यह पोस्ट मैं भारी मन और डूबते दिल से लिख रहा हूँ।11 जून को मेरे पापा ने PGI लखनऊ में अंतिम साँस ली।पापा को हमने नहीं खोया, उन्हें एक लापरवाह मेडिकल सिस्टम ने हमसे छीन लिया।
5 मई की रात पापा को सीने में दर्द हुआ। हम घबराकर उन्हें उर्मिला हार्ट हॉस्पिटल लेकर पहुँचे। वहाँ डॉक्टर अनिल सिंह ने बिना किसी पुख्ता जाँच के तुरंत कहा — इन्हें सीवियर हार्ट अटैक आया है, हार्ट फेल हो रहा है, बचने की संभावना सिर्फ 1% है। ICU में भर्ती कर लिया गया। सैकड़ों इंजेक्शन और दवाइयाँ दी गईं, परिवार को डर में रखकर भगवान का नाम लेने को कहा गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि डॉक्टर को पता था की पापा को जो दर्द हुआ वो हार्ट अटैक नहीं बल्कि अल्कोहल और Disulfiram के रिएक्शन की वजह से हुआ था। बावजूद इसके उन्होंने कहा कि रिएक्शन से हार्ट अटैक हुआ है, और बिना किसी पुष्टि के महंगा कार्डियक ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया।
मैंने डॉक्टर से कई बार अनुरोध किया कि पापा की एंजियोग्राफी कराई जाए ताकि सही कारण पता चले, लेकिन हर बार बहाना बनाकर बात को टाल दिया गया। पापा अगले दिन खुद कहने लगे — "मुझे घर ले चलो", लेकिन डॉक्टर ने कहा कि अभी स्थिति नाजुक है, डिस्चार्ज नहीं कर सकते।
7 मई की रात 12 बजे पापा को कमर में असहनीय दर्द हुआ। ICU स्टाफ को तुरंत सूचित किया गया, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्हें केवल दर्द और नींद की दवा देकर सुला दिया गया। 2-3 घंटों में उनके दोनों पैर सुन्न हो गए। हमें सुबह 4 बजे सूचना दी गई। डॉक्टर सुबह 5 बजे आए और बोले कि पैर में दिक्कत तो है, इंजेक्शन दे दिया गया है।और बोला कि 3 4 घंटे और रुको मैं एक न्यूरोलॉजिस्ट को हार्ट हॉस्पिटल में ही बुलाने की कोशिश करता हूँ।खैर न्यूरोलॉजिस्ट को दोपहर 12 बजे उनके क्लिनिक में हमने दिखाया। उन्होंने तुरंत जरूरी स्टेरॉयड दिया। लेकिन डॉक्टर अनिल सिंह ने हमें फिर डराया कि इससे हार्ट पर असर हो सकता है। हम पहले ही डराए जा चुके थे, इसलिए कहीं और ले जाने की हिम्मत नहीं हुई।
5 दिन इसी भ्रम और डर के बीच बीते। जब कोई सुधार नहीं हुआ, तब हमने हिम्मत करके पापा को IGIMS पटना और फिर PGI लखनऊ ले जाया गया। वहाँ जो सच्चाई सामने आई, उसने हमें भीतर तक हिला दिया।
दोनों जगह डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा — पापा को कभी हार्ट अटैक हुआ ही नहीं था। ECG और ECHO पूरी तरह सामान्य थे। हार्ट की सभी दवाइयाँ बंद कर दी गईं। पैरों का सूनापन Spinal Infarct की वजह से हुई थी— एक ऐसी स्थिति जिसमें अगर 4 घंटे के अंदर सही इलाज मिल जाए तो रोगी पूरी तरह ठीक हो सकता है। लेकिन हमें झूठी जानकारी देकर, डराकर, और रोककर उस ज़रूरी समय को नष्ट कर दिया गया।जब इलाज की दिशा बदलने का समय आया, तब बहुत देर हो चुकी थी।
अब मेरे पापा हमारे साथ नहीं हैं।
उन्होंने अंतिम दिनों में बहुत तकलीफ सही — शारीरिक भी और मानसिक भी। और जो दर्द हमारे दिल में है, वो सिर्फ उनके जाने का नहीं, बल्कि यह जानने का है कि अगर समय रहते सही इलाज मिलता, तो आज वो हमारे बीच होते।मैं असहाय महसूस कर रहा हूँ।मन मे असहनीय पीड़ा है।
क्या ये सिर्फ लापरवाही थी?या एक व्यवस्थित धोखा जिससे पापा की जान चली गयी?ऊपर से 128000 का बिल थमा दिया। सिर्फ पैसे के लिए या किसी के कहने पर किसी परिवार को ऐसी पीड़ा दी जा सकती है?
मैं अब इस पोस्ट के ज़रिए सिर्फ अपना दर्द नहीं बाँट रहा हूँ, बल्कि आप सबसे सवाल कर रहा हूँ की आगे मुझे क्या करना चाहिए।
पीड़ित - अनुनय कुमार ने यह पोस्ट FB पर लिखा है।
मैं लगभग 26 साल का होने वाला हूं, इस उम्र पर भी अगर घर परिवार में कोई मुझे शादी करने को बोल देता है तो
मैं खड़े होकर ही कांपने लगता हूं, मेरे अंदर शादी को लेकर नफरत सी है।
आज यह वीडियो वायरल हो रहा है जिसे आप सबने देखा होगा, इस वीडियो में यह लड़की इस लड़के को लगातार थप्पड़ मारती है फिर अजीब तरीके से रिएक्ट करती है,
आजकल शादियों से पुरुषों का शोषण हो रहा है, रूल्स और कानून ऐसे बना दिए गए हैं जिससे एक पुरुष महिला की गलती के बाद भी सालों जेल में सड़ सकता है।
मुझे नहीं पता जीवन कैसे जिया जायेगा मगर मुझे शादी जीवन जीने का हिस्सा कभी भी नहीं लगी।
I have been heavily reported by gangs of Neo Nazi Aryan supremacists of Germany and Iran. My visibility has been heavily suppressed.
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