🚨 वीडियो देखिए...
फैज़ भाई ने तथाकथित "सेक्युलर" नैरेटिव पर तीखे सवाल खड़े कर दिए। 🎯
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, कट्टरपंथ और दोहरे मापदंडों पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। ⚠️
जो लोग हर मुद्दे पर चयनात्मक संवेदनशीलता दिखाते हैं, उनके लिए यह वीडियो कई असहज सवाल छोड़ जाता है।
🎥 पहले वीडियो देखिए, फिर स्वयं तय कीजिए।
#Bangladesh #HinduLivesMatter #Video #Debate #India
हिंदू मोहल्ले में शांतिदूत की दुकान नहीं चलने देंगे
परमिशन दिखा नहीं तो अपने मोहल्ले में निकल
यह होती सीधी बात नो बकवास
उत्तराखंड का हिंदू सच मुच जाग गया है 🔥✊
“ताजिकिस्तान, जहां 97% आबादी मुस्लिम है और जहां पहले से ही बुर्का और हिजाब पर प्रतिबंध लगा हुआ है
अब कट्टरपंथ से लड़ने के लिए मस्जिदों को डांस हॉल में बदल रहा है”
💰 Waqf Board के पास आखिर हजारों करोड़ों की संपत्ति और आय का स्रोत क्या है ❓
यह पैसा कैसे आता है, किस पर खर्च होता है और इसकी पारदर्शिता कितनी है ❓
पारदर्शिता और जवाबदेही हर संस्था के लिए समान रूप से आवश्यक है‼️
🚨 "विभाजन का निर्णय मैंने ही लिया था।" -🌹 फूल वाले चचा नेहरू
मई 1964 में अपने अंतिम साक्षात्कार में नेहरू ने स्वीकार किया कि उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के विभाजन का निर्णय लिया था।
अखंड भारत को खंडित करने वालों के इतिहास को जानिए, समझिए और याद रखिए। 🇮🇳
💰 Waqf Board के पास आखिर हजारों करोड़ों की संपत्ति और आय का स्रोत क्या है ❓
यह पैसा कैसे आता है, किस पर खर्च होता है और इसकी पारदर्शिता कितनी है ❓
पारदर्शिता और जवाबदेही हर संस्था के लिए समान रूप से आवश्यक है‼️
न शिक्षा में संस्कार है और न कानून का खौफ है।
शिक्षा और कानून व्यवस्था को बदल दिया जाए तो मात्र 05 वर्ष में भारत विश्वगुरु बन जाएगा।
@narendramodi@AmitShah
#हिटलर_गांधी
स्वयंसेवकों का बलिदान..बचा संविधान!
आपातकाल की अंधेरी रात में जब संविधान, अभिव्यक्ति और लोकतंत्र पर पहरा बैठा दिया गया, तब हजारों स्वयंसेवक संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में खड़े थे।
जेल, यातनाएं और प्रतिबंध भी उनके संकल्प को डिगा नहीं सके, उनका त्याग ही लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का आधार बना।
शाह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आपातकाल में गिरफ्तार किए गए ज़्यादातर सम्मानित और बुजुर्ग नेताओं को चिकित्सीय देखभाल की आवश्यकता थी जिसकी सुविधा जेल के अस्पतालों में मौजूद नहीं थी
#लोकतंत्र_का_काला_अध्याय
सभी पहलुओं की जांच करने के बाद शाह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जिस वक्त आपातकाल की घोषणा की गई उस वक्त देश में न तो आर्थिक हालात खराब थे और न ही कानून व्यवस्था में किसी तरह की कोई दिक्कत।
#लोकतंत्र_का_काला_अध्याय