मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के Gen Z,
आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझा कर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को मैं फिर आपके बीच, इंदौर में रहूंगा।
मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज़, उनका दर्द और उनकी राय सुनी जानी ज़रूरी है।
नीचे दिए लिंक पर जाकर बताइए - आपको अपने सपने पूरे करने से क्या रोक रहा है? आप वीडियो बनाकर भी अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं।
आपकी समस्याएं। आपके सुझाव। हम मिलकर उम्मीद फिर से लौटाएंगे।
https://t.co/LJKkkNMrGM
#ChhatronKiGoonj
यह 2012 की प्रेस कॉन्फ्रेंस है जिसे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संबोधित किया था।
पत्रकार — आप पर लगे कोयला घोटाले के आरोपों के बारे में आप क्या कहेंगे?
डॉ. मनमोहन सिंह — मैं कानून से ऊपर नहीं हूँ और अगर CBI या कोई और मुझसे कुछ पूछना चाहे, तो मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। 🔥
ज़रा सोचिए, एक प्रधानमंत्री खुद पर लगे घोटाले के आरोपों का जवाब दे रहे हैं।
जवाबदेही का स्तर: 100% 🫡
जंतर मंतर में भूख हड़ताल करने वाली नेहा ऐस ने अपने इंस्टाग्राम पर एक विडियो के जरिए कल पटना जाने का ऐलान किया!
उनका कहना है कि बिहार में चल रहे छात्र विरोधी दमन के ख़िलाफ कल में पटना आ रही हूँ!
हमारे साथियों की रिहाई के बिना ये जीत अधूरी है, सरकार का छात्रों को दिया गया आश्वासन झूठ है!
क्या BJP सरकार ने स्टूडेंट्स के साथ फिर से धोखा किया है?
काॅकरोच ज.पार्टी का जंतर-मंतर पर अभियान शुरू हुआ तो मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आया कि बोस्टन में पढ़ने वाले अभिजीत डिपके और लेह में रहकर एनजीओ आदि चलाने वाले सोनम वांगचुक के बीच ये जुगलबंदी कैसे हुई!अब समझ में आ गया! पर कोई युवाओं को जिधर चाहे उधर हांक नहीं सकता. सब समझदार हैं!
"राहुल गाँधी के मुंह से खून निकल रहा है"
राहुल गाँधी की गिरफ्तारी के समय पत्रकार को कहते सुना-
अगर ऐसा है तो सच में इससे ज्यादा काला दिन और कोई नही होगा
इतिहास वो नहीं रचते जो डरते हैं,
इतिहास वो रचते हैं जो दम रखते हैं!
सत्य की राह पर जो कभी थका नहीं,
सत्ता के अहंकार के आगे जो कभी झुका नहीं।
देश की बेखौफ आवाज,
जननायक राहुल गांधी जी जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई।
भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
"अगर हम किसानों को इकोनॉमिकली उठा देते हैं तो देश की इकोनॉमी भी बहुत तेजी से आगे बढ़ेगी"-देविंदर शर्मा,
Devinder Sharma खाद्य एवं निर्यात नीति विशेषज्ञ !
मतलब साफ शब्दों में कहा है कि अगर देश का किसान मुस्कुराएगा तो देश मुस्कुराएगा।
#FarmerMatters#FarmerProtest
पूर्व पीएम और अपने पिता राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए भावुक पोस्ट लिखा, उन्होंने लिखा है - "पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा...आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी"
#RajivGandhi #RahulGandhi #ABPNews
पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा।
आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।
“अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा।”
लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के ये आख़िरी शब्द थे। तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा, परीक्षा रद्द होते ही टूट गया।
गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी।
ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है।
यह आत्महत्या नहीं - यह सिस्टम द्वारा हत्या है।
आंकड़े देखिए:
2015 से 2026 तक - 148 परीक्षा घोटाले।
87 परीक्षाएँ रद्द, 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित।
148 घोटालों में सज़ा हुई - सिर्फ़ 1 को।
CBI ने 17 मामले लिए, ED ने 11 - किसी को सज़ा नहीं।
NEET, AIPMT और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले।
और सबसे शर्मनाक बात:
इन घोटालों में जिम्मेदार किसी अधिकारी या मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं हुआ। हटाए जाते हैं - फिर चुपके से बड़े पद पर बैठा दिए जाते हैं। चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है, और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गँवाते हैं।
मोदी जी - कितने ऋतिक चाहिए आपकी जवाबदेही जगाने के लिए?
मेरे युवा साथियों, आपका दर्द मेरा दर्द है। आपकी मेहनत मेरी मेहनत है। आपका भविष्य चुराने वालों को जवाब देना ही होगा। चाहे जितना वक्त लगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा - ये मेरा वादा है।
यह लड़ाई हम साथ लड़ेंगे - और जीतेंगे भी।
इंदिरा गांधी और 1967 का भारत चीन युद्ध
राजाओं के ताज छीनने वाली, गरीबों को अधिकार देने वाली, पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाली, सिक्किम का भारत में विलय कराने वाली और भारत को अखंड रखने के लिए खुद को शहीद करने वाली श्रीमती इंदिरा गांधी का आज बलिदान दिवस है। ऐसे में याद करें कि कैसे इंदिरा जी ने चीन को सबक सिखाया था।
हम लोग अक्सर 1962 के भारत-चीन युद्ध की चर्चा करते हैं। और उसमें झूठ सच मिलाकर नेहरू जी की आलोचना करते हैं। लेकिन 1967 में इंदिरा गांधी के जमाने में नाथू ला और चो ला दर्रों पर भारत और चीन के बीच हुए युद्ध की चर्चा नहीं करते। यह भारत और चीन के बीच दूसरा निर्णायक युद्ध था।
इस युद्ध में भारत ने 340 चीन के सैनिक मार गिराए थे और भारत के करीब 88 सैनिक शहीद हुए थे। भारत की सेना ने चीन को पीछे खदेड़ दिया था और उसके तमाम सैनिक ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इस युद्ध के बाद से करीब 50 साल तक चीन ने भारत की सरहद की तरफ आंख उठाकर नहीं देखा।
इंदिरा गांधी यहीं नहीं रुकी। तिब्बत पर चीन के कब्जे को लेकर हम अक्सर हीनता बोध से ग्रस्त हो जाते हैं। चीन को सबक सिखाने के लिए इंदिरा गांधी ने 1975 में उस जमाने में स्वतंत्र देश सिक्किम का भारत में विलय कराया था। इस तरह हिमालय की पहाड़ियों पर चीन और भारत के बीच एक संतुलन पैदा किया गया।
इंदिरा गांधी ने चीन को जो सबक सिखाया था, वह अब जाकर नरेंद्र मोदी के समय में खत्म हुआ है। जब चीन ने पिछले साल हमला करके हमारे 20 जवानों को शहीद कर दिया और बड़ी संख्या में भारतीय जवानों को बंदी बना लिया। बाद में चीन ने हमारे जवानों को छोड़ा। इन जवानों की शहादत का बदला आज तक नहीं लिया गया।