Om Parvat is a majestic Himalayan peak in the Pithoragarh district of Uttarakhand, India (near the Nepal border). It is famous for a rare, naturally occurring phenomenon where snow rests on the black mountain face to perfectly resemble the sacred Hindu symbol Om (ॐ).
@Munsyari_
सोचने वाली बात है कि,
अमेरिका में बैठा अभिजीत दीपके कुछ ही दिनों में 1 करोड़ फॉलोवर जुटा लिया और बेरोजगारों का नेतृत्वकर्ता बन गया है।
यही अभिजीत दीपके 2020 से 22 तक AAP के सोशल मीडिया टीम में था, ये पत्रकारिता भी कर चुका है और अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी से
पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई भी कर चुका है।
मौके का फायदा उठाकर Cockroach Janta Party बना ली और अब ये बेरोजगार युवाओं के इमोशन का फायदा उठाएगा और उन्हें भड़कायेगा।
मासूम Gen-Z इसके झांसे में आ गए हैं अब ये उन्हीं को आगे करके अमेरिका में बैठकर अपनी दुकान चलाएगा।
बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप गैलेक्सी स्पेस ने आज स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से अपने उपग्रह मिशन दृष्टि का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
इस उपलब्धि के साथ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है।
#MissionDrishti@GalaxEye
Exercise #CINBAX II 2026
The Indian Army contingent departed today for the second edition of India - Cambodia Bilateral Military Exercise CINBAX-II. The exercise is scheduled to be conducted at Techo Sen Phnom Thom Mreas Prov Royal Cambodian Air Force Training Centre (Camp Basil), Kampong Speu Province, Kingdom of Cambodia from 04 to 17 May 2026.
The exercise will be conducted with focus on Company level joint training for conduct of operations in sub-conventional environment.
#IndiaCambodiaPartnership
@MEAIndia@DefenceMinIndia@SWComd_IA@indembcam
𝐆𝐚𝐥𝐚𝐱𝐄𝐲𝐞 𝐬𝐮𝐜𝐜𝐞𝐬𝐬𝐟𝐮𝐥𝐥𝐲 𝐥𝐚𝐮𝐧𝐜𝐡𝐞𝐝 𝐌𝐢𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧 𝐃𝐫𝐢𝐬𝐡𝐭𝐢.
India’s private space sector reached a major milestone as Bengaluru-based startup #GalaxEye Space successfully launched its flagship satellite, Mission Drishti, aboard a #SpaceX Falcon 9 today.
The mission marks a significant leap for India’s commercial space ecosystem, showcasing advanced indigenous innovation on a global launch platform.
तमिलनाडु क��� थूथुकुडी जिले में मिले जीवाश्म ने सबको चौंका दिया है.
यहां 8,000–12,000 साल पुराने समुद्री जीवाश्म (Bivalves) और (Gastropods) मिले हैं.
भारी बारिश और मिट्टी के कटाव ने इस छिपे खजाने को उजागर किया. यहां से वैज्ञानिकों ने 104 नमूने जुटाए, जिसकी और जांच की जाएगी.
यह स्थल समुद्र की मौजूदा तटरेखा से लगभग 5-7 किमी अंदर स्थित है. ये प्राचीन काल में समुद्र के स्तर में हुए परिवर्तनों के बाद तटरेखा के खिसकने का संकेत देता है.
यह खोज हमें Holocene युग की झलक देती है. होलोसीन काल लगभग 11,700 साल पहले शुरू हुआ और वर्तमान में चल रहा है.
ये fossils हमें बताते हैं कि समुद्र का स्तर और पर्यावरण कैसे बदलते रहे.
#Thoothukudi #TamilNadu #fossil @ZoologicalI
15 दिन, 1 ज़िम्मेदारी, पूरे राजस्थान का भविष्य 📊
1-15 मई 2026 | स्व-गणना | राजस्थान
डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी पहल जनगणना 2027 में आपकी भागीदारी चाहिए।
घर बैठे मोबाइल से करें स्व-गणना।
वीडियो देखिए और समझिए, टैग करें अपने 3 दोस्तों को #census2027#census2027raj
यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है।
20 जुलाई 2021 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा था कि “भारत सरकार ने नीति के रूप में यह निर्णय लिया है कि जनगणना में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के अलावा अन्य जातियों की गणना नहीं की जाएगी।”
21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर यह कहा था कि उसने जाति जनगणना न कराने का एक सोच-समझकर लिया गया नीतिगत निर्णय किया है।
28 अप्रैल 2024 को एक टेलीविजन इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना की मांग उठाने पर कांग्रेस पर ‘अर्बन नक्सल मानसिकता’ का आरोप लगाया था।
30 अप्रैल 2025 को, जब देश कुछ दिन पहले हुए पहलगाम आतंकी हमले के सदमे से उबर भी नहीं पाया था, तभी मोदी सरकार ने अचानक घोषणा कर दी कि आगामी जनगणना के हिस्से के रूप में जाति जनगणना कराई जाएगी।
30 मार्च 2026 को एक व्यापक रूप से रिपोर्ट की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त ने कहा था कि चल रही जनगणना 2027 के अधिकांश परिणाम 2027 में ही उपलब्ध हो जाएंगे, क्योंकि पूरी जनगणना डिजिटल तरीके से की जा रही है।
लेकिन अब मोदी सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन करना चाहती है, यह कहते हुए कि जाति जनगणना के परिणाम कुछ वर्षों तक उपलब्ध नहीं होंगे-जबकि यह तथ्य नजरअंदाज किया जा रहा है कि बिहार और तेलंगाना दोनों ने व्यापक जातिगत सर्वेक्षण छह महीने से भी कम समय में पूरा कर लिया था।
प्रधानमंत्री हमेशा की तरह देश को गुमराह कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर भ्रम फैलाने में लगे हैं। अब वे उस प्रावधान में संशोधन करना चाहत�� हैं, जिसे संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था। सीधा सीधा छिपा हुआ एजेंडा यही है कि जाति जनगणना कराना ही नहीं है।
#Tamilnadu (जिला दिंडीगुल, गांव कमनूर) में महत्वपूर्ण मेगालिथिक (महापाषाण) निर्माण मिले हैं.
#ASI की निगरानी में चल रहे उत्खनन में 7 डोल्मन चेंबर्स मिले हैं. इसके प्रमाण हैं कि इस ढांचे को सोच-समझ कर व्यवस्थित तरीके से बनाया गया था.
आधार को मजबूत करने के लिए मिट्टी, छोटे पत्थर और टूटे बर्तनों का इस्तेमाल किया गया. चारों ओर पत्थर के स्लैब की दीवार बनाई गई है.
यहां लोहे के औजार, छेनी, तीर और तलवार मिली है. यहां मिले मिट्टी के बर्तनों में red ware, black ware और black & red ware शामिल हैं.
कार्नेलियन, अगेट, जैस्पर लैपिस लाजुली बीड्स के साथ ही ढेर सारे इंड��-पैसिफिक ग्लास बीड्स भी मिले हैं, जिससे साबित होता है कि ये समाज ग्लोबल ट्रेड नेटवर्क से जुड़ा था.
ध्यान रहे लैपिस लाजुली अफगानिस्तान में मिलता था. कार्नेलियन का प्रयोग स्थानीय समाजों में प्रतिष्ठा और धार्मिक महत्व के लिए होता था. यानि ये बीड्स सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और बड़े क्षेत्र में फैले व्यापार के प्रतीक हैं.
#Megalithic #Archaeology #Dindigul @ASIGoI
मैं गिरफ्तारी से डरता नहीं हूं.... 17 बार जेल हो आया...28 बार गिरफ्तार हो गया... वैसे आपको पता है, पिछले शासन मे भी मैं ढाई साल ही मंत्री रहा... वसुंधरा जी से टंटा हो गया तो बाहर निकाल दिया : कृषि मंत्री @DrKirodilalBJP
https://t.co/vbSI3I9yfH
@dineshdangi84 अ���नी माँ की सेवा करके उसने कोई उपकार नहीं किया है। वह तो उसकी फ़र्ज़ है।
लोगो को बताने की कोई जरूरत नहीं है।
मगर माँ की सेवा को राजनीतिक उपयोग करना सबसे घटिया बात है।
प्रकृति के आंचल से निकला एक दुर्लभ चमत्कार।
189 वर्षों बाद फिर से दिखी हेन्केलिया मोनोफिला, अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में हुई अहम खोज। भारत की जैव विविधता की समृद्धि का जीवंत उदाहरण।
#Biodiversity#Nature#ArunachalPradesh
महान विचार अक्सर भीड़ में नहीं, बल्कि शांति में जन्म लेते हैं। जब दिमाग बाहरी सूचनाओं से मुक्त होता है, तब वह अपनी कल्पना की परतों को खोलता है। चाहे लेखक हों, कलाकार हों या वैज्ञानिक, उन्होंने अपनी श्रेष्ठ कृतियाँ एकांत की गोद में ही रची हैं।
कोलंबिया ने अपने अमेज़न के 42% हिस्से में नए तेल और खनन प्रोजेक्ट्स पर प्रतिबंध लगाकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया, यह क्षेत्र लगभग स्वीडन के आकार के बराबर है।
यह जंगल दुनिया के सबसे समृद्ध जैव-विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है, जहाँ सिर्फ एक हेक्टेयर में 300 तक पेड़ प्रजातियाँ पाई जा सकती हैं।
अमेज़न हर साल लगभग 1.5 अरब टन CO₂ अवशोषित करता है, जिससे वैश्विक जलवायु संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो की यह नीति विकास के पारंपरिक मॉडल को छोड़कर प्रकृति और जलवायु संरक्षण को प्राथमिकता देती है।
जनता का समर्थन ज़बरदस्त है, लेकिन असली सफलता इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने में ही निहित है।