोई परवाह नहीं है कि उनके मन में आप किस तरह का भाव उपजा रहे हैं। इस तरह की अनर्गल चाल पर अगर स्वायत्त और वैधानिक संस्थाएं आंखें मूंद लें, तो वे इस देश के साथ न्याय नहीं कर रही हैं, और उन्हें अपनी कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के लिए गंभीरता से सोचना चाहिए।
जो लोग भी यह जघन्य अपराध कर रहे हैं, वे बच कर निकलेंगे नहीं, यही अवाम का संदेश है! हसरत जयपुरी के शब्दों में, "समझने वाले समझ गये हैं / जो न समझे वो अनाड़ी है"!
सत्यमेव जयते!