अच्छे हों या बुरे,ये दिन सदा न रहेंगे,
लोग हमें,हमारे कर्मों से ही याद करेंगे।पूर्व शिक्षक-2000से सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर,दुधपुरा (समo)कन्हौली(मधुबनी),खगड़िया
जब BPSC द्वारा खुली प्रतियोगिता के माध्यम से प्रधान शिक्षक की नियुक्ति होनी है तो अनुभव की बाध्यता क्यों?सभी सेवा संपुष्टि वाले शिक्षकों को मौका देने से श्रीमान को नुकसान कैसा? #अनुभव_बाध्यता_शिथिल_करो@NitishKumar@VijayKChy
#कडवा_मगर_सच_है
जबतक आप दुनिया/किसी शहर/संस्थान में रहते हैं तभीतक लोग आपसे संबंध रखते हैं (परिवार के लोगो को छोड़कर)।
इसलिए परिवार के लोगों से संबंध को बरकरार रखें।
मैंने @Flipkart से सोलर इनवर्टर और बैटरी मंगाई थी जिसे 30 मार्च को कैंसिल किया।लेकिन 10 दिन बीत गए मेरा 31000+ का रिफंड अभी तक नहीं आया है।
@flipkartsupport
#कड़वा_मगर_सच_है
जब कोई व्यक्ति किसी पद/स्थान पर वर्षों तक रहता है तो उसके मन में #सर्वशक्तिमान होने की भावना पनपने लगती है और वह #निरंकुश होने लगता है।
#कड़वा_मगर_सच_है
किसी भी गमले से पुराने पौधे को हटाए बिना नया पौधा लगाया नहीं जा सकता है और यदि आपने लगा भी दिया तो दोनों एक दूसरे के विपरीत होंगे और दोनों का विकास अवरुद्ध हो जाता है। आपलोगों ने इसे जरूर महसूस किया होगा।
इसके अलावा पुरानी व्यवस्था एवं लोगों की सोच में परिवर्तन होने में समय तो लगेगा ही।साथ ही अधिकारियों से बेहतर सहयोग व समर्थन भी आवश्यक है क्योंकि व्यवस्था परिवर्तन में इन सबों का सामूहिक सहयोग जरूरी है।
@raveesh76 सहमत हूं। बेपटरी शिक्षा व्यवस्था को सही बनाने में समय लगेगा। जब तक सरकारी विद्यालयों की पढ़ाई का प्रभाव घरों में नहीं दिखेगा, विश्वास बहाली नहीं हो पाएगी। सरकार कुछ और कड़े कदम उठाए, विद्यालय प्रधान को विद्यालय प्रबंधन में सुधार के लिए कदम उठाने की स्वायत्तता दी जाय।
@AkbalDubey जी हाँ, बिल्कुल सही।कुछ काहिल और कामचोर लोगों को छोड़कर सभी खुश हैं।पोषक क्षेत्र में भी सकारात्मक संदेश गया है।बच्चे और अभिभावक भी खुश हैं।लेकिन अभी लक्ष्य बहुत बड़ा है।साल-दो साल में विद्यालय व्यवस्था पूर्णतः पटरी पर आ जाएगी।किंतु यदि हम भी पुरानी व्यवस्था में ढ़ल न जाएं तो....।
जी हाँ,बिल्कुल सही।हमारा जीवन केवल हमारा नहीं है।इसपर हमारे माता-पिता,पत्नी और बच्चों का भी हक है।इसलिए धीरे चलिए,सुरक्षित रहिए।विलंब हो तो होने दीजिए।इससे वेतन कटे तो कटने दीजिए। लेकिन अपने-आप को सुरक्षित रखिए।
कहा भी गया है -"जान है तो जहान है।"
जबतक सरकार #प्रधान_शिक्षकों और #प्रधानाध्यापकों को समस्त वित्तीय कार्यों #MDM आदि कार्यों से मुक्त नहीं कर देती,तबतक विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन संभव नहीं है।इसके साथ सभी जनप्रतिनियों एवं सरकारी कर्मचारियों/अधिकारी के बच्चों का नामांकन इनमें अनिवार्य हो।
जी हाँ,बिल्कुल सही लिखा आपने।
कहा भी गया है:-
"महंगा रोए एक बार,सस्ता रोए बार- बार।"
लेकिन सस्ते/अल्प वेतन पर शिक्षक नियुक्ति पीढ़ियों को बर्बाद करने की योजना सिद्ध होगी।इसलिए शिक्षकों को समुचित सम्मान,सुविधाएं व वेतन मिलना चाहिए।अन्यथा देश/प्रदेश को काफी महंगा पड़ने वाला है।
शिक्षा कोई फैक्ट्री का सामान नहीं है,जो सस्ता मज़दूर रखकर चला लिया जाए।शिक्षक की तनख्वाह उसकी योग्यता,अनुभव और मेहनत का सम्मान हैं।सस्ती शिक्षा दिखने में आसान लगती है,पर असल में यह पूरे देश को महँगा पड़ता है।
शिक्षा सबका अधिकार है,सौदा नहीं!
#BiharTeachersDemandLevelPay
#कड़वा_मगर_सच_है
हमारी बातों की विश्वसनीयता होनी चाहिए।वरना नेताओं और हममें क्या अंतर होगा?नेताजी तो अक्सर लंबे-चौड़े वादे और आश्वासन करके सत्ता पा लेते हैं।
उसके बाद यदि वे इन्हें पूरा न करें तो #जनता_मालिक उनका क्या बिगाड़ लेगी?
इसलिए इस संबंध में भी कड़े कानून बनने चाहिए।
#कड़वा_मगर_सच_है
शिक्षकों को समुचित सुविधाएं एवं सम्मान दिए बिना किसी देश/प्रदेश/समाज की उन्नति संभव नहीं है।ये समाज एवं नई पीढ़ी के मार्गदर्शक हैं।इसलिए इनकी अनदेखी किसी भी तरह से देश/प्रदेश/समाज के हित में नहीं है। #BiharTeachersMatter
#कड़वा_मगर_सच_है
इतिहास गवाह है कि संख्या बल में अधिक होने पर भी एकता के अभाव में लोग, कम संख्या बल वाले,लेकिन संगठित लोगों से पराजित हुए हैं।
इसलिए आपकी संख्या कितनी है,इससे कोई मतलब नहीं है।बल्कि आपकी एकता ही आपको सभी क्षेत्रों में सफलता दिला सकती है।