बुलंदशहर के एक गांव मे अम्मा नूर जहाँ कई दशक से, संसाधन ना होने के कारण बिना बिजली के ही जीवन गुज़ार रही थी!😔
फिर अचानक एक दिन पुलिस गश्त के दौरान आईपीएस अनुकृति शरमा का वहां से गुज़र हुआ और उनकी नज़र जब इस बूढ़ी अम्मा के घर पर पड़ी और पता चला के इनके घर मे अभी तक बिजली का कनेक्शन तक नहीं,
तो तुरंत ही उन्होंने बिजली विभाग फ़ोन कराया और अपने खर्चे से उनके घर मीटर और बिजली की फिटिंग कराई!
फिटिंग होने के बाद अम्मा से ही स्विच ऑन कराया तो अम्मा के चेहरे की खुशी देखने लायक थी, ये सब देखकर जहाँ बहुत खुशी भी हुई के असली अफसर की यही पहचान होती है जो गरीब जनता का दर्द समझकर उनके चेहरे पर खुशी लाने का प्रयास करते हैँ,
साथ मे दुख भी हुआ के अमीर, अमीर से और अमीर होता जाता है, और गरीब आज भी इस हाल मे अपनी पूरी जिंदिगी गुज़ार देता है, जहाँ उसके पास बेसिक सुविधा भी नहीं!
अनुकृति शरमा जी और उनकी टीम को दिल से सलाम जिन्होंने एक बूढ़ी अम्मा को अपने जीवन के आख़िरी पड़ाव मे ये खुशी दी!🫡❤️👇
देहरादून से बहुत बड़ी खबर!
मुस्लिम लड़कों की गैंग ने राहुल, पवन और मिशेल ने बनकर देहरादून में सोशल मीडिया पर 10+ हिंदू लड़कियों से दोस्ती की।
उन्होंने लड़कियों को नौकरी और मॉडलिंग के ऑफर का लालच दिया, फिर उन्हें ड्रग दिया, रेप किया और उनका वीडियो बनाया, और पीड़ितों को एस्कॉर्ट का काम करने के लिए मजबूर किया।
फरहान की मां और बेगम भी इसमें शामिल थीं, जो घर पर लड्डू गोपाल की मूर्ति रखकर हिंदू बनकर घूम रही थीं।
बजरंग दल ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया
My son missing inbetween from Gurugram to surat train please look this matter seriously
Please help to check it with all stations CCTV camera
@rpf_dg ,@AshvaniVaishna4@rp_india
जंतरमंतर पर आंदोलन भले ही समाप्त हो गया
पर कुछ यादें छोड़ गया
जो केवल एक ही सवाल पैदा कर रहा
समाज किस दिशा में जा रहा है..?
इन बच्चो के माँ बाप क्या खुद से नजर मिला पा रहे होंगे..?
माननीय प्रधानमंत्री जी,
पेपर लीक बंद करना है तो:
NSA और UAPA लगाइए
BNS की धारा 111 लगाइए
नार्को पॉलीग्राफ टेस्ट करिए
100% संपत्ति जब्त करिए
नागरिकता समाप्त करिए
03 महीने में जाँच पूरी करिए
01 वर्ष में आजीवन कारावास दीजिये
@PMOIndia@narendramodi
CJP आंदोलन का असली चेहरा बेनकाब! 🚨
एक सिख भाई ने सच उजागर कर दिया है: इस भीड़ में 20% भी छात्र नहीं हैं। यह छात्रों के हक़ की लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वालों का जमावड़ा बन चुका है।
धीरे-धीरे पूरा देश इनका असली एजेंडा समझ रहा है।