महाराणा प्रताप
निमण करूं वीरवर रांगड,पातळ ने परणाम करूं।
नाम सुणै काळजो धूजै,अकबर रह्यो डरू फरूं।।
वाह रे देश भगत सूरमा,थारी तो कोई होड नही।
चेतकडो समरांगण लूंठो,ऐहडो दूजो घोड नही।।
भलै जनमियो भारत मे भड,थूं इन्दर सूं कम नी हो।
थारे सामी टक्कर लेयलै,किणी दुश्मण में दम नी हो।।
कवि-कलम में वो ताकत,मूर्ख को विद्वान बना देती।
गिरे मनुज में गुण भर के,दुनिया में महान बना देती।।
सामान्य नारी युवती को,महान सुंदरी कर देना।
खूबसूरती के सारे गुण,पल भर में ही भर देना।।
पत्थर को हीरा करने की,गजब की क्षमता होती है।
पूतना के स्तन का विष तो,कुंती की ममता होती है।।