@nsdlpb@NSDL_Depository
Aap logo ki service itni kharab h maine bhut baar try Kiya h koi call nhi uthata h agr helpline pr call kre to km se km aise hi call chlti rhegi
Jb aap log help nhi kr sakte payment m to helpline number hi kya jari kiya koi call uthata h nhi..
@priyanshu__63 Yrr teri nzr m bhujan neta ki value itni niche h kya priyanka ghandi Aaj tk MP h bhn ji 4 baar cm bn gyin h unko uper rkh na aor akhilesh yadav ek baar cm bne h usko tk tune uper rkha h akl nhi h kya tujme yrr bilkul bhi
@priyanshu__63 तो दिला दी शपथ तुम लोगों की वजह से बो अनिल बडवा इतना उछल रहा है तुम लोगों ने बिना मतलब में उसको फेम दिला दी अब उसका इलाज करो बो बडवा कुछ न कुछ बोलता रहता है
@DINESHPATEL_up भाई जाटव सपा का गुलाम थोड़ी है या जाटव मुसलमान की तरह थोड़ी है कि सपा को वोट देंगे
हमारा वोट बहन जी को जाएगा सुन लो आप कान खोल के और यह पीडीए करना बंद करो
चल मैं मानता हूं संतोष वर्मा का बयान गलत है मैं भी उसकी निंदा करता हूं ऐसा नहीं कहना चाहिए था किसी की बहन बेटी को लेकिन जो तेरे समाज ने हमारे समाज का शोषण किया उसे पर तो तेरा मुंह नहीं खुल लिया जो हजारों सालों से तुम लोगों ने हमारा बहन बेटियों के साथ जानवर जैसा व्यवहार किया उसे पर तो तू नहीं लिख रही है तुम लोग तो हमारी बहन बेटियों से स्तन टैक्स तक लेते थे उसे पर तो कुछ नहीं बोल रही है जो तेरे पूर्वजों ने हमारे साथ किया उसे पर तो नहीं बोल रही है कुछ भी
ब्राह्मण बहनों-बेटियों का अपमान: अब चुप्पी नहीं सहेगी अस्मिता!
IAS संतोष वर्मा ने जो बयान दिया, वह केवल ब्राह्मण समाज को नीचा दिखाने का प्रयास तो था ही, साथ ही ब्राह्मण समाज की बहनों-बेटियों का खुलेआम अमर्यादित अपमान था। उसने जिस तरह ब्राह्मण बहन बेटियों की मर्यादा का हनन किया, उसमें ब्राह्मण माँ-बहनों के प्रति घोर असम्मान झलकता है। यह कोई साधारण टिप्पणी नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी जिसका मकसद था – ब्राह्मण समाज की महिलाओं की गरिमा को सार्वजनिक रूप से लांछित करना।
लेकिन सबसे बड़ा आघात यह है कि सत्ता के सिंहासन पर विराजमान भाजपा के तथाकथित ब्राह्मण नेता आज भी मुँह सिले बैठे हैं। न कोई बयान, न कोई निंदा, न कोई कार्रवाई की माँग। क्यों? क्योंकि उनके लिए सत्ता की कुर्सी अपनी बहन-बेटियों के सम्मान से कहीं ऊपर है। जिस पार्टी को ब्राह्मणों ने वर्षों तक वोट देकर सत्ता तक पहुँचाया, उसी पार्टी के नेता आज अपनी ही बहनों के अपमान पर मौन धारण किए हुए हैं। यह मौन नहीं, विश्वासघात है।
जब-जब ब्राह्मण समाज और उसकी बहनों-बेटियों पर इस तरह का अमर्यादित हमला हुआ है, तब मैदान में केवल दो योद्धा खड़े दिखे हैं –
@Adv_Anil_Mishra जी और @kalisenachief स्वामी जी।
अनिल मिश्रा जी ने न केवल कानूनी लड़ाई लड़ी, बल्कि हर मंच पर ब्राह्मण अस्मिता और केवल ब्राह्मण ही नही बल्कि हर वर्ग की बहनों के सम्मान की रक्षा के लिए डटकर मुकाबला किया। स्वामी आनंद स्वरूप जी ने भी धार्मिक मंचों से इस अपमान के खिलाफ गरजे हैं। ये दोनों ही लोग सत्ता के सामने नहीं झुके, इसलिए इनकी आवाज में सच्चाई है, इनके हौसले में दम है।
अब समय है कि ब्राह्मण समाज, खासकर ब्राह्मण बहनें-बेटियाँ, अपना असली नेता पहचानें।
जो सत्ता की चापलूसी में डूबे हैं, वे आपकी रक्षा नहीं कर सकते।
आपके लिए लड़ने वाले अभी के समय मे नेता लीजेंड अनिल मिश्रा जी हैं और स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज है, जिन्होंने आपकी अस्मिता के लिए हर कीमत चुकाने का संकल्प लिया है।
ब्राह्मण बहनें अब चुप नहीं रहेंगी।
अपमान का जवाब वोट की ताकत से और सड़क पर एकजुट होकर प्रदर्शन से दिया जाएगा।
जय श्री राम! जय ब्राह्मण अस्मिता! जय भगवान परशुराम।
ये बता रहा है की मनुस्मृति के अध्याय दो और श्लोक 66 में लिखा है की स्त्रियां वेद पढ़ने योग्य है आइये पहले हम देखते है क्या सच मे मनुस्मृति के अध्याय 2 और श्लोक श्लोक 66 में ऐसा लिखा है।
मनुस्मृति के अध्याय 2, श्लोक 66 में लिखा है:
यतोऽभ्यर्च्य नमस्कृत्य गृहस्थः कुर्वीत वै गुरून् ।
तेभ्यः प्रतीयाद् विद्वद्भिः शुश्रूषुर् विदधद् यथा
इस श्लोक अर्थ है कि गृहस्थ आदमी का कर्तव्य केवल अपना परिवार चलाना ही नही है बल्कि वो जिस गुरुकुल में पढ़ा है वहां के शिक्षकों का सम्मान करना और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा उस गुरुकुल में दान करना जिससे गुरुकुल समाज के और बच्चो को पढ़ा सके गुरुकुल में गृहस्थ को इसलिए आचार्यो शिक्षकों को सम्मान दान के बोला जाता था क्योंकि छात्रों से शिक्षा का पैसा नही लिया जाता छात्रों के लिए शिक्षा फ्री थी जब छात्र पढ़ लिखकर गृहस्थ बनता या कही नौकरी या व्यापार करता तभी उससे बोला जाता था कि अब तुम अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान करो गुरुकुलों में ताकि देश की अगली पीढ़ी भी फ्री में शिक्षा ले तुम्हारी तरह।
यानी जो ये बता रहा है कि मनुस्मृति में श्लोक अध्याय 2 और श्लोक में ऐसा लिखा है ये मनुस्मृति में नही इसकी अम्मा की......... में लिखी है।
बाकी वेद में एक नही कई मंत्रों की दृष्टा स्वयं स्त्रियां रही है यानी जो स्त्री वेद मंत्रों को ब्रह्मांड से देखकर सुनकर वेदो में लिख सकती है क्या उसे मनुस्मृति वेद मंत्र पढ़ने से मना कर सकता है? कतई नही! ये सब फर्जी सोसल मीडिया की जानकारी है इसपर भरोसा मत करिए।