#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष @DrDCSHARMAUPPSS जी के नेतृत्व में सरकार तक माननीय सांसदों को ज्ञापन, जनजागरण अभियान और दिल्ली रामलीला मैदान की महारैली के माध्यम से शिक्षकों के कष्ट से अवगत कराया गया और संघर्ष आज भी सतत जारी है।
परंतु अगर इतने सब पर भी सरकारें संज्ञान नहीं लेंगी तो क्या यह मान लिया जाए कि सरकार तक पीड़ा पहुंचाने और न्याय की अपेक्षा करने करने का सिस्टम अब खत्म हो चुका है?
#tfi #uppss #teacher #tet @rajendradev6 #ABPNews #aajtak
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
#UP_शिक्षकों_को_EL_दो
लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ, बिना किसी विश्राम और अवकाश के निरंतर ड्यूटी, शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका रही है।
ग्रीष्मावकाश, जो शिक्षकों के पुनः ऊर्जा प्राप्त करने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर होना चाहिए, वह भी अब कार्यों में बीत रहा है।
ऐसी स्थिति में ग्रीष्मावकाश में कराए गए कार्य के बदले अर्जित अवकाश (EL) देना कोई उपकार नहीं, बल्कि शिक्षकों का न्यायोचित अधिकार है।
उत्तर प्रदेश सरकार से विनम्र निवेदन है कि शिक्षकों की इस संवेदनशील और उचित मांग को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले शिक्षक सम्मान और संतुलन के साथ अपना दायित्व निभा सकें।
समस्त रिव्यू पिटीशन खारिज हो गईं।
बस इतना बदला कि टेट उत्तीर्ण करने की समय-सीमा 02 वर्ष से बढ़ाकर 03 वर्ष कर दी गई।
अब 01 सितंबर 2028 तक सभी के लिए टेट पास करना अनिवार्य होगा।
पर ज़रा उन शिक्षकों की मनःस्थिति भी समझिए…
वही शिक्षक,
जो कभी चुनाव ड्यूटी में खड़ा मिला,
कभी जनगणना में,
कभी भूसा ढोने के आदेश में,
कभी तपती दोपहर में सर्वे करते हुए।
जिन्होंने वर्षों तक स्कूल संभाले,
बच्चों को अक्षर ज्ञान दिया,
गाँव-गाँव शिक्षा की लौ जलाए रखी,
आज वही अपने भविष्य के लिए भय और असमंजस में खड़े हैं।
व्यवस्था कहती है —
“क्वालिटी एजुकेशन चाहिए…”
पर क्या गुणवत्ता केवल एक परीक्षा से तय होगी?
क्या उन हजारों शिक्षकों का अनुभव,
उनकी मेहनत,
उनकी सेवा,
उनकी परिस्थितियों से लड़कर पढ़ाने की जिद…
सब कुछ एक प्रमाणपत्र के आगे छोटा हो जाएगा?
टेट का विरोध नहीं है,
पर पीड़ा इस बात की है कि
जो शिक्षक वर्षों से व्यवस्था का हर बोझ उठाता आया,
उसी को हर बार कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
शिक्षक आज भी पढ़ाना चाहता है,
बच्चों का भविष्य बनाना चाहता है,
लेकिन उसके अपने भविष्य पर लगातार प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है।
आशा है व्यवस्था
सिर्फ आदेश नहीं,
शिक्षकों की परिस्थितियाँ और संवेदनाएँ भी समझेगी।
#tet #teachers #tfi @DrDCSHARMAUPPSS@TFI4India@UPPSS1921
@DrDCSHARMAUPPSS@grok परीक्षा ही दिए होते तो आपकी बात को समझने में इतनी देर ना लगती
अनपढ़ आदमी को बातें समझ में आ जा रही हैं की यह शिक्षक के साथ गलत हो रहा है लेकिन....................
@grok कृपया यह बताएँ कि माननीय Supreme court ke न्यायाधीश shri Deepanker Datta जी द्वारा हाईकोर्ट या Supreme court ke जज बनने ke लिए कभी कोई परीक्षा उत्तीर्ण की है अथवा नहीं
गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट की अनिवार्यता के संबंध में दिनांक 1 सितम्बर 2025 को दिये गये निर्णय के बाद इस मुद्दे पर संघ द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में सबाल करने वाले साथियों को हमने सदैव कहा कि लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है ।हमारी समस्या का निराकरण संसद द्वारा ही होगा ।इसलिए टीएफआई द्वारा देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंप कर अपनी बात संसद तक पहुँचायी गई ।संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और समस्या के निराकरण की मांग की ।टीएफआई द्वारा सभी जनपदों के मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मा प्रधान मंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किये गये ।
टीएफआई द्वारा 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करके भारत सरकार तक अपनी बात पहुँचाई गई ।रैली में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी को आमंत्रित किया गया और श्री पाल साहब ने आपकी लाखों की उपस्थिति और आप के मुद्दे की जानकारी सरकार तक पहुँचाई ।
माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी , भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष
श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर उच्च स्तरीय वार्ता एवं निराकरण की मांग की गई ।
चूँकि आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया है इसलिए कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ना आवश्यक है ।रिव्यू स्वीकार होने पर ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए टीएफआई ने सीनियर एडवोकेट श्री पी एस पटवालिया एवं श्री वी गिरि जी को कोर्ट में उतारा ।श्री पटवालिया जी ने टीएफआई के महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर के राज्य संगठन अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के रिव्यू में तथा श्री वी गिरी जी द्वारा उ प्र प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य के नाम से दाखिल रिव्यू में अपना पक्ष रखा ।जिसको आप वीडियो में देख सकते हैं ।
सुनवाई के दौरान सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने भारत सरकार (श्री मनमोहन सिंह सरकार)के दौरान संसद द्वारा आरटीई एक्ट के लागू होने पर दिनांक 23 अगस्त 2010 के द्वारा इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट देने का तर्क दिया गया ।लेकिन जज साहब भारत सरकार (श्री मोदी सरकार) के दौरान संसद द्वारा पारित किए गए संशोधन के क्रम में निर्गत राजपत्र दिनांक 10 अगस्त 2017 के द्वारा 31 मार्च 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टेट परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करने पर ही अडिग दिखे ।
सुनवाई के दौरान 10 राज्य सरकारों के अधिवक्ता मौजूद थे लेकिन किसी ने भी यह स्वीकार नहीं किया कि गत 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों पर टेट लागू करने हेतु कोई भी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया है ।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है जिसके शीघ्र ही आने की उम्मीद है ।वकीलों का अपना मत है लेकिन हम कामना करते हैं कि निर्णय आपके पक्ष में हो ।
निर्णय अनुकूल होने पर सभी को बधाई और यदि प्रतिकूल हो तो हतोत्साहित न हो ।हम अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ेंगे और श्री मोदी सरकार से कहेंगे कि जो पाप/अन्याय /संशोधन आपकी सरकार के दौरान हुआ है ।ऐसे संशोधन को वापस लेकर देश के 25 लाख शिक्षकों के करोड़ों परिजनों के साथ न्याय करें ।🙏🙏
माननीय रीता बहुगुणा जोशी जी पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व सांसद के प्रयाग राज स्थित आवास पर पहुँच कर उनके स्वर्गीय पति श्री पी सी जोशी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की ।मेरे साथ में श्री सुरेश कुमार तिवाठी जी पूर्व एम एल सी एवं प्रान्तीय संयोजक उ प्र शिक्षक महासंघ ,श्री संजय सिंह जी महामन्त्री,श्री शिव शंकर पांडेय जी कोषाध्यक्ष,श्री देवेन्द्र श्रीवास्तव जी संयुक्त महामन्त्री एवं श्री अनुज पांडेय जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ प्रयागराज एवं श्री अनिल पांडेय मंडलिक मंत्री भी रहे ।