*आजकल जब कोई हमारी आलोचना करता है, हम तुरंत सफाई देने क्यों लगते हैं?*
क्योंकि भीतर कहीं हमें डर होता है कि कहीं लोग हमें गलत न समझ लें।
मनोविज्ञान में इसे दूसरों की स्वीकृति की जरूरत से जोड़ा जा सकता है।
लेकिन हर आरोप का जवाब देना जरूरी नहीं होता।
हर बात को सही साबित करना भी जरूरी नहीं होता।
कभी-कभी शांत रहना कमजोरी नहीं, भावनात्मक परिपक्वता है।
आप जानते हैं कि आप कौन हैं, इसलिए हर किसी की राय को बदलने की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेते।
जो आपको समझना चाहता है, वह आपके व्यवहार से समझेगा।
और जो गलत समझना चाहता है, उसे कितनी भी सफाई दे दें, वह अपनी धारणा नहीं बदलेगा।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
#स्वीकृति
खेजड़ली वृक्ष मेला।
हर साल खेजड़ली में ये मेला लगता है जो वृक्षों के हितार्थ शहीद हुए 363 महापुरुषों की याद दिलाता है।
कल ये मेला भरने वाला है आप चाहे तो इस पर्यावरणीय मेले को देखने आ सकते है।
प्रदेश और देश में महंगाई और बेरोज़गारी की मार:
महँगाई की मार अलग, बहन-बेटियाँ जानती हैं कि क्या बीतती है रसोई में उनको । बेरोज़गारी अलग है, नरेगा बंद कर दिया। अब बताइए, सोनिया गांधी जी और मनमोहन सिंह जी लेकर आए थे नरेगा स्कीम। दुनिया में ऐसी कोई स्कीम नहीं थी जिसमें गाँव वालों को अधिकार दे दिया गया था कि आपको 100 दिन का रोज़गार जब कभी माँगोगे, तो क़ानून के अंतर्गत मिलेगा, कोई भीख नहीं माँग रहे हो। आपको मिलेगा, कलेक्टर मना नहीं कर सकता और नहीं मिलेगा तो घर बैठे पेंशन मिलेगी, आधा पैसा मिलेगा। यह क़ानून पास किया भारत सरकार ने।
अब बताइए, उस नरेगा को बंद करना इतना बड़ा इन्होंने ज़ुल्म किया है जनता पर। अब अकाल पड़ रहा है। आपके यहाँ फिर भी मैंने रामलाल से पूछा तो प्रतापगढ़ में थोड़ी बरसात हुई है, छोटी-मोटी खेती हो रही है यहाँ पर। बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, बाक़ी आप जाइए पश्चिमी राजस्थान में, सब जगह हालात ख़राब, 22 ज़िले में भयंकर अकाल की स्थिति हो गई है।
अकाल पड़ने का मतलब पशुओं को चारा गायों के लिए, पीने का पानी मनुष्यों के लिए भी और पशुओं के लिए भी, रोज़गार की बहुत बड़ी समस्या और नरेगा बंद हो गया। नरेगा था, अकाल पड़ भी गया तो कोई तकलीफ़ नहीं होती थी क्योंकि नरेगा में काम मिल जाता था।
अब आपके नई स्कीम लेकर आ गए, 'जी राम जी'। अरे, भगवान का नाम क्यों बदनाम कर रहे हो यहां पे ? राम जी का नाम क्यों बदनाम करते हो? महात्मा गांधी के नाम पे नरेगा थी, रोज़गार की गारंटी थी, अब गारंटी नहीं है। स्टेट गवर्नमेंट को 40% पैसा देना पड़ेगा, पहले 10% देना पड़ता था। अब आप देखना कितनी तकलीफ़ होगी पूरे राजस्थान के अंदर गाँव वालों को, कोई सोच नहीं सकता। हम बार-बार चेता रहे हैं सरकार को अभी से ही कि आप तैयारी शुरू करें अकाल के काम खोलने की, पीने के पानी की व्यवस्था करें, पशुओं के चारे की व्यवस्था करें।
हम विपक्ष में हैं, हम दबाव ही दे सकते हैं। दबाव दे रहे हैं सरकार पर। और आप देख रहे हो सरकार की स्थिति क्या है, सरकार को परवाह ही नहीं है। सरकार या गवर्नेंस, शासन नाम की चीज़ नहीं है राजस्थान के अंदर। हमें चिंता सता रही है कि वास्तव में जिन गाँवों में अकाल पड़ा हुआ है, अगर टाइम पे अकाल के काम नहीं खुले, चारे का प्रबंध नहीं हुआ तो कितनी गायें मर जाएँगी।
स्थान- जन आक्रोश यात्रा महारैली, प्रतापगढ़. 30 अगस्त 2026.