Proud Indian! Kshatra Dharma! ICG(Veteran)! Former President Kshatriya Sabha! Chief National Spokesman, ABKM! W President CAPSI Haryana! RTs not endorsement.
कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों को कोटि-कोटि नमन।
उनका अदम्य साहस, असीम शौर्य और राष्ट्रप्रेम युगों-युगों तक हर भारतीय के हृदय में अमर रहेगा। जय हिंद 🇮🇳
सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्युरिटी इंडस्ट्री #CAPSI के यशस्वी चेयरमैन कैप्टन @kunwarcapsi जी के कुशल नेतृत्व में #CAPSI हरियाणा चैप्टर निजी सुरक्षा उद्योग के उत्थान और हितों के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, #CAPSI की टीम समय-समय पर उच्च सरकारी अधिकारियों से भेंट करती है तथा उद्योग के समक्ष आने वाली कठिनाइयों को उजागर करने और उनके समाधान हेतु औपचारिक प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करती है। निरंतर ��ंवाद और सक्रिय प्रयासों के माध्यम से #CAPSI इस क्षेत्र को सशक्त बनाने और इसके सतत विकास में योगदान देने का प्रयास कर रहा है। हरियाणा चैप्टर के सभी साथियों का उनके प्रयासों के लिए हार्दिक आभार 🙏
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण देश में घरेलू गैस, पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी क�� अस्थायी कमी उत्पन्न हो गई है। मैं सभी साथियों से विनम्र अपील करता हूँ कि स्थिति सामान्य होने तक सामाजिक कार्यक्रमों, जैसे विवाह, कुआँ पूजन, रस्म पगड़ी, सत्रहवीं आदि को न्यूनतम लोगों की उपस्थिति में ही संपन्न करें। अनावश्यक पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी के उपयोग से बचें। देश की वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फिजूल यात्राओं पर परहेज करें। ईंधन संरक्षण हम सबका राष्ट्रीय कर्तव्य है। इसे अपनाएँ और दूसरों को भी प्रेरित करें।
धन्यवाद।
जय हिंद 🇮🇳
राजस्थान क्षत्रिय राजपूत समाज सूरत के पूर्व अध्यक्ष एवं राजस्थान युवा संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह शेखावत का हृदय गति रुकने से असामयिक निधन अत्यंत हृदयविदारक एवं दुखदायी है।
उनका समाज के प्रति अपार योगदान एवं नेतृत्व अपूरणीय क्षति है।
परम पिता परमेश्वर उनकी दिव्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें। शोकाकुल परिजनों को इस विषम आघात को सहन करने की अटल शक्ति प्रदान करें। ॐ ���ांति 🙏
सरल-सहज स्वभाव और कर्मठ व्यक्तित्व के धनी, राजनीति में शुचिता के प्रतीक, केन्द्रीय राज्य मंत्री एवं फरीदाबाद के लोकप्रिय सांसद माननीय श्री @KPGBJP जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं। राघवेन्द्र श्री राम से हार्दिक प्रार्थना है कि वे आपको दीर्घायु, सदैव स्वस्थ, प्रसन्नचित्त एवं सफलता के सोपान प्रद���न करें।
जो लोग राजा जयचंद्र गहरवार का अपमान करते हैं, वे इतिहास और सनातन धर्म दोनों के अपमान के दोषी हैं। राजा जयचंद्र गहरवार ने काशी विश्वना�� मंदिर एवं धर्म की रक्षा हेतु चन्द्रावार की लड़ाई में अपना जीवन बलिदान किया था,जो लोग राजा जयचंद्र गहरवार का अपमान कर रहे हैँ ऐसे लोग अयोध्या जी और काशी जी जाने के नैतिक अधिकारी नहीं हैं।हम अपने धर्म और इतिहास की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। राजा जयचंद्र के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपमानजनक या झूठे प्रचार के विरुद्ध कठोर एवं विधिसम्मत कानूनी कार्यवाही की जाएगी l
"आर्थिक आधार पर आरक्षण ही स्थापित करेगा देश के हर नागरिक के मन में सामाजिक समरसता का भाव"
विकास का रास्ता जाति से नहीं, मेहनत और वास्तविक जरूरत से तय होता है। गरीबी किसी जाति को नहीं देखती, इसलिए आरक्षण भी केवल जरूरतमंदों तक ही सीमित होना चाहिए। जो परिवार आज SC, ST या OBC वर्ग से होते हुए भी आर्थिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं, उनकी अगली पीढ़ी को आरक्षण से बाहर किया जाना चाहिए, ताकि उसका लाभ उन तक पहुँचे जो आज भी वंचित हैं। जाति के नाम पर नहीं, आर्थिक न्याय के नाम पर आरक्षण समाज में वास्तविक परिवर्तन ला सकता है। समान अवसर तभी संभव हैं जब सहाय���ा जन्म या पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर दी जाए। गरीब गरीब होता है, चाहे वह किसी भी जाति का हो और तभी देश में असली सामाजिक समरसता, समानता और न्याय स्थापित होगा।
योगी आदित्यनाथ जी को पत्र लिख राजा जयचंद्र गहरवार जी के इतिहास की सही जानकारी देने का प्रयास किया है की,राजा जयचंद्र गहरवार गद्दार नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि निर्णय में प्रमाणित दानवीर वंश से थे। जिस राजा के शिलालेख 550 वर्षों बाद राम मंदिर के अस्तित्व का निर्णायक साक्ष्य बने, वह कभी विश्वासघाती हो ही नहीं सकता। विदेशी आ��्रांताओं ने असत्य कथाएँ गढ़ीं, अब सत्य को सामने लाना हमारा कर्तव्य है,राजा जयचंद्र निष्ठावान धर्मवीर थे,जिनके दान से मंदिर और गुरुकुल बने, उन्हें ‘गद्दार’ कहना इतिहास पर सबसे बड़ा कलंक है। काशी की रक्षा के लिए चंदावर के युद्ध में मोहम्मद गोरी से युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त करने वाला राजा भला विश्वासघाती कैसे हो सकता है? किंतु षड़यंत्रकारी काव्य-कथाओं ने उनके स्वर्णिम इतिहास को कुटिल रूप से अपमानित किया। भारत की ऐतिहासिक स्मृति को खंडित किया गया, राजा जयचंद्र तो सनातन धर्म के दृढ़ रक्षक थे,जिनके दादा के शिलालेख राम जन्मभूमि के न्यायिक निर्णय में मुख्य साक्ष्य बने, उसी वंश के राजा को अपमानित किया जाना घोर अन्याय है। असत्य चाहे कितने समय तक टिक जाए, अंततः सत्य की विजय अवश्य होती है राजा जयचंद्र गहरवार सत्य, पराक्रम और धर्म के प्रतीक थे। क्षत्रिय समाज को राजा जयचंद्र का खोय�� सम्मान वापस दिलाना ही होगा। षड़यंत्रकारी इतिहासकारों ने सदियों तक जो भ्रम फैलाया, अब उसे मिटाने का समय है, राजा जयचंद्र गहरवार दान, धर्म, शौर्य और मर्यादा के प्रतीक थे, मुहम्मद गोरी से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए क्षत्रिय राजा को ‘गद्दार’ कहना सभ्यता-विरोधी है। रामभक्त राजा जयचंद्र पर लगाया गया झूठा आरोप अब धुलना ही चाहिए जिसके दोषी इतिहास का विकृतीकरण करने वाले देशद्रोही हैं
गोरखनाथ पीठ का सदियों से चला आ रहा संघर्ष ही श्री राम मंदिर की वास्तविक नींव है। योगी आदित्यनाथ जी के दादा-गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी उदयपुर, राजस्थान के सिसोदिया राजपूत थे। 22 दिसंबर 1949 को अयोध्या जी में जब प्रभु श्री राम का प्राकट्य हुआ, उ�� ऐतिहासिक क्षण में उनकी भूमिका ��तनी विशाल थी कि श्री राम मंदिर आंदोलन का जनजागरण, संगठन और आंदोलन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का कार्य महंत दिग्विजयनाथ जी ने ही किया। वे केवल गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर ही नहीं थे, बल्कि मेवाड़ के राजघराने से उनका गहरा संबंध था, जिसके बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। महंत दिग्विजयनाथ जी की व्यक्तित्व-विशालता ऐसी थी कि वह देश की आजादी से पहले से ही वीर सावरकर जी से भी बड़ी और प्रभावशाली श���्सियत माने जाते थे और वीर सावरकर जी के बाद वे हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनकी इस महान विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य महंत अवेद्यनाथ जी ने किया, जो स्वयं योगी आदित्यनाथ जी के गुरु थे। समझ नहीं आता कि इतने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य और महापुरुषों के योगदान आज भी आम लोगों और समाज के बीच क्यों नहीं पहुँच पाए हैं। @GorakhnathMndr @myogiadityanath
आरक्षण सामाजिक न्याय का साधन नहीं बल्कि राजनैतिक लाभ का हथियार बन गया है,
आरक्षण समय के साथ सामाजिक न्याय का माध्यम ना रह कर राजनीतिक लाभ का हथियार बन गया है। आरंभ में इसका उद्देश्य था कि SC, ST और OBC जैसे ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के समान अवसर मिलें लेकिन आज आज़ादी के 75 साल बाद भी करोड़ों गरीब परिवार बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छ पानी से वंचित हैं। इसके उलट, कुछ समृद्ध आरक्षित-परिवारों ने पीढ़ियों से आरक्षण का फायदा उठाकर आर्थिक ऊँचाइयाँ हासिल की हैं, और वे इसे अपना स्थायी अधिकार मानकर नए, असल में गरीब परिवारों को पीछे छोड़ रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा कटु सच यह है कि क्षत्रिय समाज इस व्यवस्था से सबसे अधिक हाशिए पर गया है,क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर क्षत्रिय वर्ग गरीब ही रहा, जबकि राजनीतिक आरक्षण की राजनीति ने उन्हें न्याय के असली अवसरों से वंचित कर दिया है, सच्चा सामाजिक न्याय वही है जो सबको समान अवसर दे #आरक्षण
हरियाणा राज्य भर में #दिल्ली घटना के मद्देनजर #हाई_अलर्ट।
लोगों से अनुरोध है कि शांत रहें।
कोई संदिग्ध व्यक्ति या लावारिस वस्तु दिखे तो ☎️ 112 पर सूचित करें।
सारे #पुलिस अधिकारी अपने-अपने इलाके में हैं।
��ंटर-स्टेट बॉर्डर पर व्हीकल चेकिंग की जा रही है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पार्किंग एरिया, होटल-धर्मशाला की भी चेकिंग की जा रही है।
एनसीआर जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
#StayAlert
Report suspicious/activities persons at ☎️ 112.
गोलोकवासी श्रीजी हुज़ूर महाराणा साहब महेंद्र सिंह जी मेवाड़ की प्रथम पुण्यतिथि पर शत-शत नमन।
आपकी सत्यनिष्ठा, जन-��मर्पण और स्नेहिल आशीर्वाद सदैव प्रे��णा बने रहेंगे।
#श्रद्धांजलि
#vishwarajsinghmewad
आदरणीया....
Meera Kumar जी के मन में एक संशय आया और उन्होने पोस्ट किया कि ब्रह्मा के मुख से ब्रा���्मणों का जन्म हुआ तो मैथु न कैसे किया मुख में?? प्रश्न उनका विस्तार पूर्वक था। मैने संक्षित में लिखा है। उसका उत्तर वहाँ न देकर मैं पोस्ट को माध्यम से इसका उत्तर देना चाहता हूँ इससे जो धारणाएँ और भ्रान्तियाँ संस्कृत भाषा के ग्रंथों का उचित अनुवाद न करने के कारण या सोच-विचार कर दुष्प्रचार करने के लिए की गईं है उसका खंडन भी हो सके और आप तक सही जानकारी पहुँचाने के लिए आवश्यक भी हो गया था।
तो उत्तर इस प्रकार हैः-
‘ब्रम्हा’ नहीं वह शब्द,
‘ब्रम्ह है वो शब्द है परब्रह्म…समाज रुपी शरीर का वर्णन ऋग्वेद में है।
ब्रा॒ह्म॒णो॑ऽस्य॒ मुख॑मासीद्बा॒हू रा॑ज॒न्य॑: कृ॒तः । ऊ॒रू तद॑स्य॒ यद्वैश���य॑: प॒द्भ्यां शू॒द्रो अ॑जायत ॥
पद पाठ
ब्रा॒ह्म॒णः॑ । अ॒स्य॒ । मुख॑म् । आ॒सी॒त् बा॒हू इति॑ । रा॒ज॒न्यः॑ । कृ॒तः । ऊ॒रू इति॑ । तत् । अ॒स्य॒ । यत् । वैश्यः॑ । प॒त्ऽभ्याम् । शू॒द्रः । अ॒जा॒य॒त॒ ॥ १०.९०.१२
ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:90» मन्त्र:12 | अष्टक:8» अध्याय:4» ��र्ग:19» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:7» मन्त्र:12उपलब्ध भाष्य
पदार्थान्वयभाषाः -
(अस्य) इस समष्टि पुरुष का (ब्राह्मणः) ब्राह्मण वर्ण (मुखम्-आसीत्) मुख है मुखस्थानीय है, जैसे मुख में गुण हैं, ऐसे सर्वकाल में नग्न रहना, तपस्वी होना, ज्ञानेन्द्रियों से युक्त होना, ज्ञानी होना तथा त्यागी होना, ऐसा ही ब्राह्मण को होना चाहिये (बाहू राजन्यः-कृतः) भुजाओं में शोधन, रक्षण व त्राण होते हैं, ऐसे क्षत्रिय में होने ��ाहिये (अस्य तत्-ऊरू) इस पुरुष की जङ्घाएँ वैश्य हैं अर्थात् वैश्य धन-धान्य-पशु का संग्रह करता है, यथापात्र विभाजन भी करता है (पद्भ्यां शूद्रः-अजायत) पैरों के तुल्य शूद्र होता है, पैरों के समान श्रमप्रवृत्तिवाला शूद्र है ॥१२॥
सरलीकरण करके व्याख्याः-
अर्थात् ब्राह्मण वो समाज का अंग होगा जो वेदपाठ करेगा, जैसा स्थान मुख का होता है वो अपने ��्री मुख से वेद पाठ, अध्यापन का कार्य करेगा, सात्विक होगा।
क्षत्रिय वो होगा जो भुजाओं का अर्थात बाहुबल का प्रयोग करके रक्षा का कार्य करेगा।
वैश्य जो व्यापार, व्यवसाय या वाणिज्य से पोषित करने का कार्य करने वाला रोज़गार देने वाला, होगा जैसे शरीर की जंघा होती है उस पर समाज की अर्थव्यवस्था खड़ी रहती है।
और अंतिम श्रमिक वर्ग का कार्य करने वाला वो होगा जिसका जो हर प्रकार के शारीरिक श्रम वाले क��र्य करेगा और जिसका कार्य स्तर इसी भाँति होगा जो स्थान पुरुष देह के पैरों में होता है।
समाज को पुरुष देह की भाँति लाक्षणिक रूप से मान कर हर वर्ग के कार्य को उस पुरुष देह में यहाँ स्तर दिया गया है।
जैसे हमारे स्कूल में मास्टर जी किसी भी व्यवस्था को उदाहरण के माध्यम से समझाते थे लाक्षणिक रूप से, वैसे ही ऋग्वेद में पुरुष सूक्त से यह श्लोक लिया गया है। जिसे कुछ दुष्ट मानसिकता के लोगों ने ग़लत अनु���ाद करके भ्रामक प्रचार किया है।
आशा है आपको और बाक़ी सभी को समझ आ गया होगा कि हमारे ग्रंथों का अध्ययन आप स्वयं करे और उसके लिए गूगल बाबा का प्रयोग न करें।
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