माननीय @DrMohanYadav51 जी गेहूं की फसल का उपार्जन शुरू भी नहीं हुआ, ना ही मंडिया चालू हैं, सहकारी समिति का ऋण (सोसायटी) जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च से बढ़ाकर 30 अप्रेल करने की कृपा करें अन्यथा किसान आंदोलनरत होने की कगार पर है। आम किसान यूनियन एमपी। जय किसान @CMMadhyaPradesh
नियमित रहने की मंशा से किसान की गुहार है, सेवा सहकारी समिति (सोसायटी) में केसीसी जमा करने की तारीख बढ़ा दीजिये @DrMohanYadav51 जी, गेहूं कटाई चल रही है, एमएसपी पर उपार्जन आरम्भ नही हुआ हैं। नियमित किसान भी डिफाल्टर हो जाएगा। कितना ब्याज भरवाओगे?
@DrMohanYadav51@CMMadhyaPradesh
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्॥
जिसके दाहिने लक्ष्मण हैं, बाएँ जनकनंदिनी सीता हैं, और जिसके सम्मुख पवनपुत्र हनुमान हैं, मैं उन रघुकुलनंदन श्रीराम को नमस्कार करता हूँ।
On whose right stands Lakshmana, on whose left Sita ji, and in front of whom stands Hanuman ji, I bow to that scion of the Raghu dynasty - Shri Rama.
किसानों को कठिन परिश्रम के बाद भरी बरसात में सोयाबीन पका कर घर लाने में 4 महीने लगते है परंतु वही सोयाबीन मंडी में व्यापारियों द्वारा महज 40 सेकंड में 3800,,4000 के भाव में 1,,2,,3 कर दी जाती है जो की आत्मनिर्भर भारत के लिए दुख का विषय है😔
#सोयाबीन_भाव_6000_करो@ChouhanShivraj
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये जाने की घोषणा से अत्यंत प्रसन्नता हुई।
आजीवन किसानों के लिए समर्पित चौधरी साहब ने किसान कल्याण के लिए अनेक कार्य किए। चौधरी साहब जीवनपर्यंत लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के प्रति समर्पित रहे और उन्होंने आपातकाल का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने अपने निर्णयों से पूरे देश को यह बताया कि किसान का बेटा देश के भरण-पोषण से लेकर नीतिगत निर्णय भी ले सकता है।
चौधरी साहब के सम्मान के माध्यम से देश के करोड़ों किसानों और मेहनतकश लोगों को सम्मानित करने के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार व्यक्त करता हूँ।
हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहां तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की। वे आपातकाल के विरोध में भी डटकर खड़े रहे। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए उनका समर्पण भाव और इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के लिए उनकी प्रतिबद्धता पूरे देश को प्रेरित करने वाली है।