राजस्थान पुलिस को 24 घंटों का समय दिया गया है इन गुंडों को गिरफ्तार करें,
बिना गांव वालो को परेशान किए इसमें गांव वालो का कोई योगदान नहीं है
24 घंटे निकलने के बाद राजस्थान में शुरू होगा जंतर मंतर 2.0 , जो आगे होगा उसकी जिम्मेदार हम नहीं होंगे
@Cockroachisback#schoolThikKaro
मशहूर कंपनी @letsblinkit का घटियापन देखो
अभी लड़का मुझे ऑर्डर डिलीवर करने आया मैंने उस से वैसे ही पूछा की कितने कमा लेते हो उसने बताया भाई सुबह 7 बजे से अब तक केवल 292 रुपए मिले है लेकिन उस ने एक हैरान करने वाली बात बताई
कल एक कस्टमर ने लगभग 2 घंटे ऑर्डर डिलीवरी के लिए वेट करवाया और फिर ऑर्डर कैंसिल कर दिया . ना ब्लिंकिट ने कुछ दिया ना कस्टमर ने
राइडर की क्या गलती है ये blinkit बताए और पालिसी भी पब्लिक करे ऑर्डर कैंसिल और एक्स्ट्रा टाइम पर आप राइडर को क्या देते हो ?
ये राइडरस के साथ धोखा है ब्लिंकिट
उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर के एक सरकारी विद्यालय में मिड-डे मील के नाम पर बच्चों को पानी जैसी सब्ज़ी और जली हुई रोटियाँ परोसा जाना बेहद शर्मनाक और सरकार की संवेदनहीनता का प्रतीक है।
बच्चों की थाली में भ्रष्टाचार किसी भी सभ्य समाज के माथे पर सबसे बड़ा कलंक होता है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, समय रहते अपनी शासन व्यवस्था सुधारिए। नहीं तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन और बुनियादी सुविधाएँ देने के बजाय आपकी सरकार हर घटना में, फतेहपुर के किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन की तरह, यही तलाश करती रह जाएगी कि “कहीं इसके पीछे भीम आर्मी का हाथ तो नहीं है?”
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
आज UP से लेकर राजस्थान, उत्तराखंड, MP, गुजरात जैसे राज्यों में भी लोग न्याय के लिए @BhimArmyChief की तरफ़ देख रहे हैं। भारत में ऐसा कोई नेता नहीं है जो चन्द्रशेखर जितना अपना खून-पसीना बहा रहा हो। @AzadSamajParty
A police officer SSP Avinash Panday has committed an atrocity against a Dalit youth, yet Chief Minister Yogi Adityanath remains silent.
Are Dalits meant only to be beaten and oppressed? How long will such incidents continue without accountability and justice?
As is clear from this video, this IPS officer Avinash Pandey is mentally unwell. He needs help.
He should be suspended pending treatment. Otherwise he will continue to be a threat to society and law & order.
(Side note: he took his entire team to watch Dhurandhar and gave a lecture on how great it is for policing and what not!)
दलित समाज की बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ मेरठ के SSP अविनाश पांडेय ने मारपीट की! गाड़ी में चढ़कर थप्पड़ मारा।
इसे दो स्तरों पर समझिए।
जिस बेटी की हत्या हुई, वह दलित तबके से है।
जो लोग न्याय की गुहार लगा रहे थे, वे बहुजन हैं।
इसलिए अन्याय का जवाब न्याय से नहीं मिला, बल्कि दोहरे अन्याय से मिला! अगर प्रशासन में भी डाइवर्सिटी होती, तो कुछ लोग ऐसे भी होते जो वंचितों की पीड़ा समझ पाते।
न्याय व्यवस्था हो या पुलिस प्रशासन, राजनीति हो या शिक्षा व्यवस्था, जब तक दलित, पिछड़े और आदिवासियों को उनकी आबादी के हिसाब से भागीदारी नहीं होगी, उनका प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तब तक ऐसे SSP आते रहेंगे और वंचित दोहरे अन्याय का शिकार होते रहेंगे!
मेरठ में ललिता गौतम को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना बेहद चिंताजनक है।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने तथा विरोध दर्ज कराने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया गया तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जानी चाहिए।
कप्तान SSP अविनाश पांडेय को पुलिस वैन में जाकर आंदोलन में डिटेन किए गए लोगों को थप्पड़ नही मारना चाहिए था.
पुलिस को Crowd Control की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है.
पुलिस भीड़ पर हल्का बल प्रयोग कर सकती है. लेकिन पुलिस कस्टडी में किसी को भी पीटने का अधिकार पुलिस के पास नही है.
जब मामला शांत हो चुका था. आंदोलनकारियों पकड़कर पुलिस वैन बंद कर दिया, तो वैन का दरवाजा खोलकर थप्पड़ क्यों मारा ?
UPSC को भंग करना चाहिए. इस देश को आईएएस आईपीएस से कभी कोई भला नही हुआ है. आईपीएस आईएएस आम जनता से मिलते भी हैं तो एक राजा की तरह. आम नागरिक को थप्पड़ मारना कोई बहादुरी नही है.
मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम की निर्मम हत्या ने भाजपा की डबल इंजन सरकार का महिला एवं दलित विरोधी चेहरा एक बार फिर बेनक़ाब कर दिया है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन सरकार उसकी आवाज़ सुनने के बजाय न्याय की माँग करने वालों को ही कुचलने में लगी है।
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2013 से 2024 के बीच देश में महिलाओं के विरुद्ध दर्ज अपराध लगभग 42.6% और अनुसूचित जातियों के विरुद्ध अपराध लगभग 41% बढ़े। देश में हर 2 घंटे 3 मिनट में अनुसूचित जाति (SC) की एक महिला के साथ बलात्कार होता है, यानी हर दिन 12 दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज होते हैं। ये केवल आंकड़े नहीं, भाजपा शासन में महिलाओं, दलितों और वंचितों की बढ़ती असुरक्षा का प्रमाण हैं।
जब कांग्रेस नेता पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने पहुंचते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार, नजरबंद और लाठियों से रोका जाता है। आखिर योगी सरकार किस सच को छिपाना चाहती है? विपक्ष को परिवार से मिलने से क्यों रोका जा रहा है? परिवार की बात सुनकर उसे न्याय देने के बजाय पुलिसिया दमन क्यों किया जा रहा है?
हाथरस और उन्नाव में भी देश ने देखा था कि भाजपा सरकार ने किस तरह पीड़ितों की आवाज़ दबाई और सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश की। अब मेरठ में वही दमनकारी रवैया दोहराया जा रहा है।
पीड़िता के परिवार को न्याय चाहिए, लाठियां और नजरबंदी नहीं। दोषियों को कठोरतम सजा मिले और पीड़ित परिवार की आवाज़ दबाना तत्काल बंद हो!
याद रहे…दलितों-वंचितों-मजलूमों की आवाज़ का उफान भाजपाई सत्ता के सिंहासन को जल्द उखाड़ फेंकेगा !!
मेरठ में दलित बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया है।
यदि पुलिस हिरासत में बैठे व्यक्ति के साथ भी कथित मारपीट होती है, तो यह कानून के शासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और SSP अविनाश पांडे ने जो कृत्य किया है उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
संविधान ने हमें न्याय मांगने, शांतिपूर्ण विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार दिया है। इन अधिकारों की रक्षा होना ही लोकतंत्र की असली पहचान है।
SSP मेरठ की After Conference सुन के आपके होस उड़ जाएंगे 😢😢
कोई अधिकारी इतना निर्लज कैसे हो सकता है?
सामान्यतः प्रेस कॉन्फ्रेंस ऑब्जेक्टिविटी के साथ होती हैं, यहां लगता है SSP खुद को राजा समझ बैठे हैं।
वीडियो में समझाने की कोशिश की है।
जब आप जाति व्यवस्था की सर्वश्रेष्ठ जाति में जन्म लेते हैं तो बचपन से ही आपको मनुधर्म जाति व्यवस्था के नियम सिखाए जाते है, 🔥🔥
बचपन से आपको सिखा दिया जाता है कौन उच्च है और कौन नीच, फ़िर आजीवन आप उसी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आतुर रहते हैं,
SSP अविनाश पांडे ने दलित युवक को प्रिज़न वैन के अंदर बेरहमी से पीटा,
गजेंद्र शर्मा नामक सिपाही ने आम गरीब जनता को धमकाते हुए उनके मुंह में "मूत देने" की बात कर रहा था,
इनलोगों पर कोई कार्यवाही नहीं होती क्योंकि सिस्टम में ओवर रिप्रेजेंटेट है, बड़े बड़े अधिकारी लोग इनके सजातीय होते हैं, यहां ब्राह्मणवाद का नियम फॉलो किया जाता है।