दिल्ली
➡उत्तर प्रदेश के शिक्षकों से जुड़ी खबर
➡TET पास करना ही होगा - सुप्रीम कोर्ट
➡TET पास करने के लिए समय सीमा बढ़ी
➡सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा 1 साल बढ़ाई
➡TET की अनिवार्यता में छूट नहीं मिलेगी- SC
➡‘5 साल से अधिक नौकरी बची तो TET अनिवार्य’
➡यूपी में 1.86 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित
➡देशभर में 22 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित
#Delhi #TET #SupremeCourt
समस्त रिव्यू पिटीशन खारिज हो गईं।
बस इतना बदला कि टेट उत्तीर्ण करने की समय-सीमा 02 वर्ष से बढ़ाकर 03 वर्ष कर दी गई।
अब 01 सितंबर 2028 तक सभी के लिए टेट पास करना अनिवार्य होगा।
पर ज़रा उन शिक्षकों की मनःस्थिति भी समझिए…
वही शिक्षक,
जो कभी चुनाव ड्यूटी में खड़ा मिला,
कभी जनगणना में,
कभी भूसा ढोने के आदेश में,
कभी तपती दोपहर में सर्वे करते हुए।
जिन्होंने वर्षों तक स्कूल संभाले,
बच्चों को अक्षर ज्ञान दिया,
गाँव-गाँव शिक्षा की लौ जलाए रखी,
आज वही अपने भविष्य के लिए भय और असमंजस में खड़े हैं।
व्यवस्था कहती है —
“क्वालिटी एजुकेशन चाहिए…”
पर क्या गुणवत्ता केवल एक परीक्षा से तय होगी?
क्या उन हजारों शिक्षकों का अनुभव,
उनकी मेहनत,
उनकी सेवा,
उनकी परिस्थितियों से लड़कर पढ़ाने की जिद…
सब कुछ एक प्रमाणपत्र के आगे छोटा हो जाएगा?
टेट का विरोध नहीं है,
पर पीड़ा इस बात की है कि
जो शिक्षक वर्षों से व्यवस्था का हर बोझ उठाता आया,
उसी को हर बार कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
शिक्षक आज भी पढ़ाना चाहता है,
बच्चों का भविष्य बनाना चाहता है,
लेकिन उसके अपने भविष्य पर लगातार प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है।
आशा है व्यवस्था
सिर्फ आदेश नहीं,
शिक्षकों की परिस्थितियाँ और संवेदनाएँ भी समझेगी।
#tet #teachers #tfi @DrDCSHARMAUPPSS@TFI4India@UPPSS1921
साथियों, हार हमारी डिक्शनरी में नहीं है।
कल टीईटी (TET) अनिवार्यता के संबंध में न्यायालय से आए आदेश से हमें तनिक भी निराश या हतोत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है। यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अपने निर्णायक पड़ाव की ओर बढ़ रहा है।
हमारे अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा को इस परिस्थिति का पूर्वानुमान पहले से था। उन्होंने शुरुआत से ही स्पष्ट रूप से कहा है कि इस विषय का स्थायी और अंतिम समाधान संसद के माध्यम से ही संभव है।
स्पष्ट नेतृत्व -
1). शुरुआत से स्पष्ट दृष्टिकोण:
माननीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जी लगातार यह कहते रहे हैं कि इस प्रकरण का स्थायी समाधान संसद में कानून या नीतिगत निर्णय के माध्यम से ही निकलेगा।
2). जनशक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति:
संसद में वही जनप्रतिनिधि बैठते हैं जिन्हें हम चुनकर भेजते हैं। उन्हें समय-समय पर जनता के बीच आकर समर्थन और विश्वास प्राप्त करना होता है।
3). हमारी आवाज़ अनसुनी नहीं होगी:
जनप्रतिनिधि लाखों शिक्षकों और अभ्यर्थियों की भावनाओं, अपेक्षाओं और भविष्य के महत्व को भली-भांति समझते हैं। हमें विश्वास है कि हमारी बात उचित मंच तक पहुंचेगी।
4). संसद-केंद्रित रणनीति:
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) का आंदोलन प्रारंभ से ही संसद और नीति-निर्माताओं तक अपनी बात पहुँचाने की रणनीति पर आधारित रहा है। इसलिए हमें अपने मार्ग और उद्देश्य पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए।
साथियों, संघर्षों की राह में चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन यही चुनौतियाँ जीत का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। न्यायालय के आदेश से हमारा मनोबल कमजोर नहीं होगा। हम एकजुट हैं, संगठित हैं और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
एकता हमारी ताकत है, धैर्य हमारा हथियार है और सफलता हमारा लक्ष्य है। ✊🇮🇳
संघर्ष जारी रहेगा, जीत हमारी होगी।
- कल्पना राजौरिया (सचिव TFI)
#JusticeForTeachers #TFI #UPPSS1921 @DrDCSHARMAUPPSS
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
___"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
___जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी इतिहास।"
___एक अप्रैल ब्लैक डे ----
NO NPS ___NO UPS
We Want Only #OPS------
#NoTetBeforeRteAct
शिक्षकों की EL जैसी समस्याओं पर टीचिंग पीरियड का बहाना बनाने वाले अधिकारी,आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपी गई tet की अनिवार्यता समाप्त करने एवं ओपीएस बहाल करने जेसे मुद्दों पर चुप्पी साधने वाली सरकारों को भीड़ बढ़ाने के लिये ही शिक्षकों की याद आती है ।स्कूलों तक किताबें पहुँचाने में कोताही बरतने वाले अधिकारी शिक्षकों को भीड़ में शामिल कराने के लिए बसों की व्यवस्था में कोई कोताही नहीं बरतते हैं |हम प्रधानमन्त्री @narendramodi ji अनुरोधकरतेहैं कि अधिकारियों के आदेश पर विभिन्न जयन्ती,पुण्यतिथि एवं उद्घाटन कार्यक्रम में भीड़ के रूप में शोभा बढ़ाने वाले इन शिक्षकों की समस्याओं का संज्ञान लेने की कृपा करें |