अमेरिका रूस जर्मनी के चर्च में चोरी क्यों नहीं होती है?
अरब दुबई कुवैत की मस्जिद में चोरी क्यों नहीं होती है?
चीन जापान थाईलैंड के बौद्ध मंदिर में चोरी क्यों नहीं होती है?
@PMOIndia@narendramodi
'चेकिंग करने गए जेई को दबंगों ने बंधक बनाकर पीटा'
बिजनौर में चेकिंग करने गए बिजली विभाग के जेई को दबंगों ने बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा. 'जेई सहाब' से मारपीट का वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में हरा पटका पहने एक युवक भी 'जेई सहाब' पर थप्पड़ बरसातें दिख रहा है. युवक किसान यूनियन से जुड़ा बताया जा रहा है.
यह हाल है कि ट्वीट करने भर से पुलिस पीछे लगा दी जा रही है
सुप्रीम कोर्ट में इस FIR को लेकर ममता जी पहले ही जा चुकी हैं उसके बावजूद सुनवाई से पहले उनके घर पहुंचकर धमकाने की कोशिशें हो रही हैं
इन्हें तो कोर्ट का भी डर नहीं रह गया है
कांग्रेस ने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में आई तो दलित एक्ट यानी एससी एसटी एक्ट की तरह ओबीसी एक्ट बनाएंगे उसमें ओबीसी समुदाय के व्यक्ति दलित एक्ट की तरह ब्राह्मण राजपूत भूमिहार बनिया कायस्थ जातियों के ऊपर ओबीसी एक्ट लगाकर करोड़ों रुपए का मुआवजा पाएंगे और निर्दोष लोग जेल में सड़ेंगे
है पुराना वीडियो लेकिन सवर्ण समाज दिल थाम के सुनिए जरा पूरा वीडियो....🙄🙄🙄
10 मई 2024 — ABP News को इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा कि SC/ST/OBC के आरक्षण में धर्म के आधार पर कमी नहीं होने देंगे और इसी संदर्भ में “जब तक मोदी जिंदा है” कहा।
As per data presented in Rajyasabha (by GOI):
Suicide rate (2019-2023)-
SC=13.3% (Population 16.6%)
ST=4% (Population 8%)
OBC=34.7% (Population 44-45%)
GC=48% (population 31%)
Please make "GC protection act" to save them from "caste-discrimination" in academic institutions 🙏
"हम जेल में थे, हमारे माँ बाप खत्म हो गए, दो भाई खत्म हो गए, उनके दाहसंस्कार के लिए भी नहीं निकलने दिया! जेल में हमको मारते पीटते थे! आज भी हम ठीक से चल नहीं पाते!"
-विष्णु तिवारी
बता दें कि विष्णु तिवारी को 20 साल तक जेल में फ़र्ज़ी SC/ST एक्ट लगाकर रखा गया!
और इनको 20 साल बाद, बाइज़्ज़त बरी होने के बाद भी आजतक कोई मुआवजा नहीं मिला!
किसी इंसान की जिंदगी खत्म हो गयी, लेकिन सरकार ने एक पैसा नहीं दिया! जबकि करोड़ों rupye SC/ST एक्ट में दिये जाते हैं औऱ फ़र्ज़ी केस साबित होने के बाद भी वसूले नहीं जाते!
धन्यवाद इस मीडिया को विष्णु तिवारी की आवाज़ जनता तक पहुंचाने के लिए!
हरियाणा के होडल में चोरी की नीयत से ब्राह्मण परिवार के घर में एक एससी जाति के लड़के को परिवार ने पकड़ा और पुलिस को बुला कर सौंप दिया |
दो दिन बाद लड़के और उसको बैकअप देने वालों ने मामला एससी एसटी एक्ट में बदल दिया और कहानी गढ़ दी कि मुझे जान से मारने का प्रयास किया गया और मेरे पीछे गाड़ी लगा दी गई |
जबकि ब्राह्मण परिवार पर सारे रिकार्ड हैं कि उन्होंने यूपी पुलिस को फोन कर मौके पर बुलाया और चोरी करने घर में घुसे लड़के को पुलिस के हाथों सौंपा |
आज यह ब्राह्मण परिवार एक्ट का शिकार बनाया गया और तीन दिन पहले आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर द्वारा दलित को चीटिंग करते पकड़ लेने पर एक्ट का शिकार और प्रोफेसर को निलंबित करवा दिया गया | लिखने में दो राय नहीं कि अब भारत हाई कास्ट के लिए सुरक्षित नहीं |
जिस देश में SC/ST एक्ट के तहत हुए 100 में से एवरेज 12 केस ग़लत शिकायत के निकल रहे हों
राजस्थान में तो ये नंबर 100 में से 40+ केस का है
फिर भी SC/ST एक्ट के ग़लत इस्तेमाल पर कोई चर्चा तक करने को तैयार नहीं है।
कहा तो जाता है कि 100 गुनहगार छूट जायें पर एक मासूम नहीं फँसना चाहिए.. ग़लत केस में फँसे मासूम जनरल केटेगरी के हों तो फ़रक नहीं पड़ता क्या?
राजपूत करणी सेना अध्यक्ष महिपाल सिंह
अगर SC/ST एक्ट हे और कांग्रेस बोल रही हे हम
OBC एक्ट लाएंगे तो हमें भी जनरल एक्ट चाहिए
UGC Rollback के साथ अब General Act
समानता और अधिकारों के लिए General Act
आवाज़- मांग उठेगी लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा
जय भवानी जय राजपूताना 🔥💪
एक पुरानी पोस्ट:-
कैंसर एक ऐसी बीमारी ने जिसने करोड़ो घर तबाह किए हैं ।
सिर्फ मरीज ही नहीं बल्कि मरीज के परिवारों को ।
दवाइयों का खर्च वहन करते करते लोग टूट जाते हैं ।
और कैसे नहीं टूटेंगे अगर 600 रुपये की दवाई पर सरकार ने छूट दे रखी है 12000 रुपये MRP रखने की ।
जी हाँ ।
दवाई है Paclitaxel ।
रिटेलर खरीदते हैं 600 में और MRP है 12000.
एक मरीज को कई बार 20-30 vial की ज़रूरत पड़ती है ।
और ये कोई एक दवाई की बात नहीं ।
कीमोथेरेपी की ज़्यादातर दवाइयों का यही हाल है ।
200% मार्जिन भी समझ में आता है लेकिन 1900% margin??
वो कैंसर जैसी बीमारी में , जिसका इलाज वैसे भी काफ़ी लंबा चलता है??
ग़रीब तो मर ही जाएगा ना?
ये तो ठीक नहीं हैं ना साहब ?
@PMOIndia
https://t.co/TNzzvf5gAl
"SC/ST एक्ट में मुआवजा 8.25 लाख से बढ़ाकर 30 लाख किया जाए! किसी की जान की कीमत सिर्फ 8 लाख नहीं हो सकती! फिर अपराध prove होने पर आरोपी से वसूला जाए"
-चंद्रशेखर रावण
अब इनसे सवाल?
1. सिर्फ आपके जान की कीमत है? बाकी 75% जनता के जान की कीमत नहीं?
2. अगर अपराध prove नहीं हुआ, तो 30 लाख अपनी जेब से दोगे- उसको जिसको फंसाया था झूठे इल्ज़ाम में?
गज़ब 🥱
सुप्रीम कोर्ट में SCSTACT के दुरुपयोग के खिलाफ एक याचिका लगाई गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया था कि इस एक्ट का सबसे ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है, और इसके दुरुपयोग से 493 करोड़ रुपए मुआवजे के लिए बांटे जा चुके हैं।
याचिकाकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि यह मुआवजा इस तरह से SCSTACT के केस दर्ज कराने की ओर और ज्यादा आमंत्रित करती है।
सुप्रीमकोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी, तर्क दिया है कि इसपर 2020 में पहले ही फैसला आ चुका है इसीलिए इस पर विचार नहीं किया जा सकता है।
अब समझिए, इस देश में लोकतंत्र के चार स्तम्भ हैं, न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधान पालिका, और प्रेस (मीडिया) चारो के चारों इस पर बात नहीं करना चाहते हैं जहां आज एक बहुत बड़े तबके का शोषण हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में टी.एम. कृष्णा ने “वंदे मातरम्” के छह अंतरों के अनिवार्य गायन को चुनौती दी है.
सवाल अब अदालत के सामने है—राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे तय होगा?
मेरा सवाल वंदे मातरम् पर सवाल उठाने वालों से हैं —
अगर आपत्ति सिर्फ “वंदे मातरम्” के अंतिम 4 अंतरों को लेकर है, तो यह सवाल सिर्फ एक गीत के कुछ अंतरों का नहीं रह जाता। सवाल यह भी है कि आज़ादी के आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक रहे “वंदे मातरम्” को हम आज किस नजरिए से देखते हैं?
आज़ादी की लड़ाई में “वंदे मातरम्” सिर्फ एक गीत नहीं था—यह अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना और संघर्ष का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका था.
आज संविधान हर नागरिक को अपनी धार्मिक आस्था और असहमति का अधिकार देता है। लेकिन क्या हर राष्ट्रीय प्रतीक को धार्मिक विवाद की कसौटी पर कसना जरूरी है?
वंदे मातरम् पर बहस जरूर हो सकती है, लेकिन उस बहस में इतिहास, संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ—तीनों को साथ रखकर देखना जरूरी है.
इतिहास में “वंदे मातरम्” को लेकर मुस्लिम लीग ने इसके कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताई थी।मुस्लिम लीग वाले तो आज़ादी के बाद पाकिस्तान चले गए फिर मुस्लिम लीग वाली मानसिकता यहाँ कैसे रह गई ?
#VandeMataram #SupremeCourt
@BJP4India@INCIndia
"हम जेल में थे, हमारे माँ बाप खत्म हो गए, दो भाई खत्म हो गए, उनके दाहसंस्कार के लिए भी नहीं निकलने दिया! जेल में हमको मारते पीटते थे! आज भी हम ठीक से चल नहीं पाते!"
-विष्णु तिवारी
बता दें कि विष्णु तिवारी को 20 साल तक जेल में फ़र्ज़ी SC/ST एक्ट लगाकर रखा गया!
और इनको 20 साल बाद, बाइज़्ज़त बरी होने के बाद भी आजतक कोई मुआवजा नहीं मिला!
किसी इंसान की जिंदगी खत्म हो गयी, लेकिन सरकार ने एक पैसा नहीं दिया! जबकि करोड़ों rupye SC/ST एक्ट में दिये जाते हैं औऱ फ़र्ज़ी केस साबित होने के बाद भी वसूले नहीं जाते!
धन्यवाद @roypranesh को विष्णु तिवारी की आवाज़ जनता तक पहुंचाने के लिए!
राजनीतिक दल तो छोड़िये सुप्रीम कोर्ट तक SC/ST एक्ट को लेकर सुनवाई को तैयार नहीं है।
पिटीशन को ख़ारिज कर दिया गया ये कहकर कि 2020 में आलरेडी इसपर फ़ैसला आ चुका है..
फ़ैसला आ चुका है तो क्या इस बीच कि घटनाओं पर चर्चा करते हुए दुबारा सुनवाई नहीं हो सकती?
क्या कोर्ट पहले आ चुके फैसलों के केस दोबारा कभी नहीं सुनता?
गजबे है
श्रीराम मंदिर बरसों तक बनने से रोकने के पीछे की मानसिकता क्या थी? जय श्रीराम का नारा सांप्रदायिक बनाने तक की साजिश की गई। सिर्फ इसलिए कि, देश एक न हो जाए। अब जब भारत को क्षेत्र, भाषा, जाति के नाम पर बांटने की साजिशें फिर तेज हो रही हैं, यह वीडियो साझा करना आवश्यक लगा बैंगलुरु के गणेश उत्सव में यह राम भजन सुनकर मन के तार झंकृत हो गए। कन्नड़ और हिन्दी को भी लड़ाने का प्रयास अभी तो कांग्रेस की सरकार ने किया था। संस्कृत और तमिल के बीच संघर्ष कराने का प्रयास होता ही है। डीएमके की अगुआई में कई राजनीतिक नेता सनातन को डेंगू-मलेरिया बता देते हैं, लेकिन राम सबको जोड़ देते हैं। राम-कृष्ण-शिव ही भारत को एक रख सकते हैं शक्ति की पूजा ही हमारी सामूहिक शक्ति है। हमारा मूल दैवीय कृपा से सीधे जुड़ा हुआ है। यह सुंदर रैप सुनिए, रोमांचित हो जाएंगे।
राम राम राम राम
तेलंगाना में चिंताकुंटा नाम की नहर में गणपति की प्रतिमा का विसर्जन होता है।
ये नहर इस समय सूखी पड़ी है। हिंदुओं द्वारा इसमें पानी छोड़ने की मांग की जा रही थी, जिससे गणेश विसर्जन किया जा सके।
इसी मांग को लेकर हिंदुओं ने प्रदर्शन किया तो मौलाना रेड्डी ने हिंदुओं पर बर्बर लाठीचार्ज करवाया। टोपीवालों के सामने ये कायर बुर्के में छिप जाते हैं।
आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर के साथ जो हो रहा है वह बेचैन करनेवाली है । यह शिक्षण संथाओं के बुनियाद को हिला कर रख देगा । बचपन में हम स्कूल में पढ़ते थे । हरि जी उस स्कूल में चपरासी थे । लेकिन हिंदी के विद्वान थे । जाति से कहार थे और हम सभी पैर छूते थे । दूसरे शिक्षक यादव थे जियोग्राफी पढ़ाते थे । अच्छी खासी कुटाई करते थे यदि हम टास्क न पूरा करें तो । बुढ़वा मास्टर साहब कुर्मी थे । न जाने कितनी छड़ियाँ तोड़ी लेकिन दादा जी और माता को पता लगता था तब कहती थी मास्टर साहब ने अच्छा किया । आज भी उन्हें याद कर आँखें गीली हो जाती हैं । आज हम कहाँ आकर खड़े हैं ।
शिक्षक मारना तो दूर डाँट नहीं सकता । नक़ल पकड़ने पर सस्पेंड हो जाय तो कौन शिक्षक आगे आयेगा । हम शिक्षण संस्थानों में जातीय संघर्ष का बीजारोपण बहुत पहले ही कर चुके हैं । ईश्वर ही मालिक है ।