चूरू जिले के सुजानगढ़ क्षेत्र के ग्राम मूंदड़ा में लोकदेवता श्री वीर तेजाजी महाराज की मूर्ति को असामाजिक तत्वों द्वारा खंडित किए जाने की सूचना अत्यंत निंदनीय है। इस प्रकार की घटनाएं समाज की आस्था और सामाजिक सौहार्द को आहत करने का प्रयास हैं।
राज्य सरकार तेजाजी की मूर्ति खंडित करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्यवाही करें
@PoliceRajasthan@ChuruPolice@BhajanlalBjp
पाली शहर के एक निजी विद्यालय परिसर में विद्यालय कर्मचारी राघवेंद्र शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु अत्यंत दुःखद एवं चिंताजनक है। इस प्रकरण में विद्यालय के DVR में आग लगना, CCTV फुटेज से जुड़े रिकॉर्ड रूम में आग लगने जैसी घटनाएं कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से अपील करता हूं कि पीड़ित पक्ष की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ सकारात्मक निर्णय लेते हुए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान करें। इस संबंध में पाली कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है।
शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें।
@PoliceRajasthan
रोटी कमाने निकली थी ज़िंदगी से जंग नहीं,
सत्ता के काफिलों के आगे उसकी कोई उमंग नहीं।
एक बेटी झुलस गई फिर भी जवाबदेही कहीं नहीं,
जनता पूछ रही है सरकार से, आखिर गलती किसकी थी?
#राजस्थान_में_आपातकाल
मैंने पूर्व में भी कहा था और आज पुनः दोहरा रहा हूँ कि यदि राजस्थान के मुख्यमंत्री का काफिला निकलने के कारण किसी आमजन का ठेला पलट जाए और एक बेटी खौलते पानी से गंभीर रूप से झुलस जाए, तो यह किसी भी संवेदनशील शासन के लिए गंभीर चिंतन का विषय होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में संवेदनहीन दिखाई दे रहे है। चूँकि यह मामला मुख्यमंत्री के काफिले से जुड़ा है, ऐसे में यदि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा में थोड़ी भी नैतिक संवेदनशीलता होती, तो वे गंभीर रूप से झुलसी उस बेटी की सुध लेते तथा उसके समुचित उपचार की व्यवस्था करवाते। किंतु सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार को मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का शायद एहसास ही नहीं है।
जाँच के नाम पर मात्र खानापूर्ति कर मामले को दबाने का प्रयास करने के बजाय दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए थी तथा पीड़ित बेटी के उपचार स्वयं मुख्यमंत्री को करवाना चाहिए था किंतु जिनकी सोच और कार्यशैली में ही संवेदनहीनता व्याप्त हो, उनसे पीड़ितों के दर्द और जनता की भावनाओं को समझने की अपेक्षा करना कठिन प्रतीत होता है।
@BhajanlalBjp@RajCMO
@hanumanbeniwal बेटी दर्द से कराहती रही, व्यवस्था तमाशा देखती रही,
संवेदनाओं की बातें करने वाली सरकार खामोश बैठी रही।
न्याय में देरी भी अन्याय है, यह बात याद रखिए,
पीड़िता को इंसाफ मिले, यही जनता की मांग रही।
@hanumanbeniwal भजनलाल सरकार के लिए शायद इंसान की जान से ज्यादा अहम काफिले की रफ्तार है। यही वजह है कि पीड़ित बेटी तड़पती रही और सत्ता मौन रही।
@bhajanlalbjp