हरियाणा के ऊर्जा मन्त्री अनिल विज स्पष्ट करें कि फ्लैट रेट वाले नलकूपों पर स्मार्ट मीटर लगाने का क्या औचित्य है ?
सरकार की मंशा फ्लैट रेट तोड़ने की लगती है । फ्लैट रेट नहीं तो अन्य नलकूपों के लिये दस पैसे यूनिट वाली स्कीम भी ख़त्म ।
नतीजा लाखों किसानों का भविष्य चौपट ।
देश के शिक्षा सिस्टम में सुधार के लिये चल रहे छात्र आन्दोलन में राहुल गांधी ने पूरी ताक़त झोंक रखी है।
छात्रों की गूँज कार्यक्रम हो या पीएम आवास पर धरना,वो भाजपा को निशाने पर ले रहे हैं।
ऐसे में ‘आप ‘ नेताओं को दर्द क्यों ?
केजरीवाल साफ बतायें कि वे NDA के साथ हैं या INDIA के ?
संघवाद, मोदीवाद व शाहवाद को रोकने का एकमात्र रास्ता राहुल गांधी की प्रतिरोध की राजनीति है।इस राजनीति को मजबूती तभी मिल सकेगी जब विपक्ष के साथ कांग्रेस के बड़े नेता भी संघ, पीएम नरेन्द्र मोदी व अमित शाह का मुखर विरोध करें।केवल औपचारिक बयानबाजी से काम नहीं चलना । @RahulGandhi
@haryanvitai कांग्रेस केवल निर्दलीय जाट उम्मीदवारों के कारण जीती जाने वाली सीट नहीं हारी बल्कि जिताऊ की जगह कमजोर उम्मीदवार उतारना हार का बड़ा कारण बना ।
हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी दीपक बाबरिया की सच बयानी की तारीफ़ की जानी चाहिये जिसमें उन्होंने साफ़ कहा कि विधानसभा चुनाव में 10 से 15 टिकटें ग़लत बँटी ।
एक अद्भुत रिकार्ड—
कांग्रेस ने बाढड़ा में लगातार सातवीं बार बाहरी उम्मीदवार उतारा जो साथ लगते लोहारू से 9, 14, व 19 में हारा हुआ था ।
निष्कर्ष —यदि राहुल गांधी ने कांग्रेस की एलिट क्लास की मनमानी व दबदबे पर अंकुश नहीं लगाया तो पार्टी को बहुत नुक़सान होगा ।@RahulGandhi@kharge
वो सर्वे सही है जिस पर जनता मोहर लगाये कि अमुक पार्टी ने चुनाव में मज़बूत व जिताऊँ उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं जैसा कि कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में उतारे । इससे चुनावी लड़ाई जनता बनाम भाजपा हो गई ।नतीजा यह रहा कि कांग्रेस ने दस में से पाँच सीट पर फ़तह हासिल की ।
जो नेता जनसमर्थन खो देता है उसका हश्र मनोहर लाल जैसा होना तय है । उसे या तो पार्टी मारेगी या फिर मौक़ा मिलते ही जनता निबटायेगी । ज़्यादा हवा लेने का अन्जाम हर किसी के साथ ऐसा ही होता है ।
@SatyapalmalikG चंडीगढ़ मेयर चुनाव में की धान्धली व तत्पश्चात् सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद भी न ढीठ भाजपा और न गोदी मीडिया को शर्म तक नहीं आई ।
बस यह समझ लो कि भारत की लोकतन्त्रिक व्यवस्था को किस कदर ख़तरा है ।