Official Account of Rahul Sharma, Youth icon of Chhattisgarh, India, Director @bcentservices || Journalist @HamarAwaaz | @muckrack || RTs are not endorsements.
महामहिम राज्यपाल महोदय का हृदय से आभार 🙏
“रेडियो संगवारी” के 3 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आपके स्नेह, मार्गदर्शन एवं सराहना के लिए धन्यवाद।
यह हम सभी के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।
#RadioSangwari#Gratitude
राज्यपाल श्री रमेन डेका से लोकभवन में रेडियो संगवारी की टीम ने सौजन्य मुलाकात की।
इस दौरान टीम के संस्थापक श्री राहुल शर्मा ने रेडियो संगवारी की परिकल्पना, उद्देश्यों तथा आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
माननीय जी द्वारा “रेडियो संगवारी” के लिए व्यक्त किए गए आत्मीय शब्दों एवं शुभकामनाओं के लिए पूरी टीम हृदय से कृतज्ञ हैं 🙏
आपका यह स्नेह, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन हमारे लिए ऊर्जा का स्रोत है। यह हमारे प्रयासों को और अधिक समर्पण एवं निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और बोली-भाषा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से “रेडियो संगवारी” द्वारा किया जा रहा प्रयास अत्यंत सराहनीय है।
आज इस पहल के बारे में विस्तृत चर्चा हुई और यह जानकर प्रसन्नता हुई कि यह मंच स्थानीय कलाकारों, युवाओं और व्यवसायों को एक नई पहचान देने का कार्य कर रहा है।
मेरा विश्वास है कि “रेडियो संगवारी” छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अभिनव पहल के लिए “रेडियो संगवारी” की पूरी टीम को बहुत शुभकामनाएं एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना।
@DrCharandas माननीय जी द्वारा “रेडियो संगवारी” के लिए व्यक्त किए गए आत्मीय शब्दों एवं शुभकामनाओं के लिए पूरी टीम हृदय से कृतज्ञ हैं 🙏
आपका यह स्नेह, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन हमारे लिए ऊर्जा का स्रोत है। यह हमारे प्रयासों को और अधिक समर्पण एवं निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
@GovernorCG@radiosangwari महामहिम राज्यपाल महोदय का हृदय से आभार 🙏
“रेडियो संगवारी” के 3 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आपके स्नेह, मार्गदर्शन एवं सराहना के लिए धन्यवाद।
यह हम सभी के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।
#RadioSangwari#Gratitude
@IARP111@TiwariRBL01 तुम्हे MP और MLA में फर्क समझ आता है की जो भी अंधभक्ति में सही लगता है बक देते हो, राघव जी की मांग बिल्कुल जायज और आम जनता के हित में है ।
भाजपा आईटी सेल वाले रो रहे 🖐️
इनके नेताओ को खुल्ला गालिया पड़ रही बचाव न कर पा रहे खुल्ला कम्युनिटी नोट्स लग रहा बेचारे तिलबिला के रह जा रहे
सच्च बात तो ये है भाजपा आईटी सेल की बदौलत नही हमारे जैसे लोगो को वजह से चर्चा में थी सोसल मीडिया पर
जब हमने ही हाथ पीछे कर लिया तो इनका नरक तय है
एक बात बहुत स्पष्ट कर देना चाहता हूं:-
- हम किसी पार्टी के खिलाफ या समर्थन में नहीं लड़ रहे हैं।
- हम किसी पार्टी को हराने या जिताने का दंभ भी नहीं भर रहे हैं।
- हम सरकार बनवाने या गिरवाने का दावा भी नहीं ठोकते हैं।
- लेकिन हम लड़ रहे हैं अपने अस्तित्व के लिए। प्रायोजित तरीके से चलाए जा रहे एजेंडे के खिलाफ
- हम लड़ रहे हैं इस देश में राजनीतिक रूप से हाशिए में धकेले जाने के ख़िलाफ़
- हम लड़ रहे हैं लगातार फैलाए जा रहे झूठ आधारित जातीय नफरत के ख़िलाफ़
- हम लड़ रहे हैं हिंदू विरोधियों के महिमामंडन के खिलाफ
- हम लड़ रहे हैं आजादी के बाद से पिछले 78 सालों से लगातार अत्याचार और शोषण के खिलाफ
बात में दम है और जो बोलते है डंके की छोट में बोलते है, @narendramodi जी बहुत बड़ी भूल हुई है हमसे, आपको अंधा समर्थन करके बहुत पछतावा भी है, स्क्रीनशॉट लेकर रख लीजिए इस बार आपकी सरकार मुंह की खाएगी ।
ओहो! सरकार ने तो कोर्ट में यूजीसी का समर्थन नहीं किया न! अब तो स्टे लग गया, फिर क्यों विरोध कर रहे हो? सीधी बात है कि पैसे लिए हैं तुमने।
इतनी सीधी बात है तो बता दो किससे पैसे लिए हैं। मैं तो 15 जनवरी से लिख-बोल रहा हूँ, मुझे पैसे दिलवा दो, जो भी बाँट रहा है।
दूसरी बात, कोर्ट से स्टे का क्या मतलब है? वापस हुआ? क्या मध्यप्रदेश से ले कर भागलपुर तक इसी तरह के कानून अभी भी विश्वविद्यालयों में नहीं हैं? क्या सरकार समर्थन कर के भी कोर्ट में दो मिनट टिक पाती?
तुम्हें सच में लगता है कि बात केवल यूजीसी की है? जब तुम नाच रहे हो कि मोदी मुस्लिमों को आरक्षण नहीं देगा, उससे वर्षों पहले मोदी के गुजरात समेत कई राज्यों में (जिसमें भाजपा शासित भी सम्मिलित हैं) मुसलमानों को ओबीसी में आरक्षण मिल रहा है। किसे चूरन बाँट रहे हो?
हर दिन एससी/एसटी/ओबीसी के नाम पर निःशुल्क स्कूल और हॉस्टल खुल रहे हैं। बजट का बहुत बड़ा हिस्सा (2,37,400 करोड़ केवल SC/ST के लिए) आरक्षण भी मिल रहा है और फीस भी नाम मात्र का, या शून्य, देना है। और फंड कौन कर रहा है? वही जिसके बच्चे का एडमिशन रोक दिया है सरकारों ने।
यह यूजीसी तो ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक फर्डिनांड की हत्या जैसी है। यह तो लास्ट स्ट्रॉ ऑन कैमल्स बैक है। यूजीसी का प्रभाव शैक्षणिक वातावरण की विषाक्तता को ले कर होगा, पर सरकार की नीतियों का क्या जो एक के बाद एक लादी जा रही है और लक्षित कर के सामान्य वर्ग को बाहर किया जा रहा है।
हमारी समस्या इस पूरी सोच से है जो मुल्ले की टोपी न पहनने को ले कर बीस साल से नाच रही है, हल्ला कराती है जो बात कॉन्ग्रेस तेलंगाना में करने जा रही है, वो भाजपा होने नहीं देगी, पर वास्तव में यही काम तुम हर जगह भिन्न-भिन्न रूपों में कर रहे हो।
बदला केवल इतना है कि कल तो जो इसे अनदेखा करते थे, प्रतिभा के दम पर सर झुका कर आगे बढ़ते थे, उन्हें अब यह स्कीम समझ में आ गई है और उन्हें किसी भी पार्टी के आने या जाने का भय समझ में नहीं आ रहा।
भय तो मेरे जैसों को है जो विजिबल हैं, जो वामपंथी, कॉन्ग्रेसी, सपाई, टीएमसी, डीएमके से ले कर अब भाजपा के भी निशाने पर हैं। हमारे जैसे सौ-पचास के अतिरिक्त, सामान्य मतदाता को क्या फर्क पड़ेगा जो यह मान कर बैठे हैं कि भाजपा उनके बच्चों का भविष्य नेपाल-भूटान-श्रीलंका-यूक्रेन में देख रही है, भारत में तो केवल एससी-एसटी-ओबीसी रहेगा। नहीं समझ में आ रहा तो किसी गाँव में इस पर सर्वेक्षण करना लीजिए कि मोदी समर्थक सवर्ण अब मोदी के बारे में क्या कह रहे हैं।
फिर उन्हें सड़क-हॉस्पिटल-एयरपोर्ट से बहुत मतलब नहीं रह जाता। बात बच्चों की है, सामान्य वर्ग मोदी जी का त्रिपुंड बहुत देख चुका है जिसकी ऊपरी धारी एससी की है, बीच में एसटी है, नीचे ओबीसी और जो बीच का लाल रक्तिम तिलक है, वह सामान्य वर्ग का रुधिर है।
मोदी जी को लग रहा हो कि उनके ‘चाय ठंढी करके पीने’ की आदत इस आक्रोश को ठंढा कर देगी तो फिर आप जान लीजिए कि सामान्य वर्ग ने ग्यारह वर्ष धैर्यपूर्वक कोल्ड कॉफी ही पी है। उसने आपकी हर ऐसी जातिवादी नीति का समर्थन ही किया, पर इस बार अति हो गई।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहन कुमारी मायावती जी ने फ़िल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर कड़ी आपत्ति जताई है।
उन्होंने कहा कि फिल्मों में ‘पंडित’ को घुसपैठिया बताकर ब्राह्मण समाज का लगातार अपमान किया जा रहा है।
बसपा इस जातिसूचक फ़िल्म की निंदा करती है और
केंद्र सरकार से तत्काल प्रतिबंध की मांग करती है।
आज हालात ऐसे हैं कि
अपनों से बेहतर पराए निकले,
जो खुलकर बोल तो रहे हैं,
जबकि अपनी ही जाति–बिरादरी के कई नेता
अब भी मुँह में ताला लगाए बैठे हैं।
#Mayawati
#घूसखोर_पंडित
#ब्राह्मण_समाज
#जातीय_अपमान
#न्याय
मुझे आज बड़ी शर्म आ रही है, मैं जिस सुधांशु त्रिवेदी और संबित पात्रा की तारीफ़ करता था, वो चुप रहे।
लेकिन प्रियंका जी ने UGC पर संसद में भाजपा के धागे खोल दिये।
भारत के 40 करोड़ मेरिट समर्थक लोग आपके पीछे खड़े है।
@priyankac19 🔥✅
देश की एक मात्र सांसद प्रियंका चतुर्वेदी जी है
जिन्होंने सवर्ण विरोधी कानून UGC के नए नियमों के खिलाफ़ उच्च सदन में खड़े होकर विरोध किया है।
और केंद्र सरकार से UGC को खत्म करने की मांग की है।
क्या कोई भाजपा कांग्रेस का ब्राह्मण सांसद, विधायक मंत्री इस तरह की माँग कर सकता है?
चित्रा जी ने ऐसा क्या कहा, की सोशल मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणियाँ हो रही है।
भारत के 40 करोड़ लोग, जो मेरिट और शिक्षा की बात करते है, वो सभी त्रिपाठी जी का समर्थन करते है। 🔥✅
#UGC_RollBack 🙏
ये दिन इतिहास में दर्ज हो गया।
भाजपा ने पिछले 15 दिनों में जितनी चुप्पी साधी है, जितना अपने लोगो के साथ धोखा किया है।
शायद ही कोई अपने कोर वोटर के साथ करे।
SP, RJD कभी यादवो के साथ करेगी ?
BSP कभी दलित के साथ करेगी ?
INC कभी अल्पसंख्यक के साथ करेगी ?
कभी नहीं ।।
लेकिन भाजपा ने अपने कोर वोटर के 30 सालो के रिश्ते की धज्जियाँ उड़ा दी।
हम हमेशा ये दिन याद रखेंगे। 🙏
#UGC_RollBack
#UGCRegulations 🤷🏻♂️
BJP को UGC का आक्रोश समझना होगा....
Epstein files के नाम पर कांग्रेस लगातार PM पर हमलावर है, उनके गंदे वीडियो बनाकर वायरल किए जा रहे हैं...
लेकिन
BJP का IT सेल उनका रत्तीभर की काउंटर नहीं कर पा रहा है..!
जो लोग निस्वार्थ भाव से BJP विरोधी नैरेटिव को ध्वस्त करते थे, वो UGC के गुस्से में चुप बैठ गए हैं....
- बजट सत्र के शुरू होने पर वंदेमातरम का अपमान हुआ लेकिन BJP इसे मुद्दा नहीं बना सकी
- बजट पेश हुआ लेकिन सोशल मीडिया पर कोई बज नहीं बन सका
- PM मोदी की इमेज पर हमले हो रहे हैं लेकिन BJP इसका काउंटर नहीं कर पा रही है....
अन्यथा जो लोग UGC के नाम पर BJP से नाराज हैं, वो नाराज न होते और कांग्रेस या विदेशी ताकतें PM पर ऐसे हमले करती तो अभी तक ये लोग सोशल मीडिया को धुआं धुआं कर दिए होते....
UGC विरोधी सवर्ण समाज किसी जाति या वर्ग का विरोध नहीं कर रहा है, वो सिर्फ समानता की मांग कर रहा है कि कानून ऐसा बनाओ जो सभी पर समान रूप से लागू हो न कि कानून बना ही नीति पर हो कि एक वर्ग पहले से ही शोषक माना जाएगा...!!!
हालांकि एप्सटीन फाइल्स की आड़ में PM मोदी के चरित्र हनन का विरोध करती हूँ ...!
लेकिन एक सच ये भी है कि PM मोदी के प्रति पूर्ण समर्पित रहा बड़ा वर्ग उनकी पार्टी से नाराज है और इसका सीधा असर नैरेटिव वार और इन्फॉर्मेटिव वार पर पड़ रहा है, मोदी विरोधी ड्राइविंग सीट पर हैं और BJP ताकत से काउंटर नहीं कर पा रही है....
देश का राष्ट्रपति कौन है देश का प्रधानमंत्री कौन है देश का गृहमंत्री कौन है यह जाकर देखा कि आरक्षण कहां तक दिया था, 70 साल हो गए देश के सर्वोच्च पद के ऊपर कौन बैठा है फिर भी अगर तुम्हें आरक्षण चाहिए तो एक बात मान लो तुम्हारे हाथ पैर टूट चुके है,
#UGC_RollBack#UGCRollBack
UGC की स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन दिग्विजय सिंह ने तो कमाल कर दिया!
बड़ा बयान दिया है उन्होंने कहा है कि झूठी शिकायतों पर कार्यवाही न करने का प्रावधान और सामान्य वर्ग का जिक्र न करने का फैसला उनका नहीं, बल्कि UGC का था!
मतलब सीधे-सीधे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पूरी सरकार पर इल्ज़ाम लगा दिया कि सामान्य वर्ग को पीसने की साजिश रची गई थी!
अब तो सवाल खड़ा हो गया है ना?
क्या शिक्षा मंत्री सामने आएंगे?
क्या सरकार स्पष्टीकरण देगी?
क्या बताएंगी कि असल मंशा क्या थी जनरल कैटेगरी के छात्रों-शिक्षकों को बिना सुरक्षा के छोड़ना?
या फिर फिर वही पुराना खेल चुप्पी साध लेंगे, मुद्दा दब जाएगा?
देश के युवा, खासकर सामान्य वर्ग के छात्र इंतज़ार कर रहे हैं... जवाब दो!
सच सामने लाओ!
अबकी बार क्या होगा?
#UGCControversy #EducationMinisterJawabDo"
उर्मिलेश यादव जी, वैसे तो आप लबालब बेशर्मी से भरे तालाब में पूरी तरह से डूबे हुए हैं लेकिन फिर भी अगर कहीं कोने में अगर थोड़ी भी शर्म और लज्जा हो तो कृपया फैक्ट तो सही रखें। नहीं तो बायो में:- पत्रकार लिखना छोड़ दें।
भारत सरकार का आंकड़ा है कि यूनिवर्सिटी में 34% प्रोफेसर आरक्षित वर्ग से हैं। वहीं सर्वविदित है कि सामान्य वर्ग (ओपन केटेगरी) में भी आधे आरक्षण वाले वैसे ही सेलेक्ट होते हैं! इस तरह यूनिवर्सिटी में 60% से ज्यादा प्रोफेसर ग़ैर सवर्ण हैं। हाँ उसमें कौन समाज कितना है ये जानने के लिए आपको प्रोफ़ेसरों की जाति गिनवानी पड़ेगी।
इसलिए “जातीय नफ़रत से अंधे इस फ़टे कच्छे में पैबंद लगाइए।” अब बुजुर्ग हो गए हैं। उम्र के इस पड़ाव में तो सही फैक्ट बताइए। ये 90 का दशक नहीं है जहां-“जिसकी लाठी उसकी भैंस”। यहाँ पूरी सच्चाई सबके सामने है।